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Rajasthan News: कोरोना काल में मनरेगा के तहत लोगों को रोजगार देने में राजसमंद प्रदेश में अव्वल

कोरोना काल में मनरेगा के तहत नौकरी देने में राजसमंद जिला अव्‍वल आया है. (न्‍यूज18)

कोरोना काल में मनरेगा के तहत नौकरी देने में राजसमंद जिला अव्‍वल आया है. (न्‍यूज18)

Number one in employment : नरेगा कार्यों को 8 मानकों पर ग्रेड दी जाती है. रोजगार देने के मामले में बाड़मेर और राजसमंद को संयुक्त रूप से पहली रैंक मिली है. जबकि सबसे अधिक लोगों को कार्य देने और लगातार 100 दिन का रोजगार देने में राजसमंद प्रदेश में पहले पायदान पर है.

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अल्केश संध्या

राजसमन्द- गांव में लोगों को रोजगार (Employment) देने और उनका पलायन रोकने के लिए महात्मा गांधी रोजगार गारंटी योजना ((MNREGA) शुरू की गई थी. यह योजना कोरोनाकाल (Period of corona) मे राजसमंद जिले के लोगों के लिए वरदान साबित हुई. इस योजना में राजसमंद जिले (Rajsamand district) ने प्रदेश में पहला स्थान हासिल कर नया कीर्तिमान बना दिया है.

कोरोना काल के दौरान लोगों के लिए मनरेगा योजना संजीवनी साबित हुई है. मार्च 2020 में लॉकडाउन के बाद कई प्रवासी लौटकर राजसमंद में अपने गांव आए थे. ऐसे में उनके सामने रोजगार का संकट खड़ा हो गया था. लेकिन प्रशासन ने उनको मनरेगा से जोड़कर रोजगार उपलब्ध कराया.

कोरोनाकाल में बढ़े नरेगा श्रमिक
राजसमंद कलेक्टर अरविंद पोसवाल ने बताया कि साल 2019 में जिले भर में नरेगा में 69 हजार श्रमिक कार्य करते थे, लेकिन मार्च 2020 में कोरोनाकाल आने के बाद गुजरात, महाराष्ट्र,आंध्र प्रदेश से कई सारे प्रवासी मजदूर लौट कर आए. ऐसे में जून 2020 प्रवासियों के आने से श्रमिकों की संख्या 1 लाख 9 हजार हो गई. इनमें 14089 बाहरी और 26 हजार स्थानीय लोगों को नरेगा से जोड़ा गया.

स्वीकृत कार्य बढ़ाकर 6000 किए
पोसवाल ने बताया कि कोरोनाकाल में श्रमिकों की संख्या बढ़ने के साथ ही कार्य की संख्या भी बढ़ा दी गई. ताकि ज्यादा से ज्यादा लोगों को काम मिल सके. पोसवाल के मुताबिक जहां 2019 में जिले भर में 1500 कार्य चलते थे, तो जून 2020 में जिले में 6000 कार्य स्वीकृत किए.

14 नदियों को भी किया शामिल
जिला परिषद सीईओ निमिषा गुप्ता ने बताया कि नरेगा कार्यों में नवाचार करते हुए नाली निर्माण चौराहा का विकास, ग्रामीण क्षेत्रों में सड़क निर्माण के साथ ही जिले में 14 नदियों का भी विकास किया गया. जिससे ग्रामीणों को अब जीविकोपार्जन का भी सहारा मिल रहा है.

अब कौशल विकास की ट्रेनिंग भी
राजसमंद जिले के कई प्रवासी मजदूर अन्य प्रदेशों में कार्य करते हैं. लेकिन कोरोना लॉकडाउन के कारण अब वह बेरोजगार हो गए। ऐसे में यह योजना उनके लिए वरदान साबित हुई है. यहां 100 दिन के रोजगार के बाद अब उनको कौशल विकास की ट्रेनिंग भी दी जा रही है. जिसके जरिए वह स्वरोजगार कर सकें.

आठ मानकों पर मिलती है रैंकिंग
नरेगा कार्यों को कुल 8 मानकों पर ग्रेड दी जाती है. इसमें रोजगार देने के मामले में बाड़मेर और राजसमंद को संयुक्त रूप से पहली रैंक मिली है. जबकि सबसे अधिक लोगों को कार्य देने और 100 दिन का लगातार रोजगार देने में राजसमंद प्रदेश में पहले पायदान पर रहा है.

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