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साक्षरता में पिछड़े लेकिन बेटियों के लिए दो महीने में जमा किए 22.19 लाख रुपए

साक्षरता में पिछड़े लेकिन बेटियों के लिए दो महीने में जमा किए 22.19 लाख रुपए

साक्षरता के लिहाज से पिछड़े जिलों में शामिल सिरोही और जालोर में अब माता-पिता बेटियों कि शिक्षा-दीक्षा के प्रति जाररुक होने लगे है। यह सब संभन होता दिख रहा है हाल ही में लांच हुई 'सुकन्या समृद्धि खाता योजना' के कारण। इस योजना के तहत महज दो माह के भीतर ही अब तक दोनों जिलों के डाकघरों में सवा दो हजार से ज्यादा खाते खुल चुके हैं। जिनमें 22 लाख 19 हजार रुपए जमा हो चुके हैं।

साक्षरता के लिहाज से पिछड़े जिलों में शामिल सिरोही और जालोर में अब माता-पिता बेटियों कि शिक्षा-दीक्षा के प्रति जाररुक होने लगे है। यह सब संभन होता दिख रहा है हाल ही में लांच हुई 'सुकन्या समृद्धि खाता योजना' के कारण। इस योजना के तहत महज दो माह के भीतर ही अब तक दोनों जिलों के डाकघरों में सवा दो हजार से ज्यादा खाते खुल चुके हैं। जिनमें 22 लाख 19 हजार रुपए जमा हो चुके हैं।

साक्षरता के लिहाज से पिछड़े जिलों में शामिल सिरोही और जालोर में अब माता-पिता बेटियों कि शिक्षा-दीक्षा के प्रति जाररुक होने लगे है। यह सब संभन होता दिख रहा है हाल ही में लांच हुई 'सुकन्या समृद्धि खाता योजना' के कारण। इस योजना के तहत महज दो माह के भीतर ही अब तक दोनों जिलों के डाकघरों में सवा दो हजार से ज्यादा खाते खुल चुके हैं। जिनमें 22 लाख 19 हजार रुपए जमा हो चुके हैं।

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साक्षरता के लिहाज से पिछड़े जिलों में शामिल सिरोही और जालोर में अब माता-पिता बेटियों कि शिक्षा-दीक्षा के प्रति जाररुक होने लगे है। यह सब संभन होता दिख रहा है हाल ही में लांच हुई 'सुकन्या समृद्धि खाता योजना' के कारण। इस योजना के तहत महज दो माह के भीतर ही अब तक दोनों जिलों के डाकघरों में सवा दो हजार से ज्यादा खाते खुल चुके हैं। जिनमें 22 लाख 19 हजार रुपए जमा हो चुके हैं।

उल्‍लेखनीय है कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ अभियान के तहत बालिकाओं के लिए 'सुकन्या समृद्धि खाता योजना' दो माह पहले प्रारंभ की थी।

जानिए क्या है सुकन्या समृद्धि खाता योजना
10 वर्ष तक की बालिका का डाकघर में खाता खुलवाया जा सकता है। 2015 में यह आयु 11 वर्ष है। एक हजार रुपए से अधिकतम डेढ़ लाख रुपए तक सालाना जमा कर सकते हैं। 9.1 प्रतिशत ब्याज दर मिलेगी और आयकर से मुक्त होने के चलते काफी लोग आकर्षित हो रहे हैं। खाता खोलने के 21 वर्ष पूरे होने पर खाता परिपक्व होगा। कन्या के विवाह के बाद खाता बंद किया जा सकता है।

सिरोही में क्यूं खास है योजना की सफलता
इस योजना की सफलता इसलिए भी खास हो जाती है क्योंकि वर्ष 2011 की जनगणना के आंकड़ों के अनुसार जालोर जिले में 54.86 प्रतिशत ही साक्षरता है। जालोर में महिला साक्षरता तो मात्र 38.47 प्रतिशत ही है। सिरोही जिले के हालात भी कुछ ठीक नहीं है। यहां 55.25 प्रतिशत लोग ही लोग साक्षर हैं। इसमें भी महिला साक्षरता की भागीदारी मात्र 39.73 प्रतिशत ही है।
जालोर-सिरोही डाक मंडल के अधीक्षक देवाराम पुरोहित का कहना है कि यह योजना सर्वाधिक ब्याज दर और आयकर मुक्त होने के कारण काफी लोकप्रिय हो रही हैं। केन्द्र सरकार की इस महत्वपूर्ण योजना से बेटियों का भविष्य सुरक्षित हो सकेगा।
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