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बारिश के दौरान आपदा से निपटना मुश्किल, संसाधन का दिख रहा अभाव

बचाव की जिम्मेदारी निभाने वाले इस महकमे के पास केवल दो नावें है.

बचाव की जिम्मेदारी निभाने वाले इस महकमे के पास केवल दो नावें है.

राजस्थान (Rajasthan) के पाली (Pali) जिले में मानसून के दौरान आपदा की स्थिति से निपटने के लिए सही इंतजाम नजर नहीं आ रहे हैं.

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पाली. पाली (Pali) जिले में मानसून आते ही आपदा प्रबंधन विंग (Disaster Management Wing) अलर्ट तो हो जाता है. लेकिन इस समय साधन औऱ संसाधन के अभाव में यह विभाग बेबस नजर आता है. राजस्थान (Rajasthan) के मारवाड़ गोडवाड के पाली जिले में बाढ़ के हालात होने पर बचाव की जिम्मेदारी निभाने वाले इस महकमे के पास केवल दो नावें है. वह भी खराब पड़ी है. इनके भरोसे किसी डूबते को बचाना मुश्किल है. जबकि पिछले साल भी पाली में बाढ़ के दौरान चार लोग बह गए थे. उस समय भी जिले में नावों की कमी खली थी. एक साल बाद फिर से वापस मानसून सिर पर आ गया है. विभाग का कहना है कि नई नावों के लिए डिमांड मुख्यालय भेजी गई है, लेकिन नहीं मिली. ऐसे में आपदा से निपटना इस महकमें के लिए मुश्किल भरा काम है.

संसाधनों की है कमी
जिले के आपदा प्रबंधन विंग के पास प्रमुख संसाधनों की कमी है. डूबते को बचाने के लिए गोताखोर चाहकर भी पानी में नहीं जा सकता. गहरे पानी में सांस लेने के लिए ब्रीथिंग एपरेटर की जरूरत होती है, लेकिन विभाग के पास वह भी नहीं है. पिछले साल जिले में बाढ़ आने के बाद रोहट के जेतपुरा नदी में दो लोग बह गए. उन्हें बचाने के लिए समय पर नावें नहीं मिली. इस कारण दोनों युवकों की जान नहीं बचाई जा सकी. इसी प्रकार रायपुर के निकट चावंडिया नदी में एक वृद्ध बह गया था. जिले में चार लोग बह गए थे, जिन्हें बचाया नहीं जा सका था. इन हालातों के बाद भी नावों की स्थिति सुधारने पर काम नहीं हुआ. अब मानसून सिर पर आ गया है, समय रहते नई नावें नहीं मिली तो बाढ़ की स्थिति में फिर संकट पैदा हो सकता है.

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प्रशासन ने बचाव के इंतजाम का किया है दावा
अच्छे मानसून के संकेत को देखते हुए जिला प्रशासन ने आपदा प्रबंधन के तहत बाढ़ बचाव की पूरी तैयारी होने का दावा किया है. जिले की सभी 10 तहसीलों में कंट्रोल रूम खोले गए हैं. बाढ़ बचाव के लिए टोल फ्री नंबर 1077 जारी कर दिए. बाढ़ बचाव आपदा प्रबंधन के प्रभारी तहसीलदार को बनाया गया है. 100 सदस्य टीम सिविल डिफेंस में है. इसमें 17 सदस्यों को और 70 होमगार्ड जिले में और लगाए गए हैं. आपदा प्रबंधन में सदस्य के पास बड़े-बड़े रस्साहाथ के मोजे, प्लास्टिक के शूज, मेगा फोन सहित कई अन्य उपकरण होने का दावा किया गया है.

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