Jalore News: तेल चोरी में गिरफ्तार किये गये बगड़ी थानाप्रभारी का भाई भी है अंतरराज्यीय नकल गिरोह का सरगना

दोनों जुड़वा भाइयों की शक्ल भी काफी हद तक मिलती जुलती है.

दोनों जुड़वा भाइयों की शक्ल भी काफी हद तक मिलती जुलती है.

पाली जिले के क्रूड ऑयल चोरी केस (Crude Oil Theft Case) में गिरफ्तार कर जेल भेजे गये बगड़ी थानाप्रभारी गोपाल विश्नोई का भाई भूपेन्द्र विश्नोई भी अंतरराज्यीय नकल गिरोह का सरगना रहा है. उसे भी पिछले दिनों एसओजी ने गिरफ्तार किया था.

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जालोर. पाली जिले के बहुचर्चित क्रूड ऑयल चोरी (Crude Oil Theft Case) के मामले में नित नये खुलासे हो रहे हैं. मामले की जांच कर रही एसओजी (SOG) जैसे-जैसे इसकी गहराई में जा रही है वैसे-वैसे नई कहानियां निकलकर सामने आ रही हैं. जांच में कई अन्य आरोपी भी इसकी जद में आ सकते हैं. इस पूरे प्रकरण में आरोपियों को शह देने वाले बगड़ी थाने से हटाये गये तत्कालीन थानाप्रभारी गोपाल विश्नोई (Gopal Vishnoi) की भूमिका बेहद अहम रही है. एसओजी की जांच में सामने आया है कि न केवल गोपाल विश्नोई बल्कि उनका सगा भाई भूपेंद्र विश्नोई (Bhupendra Vishnoi) भी अपराध के दलदल में धंसा हुआ है. वह अंतरराज्यीय नकल गिरोह चलाता है. उसे भी एसओजी की जयपुर टीम ने पिछले दिनों दबोचा था. वह फिलहाल जमानत पर है.

मामले में रोचक तथ्य यह भी है कि भूपेंद्र और गोपाल जुड़वा भाई हैं. भूपेंद्र नकल प्रकरण में जेल जा चुका है और अब जमानत पर है. दूसरी तरफ गोपाल विश्नोई पुलिस महकमे में था. लेकिन क्रूड ऑयल चोरी के मामले में उसकी कारगुजारियां सामने आने के बाद उसकी भी गिरफ्तारी हुई. बाद में उसे भी अब जेल में जाना पड़ा है. जेल जाने के बाद गोपाल को सस्पेंड किया जा चुका है. दोनों भाइयों की शक्ल भी काफी हद तक मिलती है. इसके चलते कई बार लोग भी उनको देखकर गफलत में रह जाते हैं.

दोनों भाई पहले सरकारी सेवा में थे

जालोर जिले के सांचौर क्षेत्र के परावा गांव के मूल निवासी दोनों भाई पहले सरकारी सेवा में थे. आरोपी थानेदार गोपाल की दसवीं तक की पढ़ाई रानीवाड़ा के पास मालवाड़ा के एसके राजकीय विद्यालय में हुई. उसका भाई भूपेंद्र भी उसी के साथ पढ़ता था. बताया जाता है कि भूपेंद्र की रेलवे में नौकरी भी लगी. लेकिन उसके बाद वह नकल गिरोह के साथ सक्रिय हो गया. भूपेंद्र धोखाधड़ी और सार्वजनिक परीक्षा अनुचित साधनों की रोकथाम अनिययम में 9 साल तक फरार रहा था. उसे एसओजी जयपुर की टीम ने 2020 में जून माह में गिरफ्तार किया था. उसके बाद उसकी जमानत हो गई थी. ग्रामीणों के अनुसार आरोपियों के पिता राजकीय सेवा में हैं और शिक्षक के रूप में कार्यरत हैं.
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