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कॉलेज के पहले साल में अनूठी मिसाल बनी राजस्थान की ये लड़की
Sawai-Madhopur News in Hindi


Updated: March 1, 2017, 9:00 PM IST

राजस्थान के सवाई माधोपुर में पिछले 25 सालों से जो काम कोई राजनेता नहीं कर सका उसकी जिम्मेदारी इन दिनों एक 18 साल की लड़की ने उठा रखी है.

  • Last Updated: March 1, 2017, 9:00 PM IST
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राजस्थान के सवाई माधोपुर में पिछले 25 सालों से जो काम कोई राजनेता नहीं कर सका उसकी जिम्मेदारी इन दिनों एक 18 साल की लड़की ने उठा रखी है.
हम बात कर रहे हैं, स्वाति टाटू की. स्वाति ने जिला मुख्यालय पर फुटपाथ पर गुजर-बसर करने वाले परिवारों के बच्चों की शिक्षा का जिम्मा उठाया है. स्वाति इसी साल स्कूल से कॉलेज पहुंची है और कॉलेज के बाद का समय निकाल कर सड़क किनारे इन बच्चों को पढ़ाती है.
पहले 2-4 फिर 10-12 और अब 25 से 30 बच्चें उसके रोड साइड स्कूल में पढ़ने आने लगे हैं. ये बच्चे खानाबदोश लुहार, ढकोले (बांस की टोकरी) बनाने वाले और ढोल बजाने वालों की भांड बस्ती से हैं. इन बच्चों के माता-पिता भी स्वाति की इस पहल से खासे खुश हैं. वे कहते हैं कि पिछले 25 सालों से वोट लेने वाले नेताओं ने कभी उनके बच्चों की नहीं सोची लेकिन ये बच्ची उनका भला चाहती है.

स्कूल टाइम में इनके लिए कुछ करना चाहती थी



स्वाति ने न्यूज18 हिंदी को बताया कि वो कई सालों से इस इलाके से वाकिफ है. स्कूल के रास्ते में रोज यहां गंदे-कुचले बच्चों को सड़क पर खेलते, घूमते और आपस में लड़ते-झगड़ते देखती थी. स्कूल के बच्चों के तरह इन्हें कोई तैयार कर स्कूल नहीं भेजता, इनकी किसी को इतनी फिक्र क्यों नहीं होती यही सवाल दिमाग में घूमता रहता था. लेकिन चाहकर भी कुछ नहीं कर पाती थी.


कॉलेज पहुंची तो अरमानों के पंख निकल आए
स्वाति बताती हैं कि वह स्कूल से जब कॉलेज पहुंची तो कई जगह घूमने का मौका मिला. कॉलेज के जिम कॉर्बेट नेशनल पार्क टूर में कुछ ऐसे लोगों को देखा जो निस्वार्थ भाव से दूसरों की सेवा कर रहे थे. बस मेरे अरमानों को भी मानो पंख निकल आए हों. मैं घर लौट कर अपने स्कूल के रास्ते रहने वाले उन बच्चों के पास पहुंची जो न स्कूल जाते थे और न पढ़ाई-लिखाई से उनका कोई वास्ता रहा. बस उनसे पूछा... स्कूल जाने वाले बच्चों की तरह तुम भी स्मार्ट बनोंगे? पढ़ोंगे? बच्चों को मेरा आइडिया बुरा नहीं लगा और जैसा मैंने कहा ... पढ़ने लिखने को तैयार हो गए.



 

पिता से शाबासी मिली तो हौसला बढ़ता गया
जिला मुख्यालय की मीणा कॉलोनी में रहने वाली स्वाति ने जब इन बच्चों को पढ़ाने की बात पिता हंसराज मीणा को बताई तो उसे शाबासी मिली. वो बताती हैं कि पिता से हौसला अफजाई के बाद वो बच्चों को शिक्षित करने के लिए कुछ भी करने को तैयार हो गई. पिछले दो-ढाई महीनों में ही वह उन्हें हिंदी के क...ख...ग... ही नहीं अंग्रेजी के ए...बी...सी... भी सीखा चुकी हैं.



नहाकर नहीं आते तो खुद ने नहलाना शुरू किया

स्वाति इन बच्चों को पढ़ाई-लिखाई के साथ साफ-सफाई का भी पाठ पढ़ा रही है. जो बच्चें कई दिनों तक नहीं नहाते थे उन्हें खुद नहलाना शुरू कर दिया. साफ सुधरे रहने के साथ स्वाति इन बच्चों को ट्रेफिक रूल भी याद कराती है.

अब मिशन- स्कूल में एडमिशन

स्वाति ने अब अपना अगला मिशन क्लास में आने वाले बच्चों का एडमिशन अब सरकारी स्कूल में कराना बना लिया है. वो बताती हैं कि इलाके के सरकारी स्कूल में बात भी कर ली है लेकिन अभी एडमिशन संभव नहीं है. नए सेशन से ही स्कूल वाले इन बच्चों को एडमिशन देंगे, वो भी इस शर्त पर की वो स्कूल न छोड़े. वो कहती है... अब मैंने बच्चों के पेरेंट्स से बात की है कि कभी स्कूल न छुड़वाए. लेकिन यह काम अभी थोड़ा मुश्किल है क्यों कि आधे से ज्यादा परिवार कभी यहां रहते हैं कभी कहीं ओर चले जाते हैं. अब देखना है कि स्वाति की यह पहल इन बच्चों का जीवन संवारने में कितना मददगार साबित होती है.

(सवाई माधोपुर से दिलीप कुमार पाटीदार के सहयोग से)

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First published: March 1, 2017, 8:17 PM IST
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