अब सड़क निर्माण के नाम पर नहीं कटेंगे पेड़, एनजीटी ने अपनाया कड़ा रुख
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अब सड़क निर्माण के नाम पर नहीं कटेंगे पेड़, एनजीटी ने अपनाया कड़ा रुख
सड़कों के विकास के नाम पर अब लाखों हरे भरे पेड़ों की बली नहीं चढ़ाई जाएगी.

सड़कों के विकास के नाम पर अब लाखों हरे भरे पेड़ों की बली नहीं चढ़ाई जाएगी.

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सड़कों के विकास के नाम पर अब लाखों हरे भरे पेड़ों की बली नहीं चढ़ाई जाएगी.

ढाई साल चली लंबी कानूनी लड़ाई के बाद अब एनजीटी ने इस मामले में सख्त दिशा निर्देशों के साथ मामले का निस्तारण कर दिया है. पहले विकास के नाम पर जो पेड़ काटे जा चुके हैं, उनके बदले मार्गों पर लगने वाले पौधे 100 जीवित होना भी सुनिश्चित होगा.

सड़क विकास के नाम पर पेड़ों की कटाई के मामले में कड़ा रुख अखतियार करते हुए नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल ने नेशनल हाईवे आथोरिटी को रोड बनाने के साथ ही  पौधारोपण करने और उनकी सुरक्षा के लिए  पौधों की सुरक्षा ट्री-गार्ड या फेन्सिंग से पुख्ता करने के निर्देश दिए हैं. मामले  वन विभाग और एनएचएआई की ओर पालना रिपार्ट भी पेश कर दी गई है.



एनजीटी भोपाल में जस्टिस दलिप सिंह और बिक्रम सिंह साजवान की बैंच ने भीलवाड़ा निवासी पर्यावरणविद् बाबूलाल जाजू की जनहित याचिका पर कड़ा रुख अख्तियार किया है. नए आदेशों के मुताबिक अब नेशनल हाईवे आथोरिटी को राजस्थान में हाईवे चोड़े करने के नाम पर काटे गए लाखों पेड़ों के बदले नियमानुसार दोगुने व तिगुने संख्या में पौधे लगाने ही होंगे. हाईवे के निर्माण के साथ ही पौधे लगाने होंगे और इन पौधे की लम्बाई 5 फीट से कम नहीं होनी चाहिए.
वन विभाग और एनएचएआई को पौधें लगाकर पेड़ बनने तक रखरखाव की व्यवस्था भी करनी होगी जिसके लिए उन्हें ट्री-गार्ड या फेन्सिंग कर 100 प्रतिशत सुरक्षा करनी होगी.  मामले को लेकर 13 अक्टूबर को दिए गए आदेशों के बाद वन विभाग और एनएचएआई ने पालना रिपोर्ट पेश कर दी और एनजीटी की ओर दिए गए सभी निर्देशों की पालना की जाएगी,,पालना रिपोर्ट पेश करने के बाद में एनजीटी ने मामले का निस्तारण कर दिया है.
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