आखिर कांग्रेस अध्यक्ष पद के लिए अशोक गहलोत ही क्यों हैं राइट च्वाइस...

पिछले एक साल में कांग्रेस में अगर किसी नेता का कद इतना अधिक बढ़ा है, तो वो सिर्फ गहलोत ही हैं. राजस्थान के सीएम बनने के बाद अब दी जा सकती है कांग्रेस अध्यक्ष पद की जिम्मेदारी.

Subhesh Sharma | News18Hindi
Updated: June 20, 2019, 10:33 AM IST
आखिर कांग्रेस अध्यक्ष पद के लिए अशोक गहलोत ही क्यों हैं राइट च्वाइस...
राजस्थान सीएम अशोक गहलोत
Subhesh Sharma | News18Hindi
Updated: June 20, 2019, 10:33 AM IST
राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत को जल्द ही एक और बड़ी जिम्मेदारी दी जा सकती है. मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, अशोक गहलोत कांग्रेस के नए राष्ट्रीय अध्यक्ष बन सकते हैं. लंबे समय के बाद कांग्रेस पार्टी में ऐसा देखने को मिल रहा है, जब पार्टी का अध्यक्ष गांधी परिवार से नहीं होगा. पढ़िए आखिर अध्यक्ष पद के लिए गहलोत ही क्यों हैं राइट च्वाइस...

पिछले एक साल में सितारे बुलंद
पिछले एक साल में कांग्रेस में अगर किसी नेता का कद इतना अधिक बढ़ा है, तो वो सिर्फ गहलोत ही हैं. उनके सितारे बुलंदी पर हैं. पहले राहुल गांधी ने उन्हें गुजरात की कमान सौंपी. यहां कांग्रेस चुनाव जरूर हारी. लेकिन गहलोत की रणनीति ने बीजेपी के हाथ-पैर जरूर फुला दिए. गुजरात के विधानसभा चुनाव में गहलोत ने पार्टी के लिए शानदार काम किया और दो दशक से सत्ता से बाहर कांग्रेस का एक तरह से प्रदेश में कमबैक कराया. इसके बाद गहलोत ने उन सभी जगहों पर कांग्रेस की ओर से मोर्चा थामा, जहां पर बीजेपी से सीधा मुकाबला था और उनके जरिए पार्टी ने हर वार का डटकर सामना किया.

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40 साल से ज्यादा लंबा राजनीतिक करियर
अशोक गहलोत तीन बार राजस्थान के मुख्यमंत्री बन चुके हैं. 2018 के विधानसभा चुनाव में उन्होंने बीजेपी को सत्ता से बाहर करने में अहम भूमिका भी निभाई थी. गहलोत का राजनीतिक करियर 40 साल से भी ज्यादा का है. उन्होंने उतार-चढ़ाव दोनों देखे हैं. उनके इस अनुभव का फायदा पार्टी को राजस्थान विधानसभा चुनाव में भी हुआ और अगर वो कांग्रेस अध्यक्ष बनते हैं, तो पार्टी को आगे भी इसका फायदा मिल सकता है.

साफ छवि
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गहलोत को साफ छवि वाले नेताओं के तौर पर देखा जाता है. इतने साल से राजनीति करते आ रहे गहलोत की छवि पर शायद ही कोई गहरे दाग-धब्बे होंगे. साथ ही विवादों से भी दूर रहे हैं. गहलोत काफी लो प्रोफाइल रहते हैं, लेकिन कड़े कदम उठाने से पीछे नहीं हटते. इसके कई उदाहरण हैं. जैसे- 2012 में आसाराम बापू को रेप के आरोप लगने पर गिरफ्तार करना हो या 2003 में विहिप के पूर्व तेजतर्रार नेता प्रवीण तोगड़िया को जेल में डालना. अगर उन्हें पार्टी का राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाया गया तो उनकी इस क्लीन इमेज का फायदा कांग्रेस को जरूर मिल सकता है.

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राहुल और कांग्रेस को है उनपर भरोसा
अशोक गहलोत की गिनती कांग्रेस के वरिष्ठ और वफादार नेताओं में होती है. वो काफी लंबे समय से पार्टी के लिए पूरी लगन से काम करते आ रहे हैं. अशोक गहलोत कांग्रेस की तीन अलग-अलग केंद्र सरकारों में मंत्री रहे. वे इंदिरा के साथ ही राजीव गांधी की कैबिनेट के भी सदस्‍य थे. बाद में नरसिम्‍हा राव सरकार में भी वे मंत्री बने. हालांकि, तांत्रिक चंद्रास्‍वामी से दूरी के चलते उन्‍हें नरसिम्‍हाराव सरकार से इस्‍तीफा देना पड़ा था. अब वे गांधी परिवार की तीसरी पीढ़ी यानी राहुल गांधी के साथ मिलकर सियासत के नए दांवपेंच चल रहे हैं.

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First published: June 20, 2019, 9:59 AM IST
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