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वसुंधरा राजे पर मेहरबान हुई गहलोत सरकार, अब खाली नहीं करना होगा बंगला

वसुंधरा राजे के लिए अलग से पॉलिसी बनाएगी राजस्‍थान सरकार.

वसुंधरा राजे के लिए अलग से पॉलिसी बनाएगी राजस्‍थान सरकार.

राजस्‍थान की पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे (Vasundhara Raje) को अब सरकारी बंगला नं.13 खाली नहीं करना होगा. अब सूबे की गहलोत सरकार (Gehlot Government) उनके लिए अलग से पॉलिसी बनाने जा रही है.

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जयपुर. राजस्‍थान की पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे (Vasundhara Raje) को अब सरकारी बंगला नं.13 खाली नहीं करना होगा. इसे लेकर गहलोत सरकार (Gehlot Government) अलग से पॉलिसी बनाने जा रही है. आपको बता दें कि हाईकोर्ट के आदेश के बाद पूर्व सीएम पर सरकारी बंगला खाली करने की तलवार लटकी हुई थी, लेकिन आज हाईकोर्ट में वरिष्ठ पत्रकार लापचंद डांडिया की अवमानना याचिका पर सुनवाई के दौरान महाधिवक्ता एमएस सिंघवी ने कहा कि वसुंधरा राजे को एमएलए कोटे से यह बंगला आवंटित किया जाएगा. इसे लेकर सरकार पॉलिसी बनाने जा रही है.

पहाड़िया को मिला नोटिस
पूर्व मुख्यमंत्री जगन्नाथ पहाड़िया को बंगला खाली करने के लिए 15 दिन का नोटिस जारी कर दिया गया है. इसके साथ ही एमएस सिंघवी ने कहा कि शेष सभी सुविधाएं पूर्व मुख्यमंत्रियों से वापस ले ली गई हैं. दरअसल, हाईकोर्ट ने 4 सितम्बर 2019 को राजस्थान मंत्री वेतन अधिनियम 1956 में किए गए संशोधन को असंवैधानिक करार देते हुए इसे अवैध घोषित कर दिया था, जिसके बाद से ही पूर्व मुख्यमंत्री सभी सुविधाएं पाने का अधिकार गंवा चुके थे. महाधिवक्ता ने कोर्ट में पेश होकर मौखिक स्टेटमेंट देते हुए कहा कि पूर्व मुख्यमंत्रियों को जो सुविधाएं दी जा रही थीं. उन्हें वापस ले लिया गया है. पूर्व मुख्यमंत्री जगन्नाथ पहाड़िया को 15 दिन का नोटिस दिया गया है. जबकि पूर्व सीएम राजे को सरकार एमएलए कोटे से बंगला आवंटित करने की पॉलिसी बनाने जा रही है.

मिल रहीं थे ये सुविधाएं
आपको बता दें कि वसुंधरा सरकार ने राजस्थान मंत्री वेतन अधिनियम 1956 में संशोधन करके पूर्व मुख्यमंत्रियों को आजीवन सरकारी सुविधाओं का हकदारी बनाया था. इन सुविधाओं में पूर्व मुख्यमंत्रियों को सरकारी बंगले के साथ 1 आरएएस अधिकारी, 10 लोगों को लिपकीय स्टाफ, 3 चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी, चालक सहित सरकारी गाड़ी जिसे राज्य व राज्य के बाहर भरपूर इस्तेमाल की छूट थी. इसका  इस्तेमाल पूर्व मुख्यमंत्री के अलावा उनका परिवार भी कर सकता था.

सुप्रीम कोर्ट भी कर चुका है एसएलपी खारिज
हाईकोर्ट के आदेश के खिलाफ राज्य सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में एसएलपी दायर की थी, जिसे सुप्रीम कोर्ट ने 6 जनवरी को खारिज कर दिया था. जबकि अदालती आदेश का पालन नहीं होने पर याचिकाकर्ता ने हाई कोर्ट में अवमानना याचिका दायर की थी, जिस पर आज अदालत सुनवाई कर रही थी. सुप्रीम कोर्ट से एसएलपी खारिज होने के बाद वसुंधरा राजे ने 17 जनवरी को गाड़ी सहित अन्य सुविधाएं लौटा दी थीं, लेकिन बंगला अभी भी उनके पास ही है.



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