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दिव्यांग तैराक जगदीश ने यूएसए का कैटलिना चैनल पार कर बनाया कीर्तिमान

दिव्यांग तैराक जगदीश ने यूएसए का कैटलिना चैनल पार कर बनाया कीर्तिमान

अंतरराष्ट्रीय तैराक जगदीश तेली ,केलवा-राजसमंद

अंतरराष्ट्रीय तैराक जगदीश तेली ,केलवा-राजसमंद

दिव्यांग तैराक जगदीश ने यूएसए का कैटलिना चैनल पार कर एक और कीर्तिमान बनाया है. जगदीश ने पूर्व में इंग्लिश चैनल 12 घंट 26 मिनट में पार करके रिकॉर्ड कायम किया था.

    राजसमंद की केलवा पंचायत के रहने वाले दिव्यांग तैराक जगदीश तेली ने एक बार फिर न सिर्फ प्रदेश का बल्कि पूरे देश का नाम गौरवान्वित किया है. लहरों के खिलाड़ी जगदीश ने पूर्व में इंग्लैंड का इंग्लिश चैनल 12 घंट 26 मिनट में पार करके रिकॉर्ड कायम किया था लेकिन अब यूएसए का कैटलिना चैनल भी सफलता पूर्वक पार कर लिया है. भारत की तरफ से इस रिले में छह दिव्यांगों की टीम पहुंची है. जिसमें कोच रोहन मोरे के निर्देश पर काम करते हुए सभी तैराक अच्छा प्रदर्शन कर रहे हैं. जगदीश ने अमेरिकी समय के अनुसार रात 10.57 से घनघोर अंधेरे मे तैराकी शुरू कर 36 किलोमीटर का सफर 11 घंटे 46 मिनट मे पूरा किया और कीर्तिमान स्थापित किया है.

    यूएसए का कैटलिना चैनल पार करते जगदीश


    पूरे प्रदेश के खिलाड़ियों मे है उत्साह

    जगदीश की इस सफलता के बाद पूरे प्रदेश के खिलाड़ियों मे जोरदार उत्साह है. सबसे गौरव की बात यह है कि विश्व मे भारत की यह पहली टीम होगी जिसने इंगलिश चैनल के बाद कैटलीना चैनल को पार किया है. जगदीश को सात दिनों मे तीन बार कैटलीना रिले करके लौटने का गौरव प्राप्त हुआ है. अन्तराष्ट्रीय तैराक जगदीश तेली इस मुकाम को हासिल कर अपने गांव पहुंचने के बाद पूरा गांव उसकी अगवानी में जुट गया, पर समाज में किसी की मौत का शोक होने से स्वागत समारोह नहीं आयोजित किया जा सका.

    फूले नहीं समा रहे माता-पिता
    उसके माता-पिता और भाई इस सफलता से फूले नहीं समा रहे हैं. जगदीश का कहना है कि इस मुकाम को हासिल करने में उनके कोच, माता-पिता का आशीर्वाद और भाइयों के साथ समाज के भामाशाहों का सहयोग सराहनीय है. आर्थिक स्थिति कमजोर होने से जगदीश के लिए यहां तक पहुंचना एक सपने जैसा था. लेकिन ऐसे समय मे समाज के अलावा केलवा और राजसमंद के भामाशाह उसका सहारा बने और आर्थिक मददकर उसे कैटलीना चैनल तक पहुंचाया.

     उसके लिए वरदान साबित हुई शारीरिक कमी

    जगदीश का कहना है कि दिव्यांगता को लोग अभिशाप मानते हैं लेकिन यही शारीरिक कमी उसके लिए वरदान साबित हुई. लोग उसे दिव्यांग समझकर उसके इस सपने का मजाक उड़ाया करते थे. लेकिन वह इससे निराश नहीं हुए और लगातार प्रयास जारी रखा. उनका सपना इससे भी आगे जाने का है. अपने बेटे की सफलता से फूली नही समा रही उसकी मां ने बताया कि जगदीश पहले तैराकी के लिए बिना बताए घर से चला जाता था. उन्हें इस बात का पता तक नहीं चला कि कब उसे प्रैक्टिस पूरी कर ली.

     

    Tags: Rajasthan news, Rajsamand news

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