सीकर में पहली बार गीले कचरे से खाद बनाने का प्रयोग, इस वजह से हुई देर

सीकर जिले में स्वच्छता सर्वेक्षण की तैयारी में जुटी परिषद ने बिना संसाधनों के ही गीले कचरे से खाद बनाना शुरू कर दिया है.

News18 Rajasthan
Updated: May 16, 2019, 6:18 PM IST
सीकर में पहली बार गीले कचरे से खाद बनाने का प्रयोग, इस वजह से हुई देर
सांकेतिक तस्वीर
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Updated: May 16, 2019, 6:18 PM IST
राजस्थान के सीकर जिले में स्वच्छता सर्वेक्षण की तैयारी में जुटी नगर परिषद ने बिना संसाधनों के ही गीले कचरे से खाद बनाना शुरू कर दिया है. सीकर के नानी गांव में शुरू किए गए खाद बनाने के इस प्लांट पर अभी तक टिन शेड भी नहीं लगाए गए हैं. ऐसे में कड़ी धूप के कारण कचरे से खाद तैयार होने में भी एक माह अधिक का समय लग रहा है. जनवरी माह में शुरू किए गए इस प्रयोग की स्थिति यह है कि अभी तक खाद तैयार नहीं हो सका है. परिषद के कर्मचारी मंगलवार को तेज धूप में ही इस ढेर को पलटते नजर आए.

कंपोस्टिंग मशीन लगाने की योजना



नानी के प्लांट में भले ही अभी तक शेड नहीं लगा है, जबकि परिषद ने शहर में तीन स्थानों पर कंपोस्टिंग मशीन लगाने की योजना बना रखी है. इनमें से एक मशीन नवलगढ़ रोड पुलिया के पार जीएसएस के पास परिषद की खाली पड़ी जमीन पर लगाई जाएगी. इसके लिए परिषद ने 22 लाख रुपए की लागत से एक मशीन खरीद ली है. अभी दो और मशीन खरीदने की प्रकिया चल रही है.

पार्कों में उपयोग लेने की कवायद नानी बीड में तैयार की जा रही गीले कचरे की खाद का उपयोग शहर के पार्कों में किए जाने की योजना है. गीले कचरे का निस्तारण के लिए यह कवायद शुरू की गई, लेकिन अभी तैयार खाद किसी भी पार्क में काम नहीं आई है.

परिषद ने पहली कंपोस्टिंग मशीन पिपराली रोड पर लगाने का फैसला किया है, क्योंकि इस क्षेत्र में सर्वाधिक छात्रावास है. इसके अलावा फल-सब्जी की अस्थाई मंडी भी पुलिया के पास है. डोर-टू-डोर कचरा संग्रहण के दौरान मिले गीले कचरे का इस मशीन में उपयोग किया जाएगा. इसमें खास बात यह है कि परिषद ने मशीन देने वाली कंपनी ही 5 वर्ष तक इस मशीन के संचालन और रख रखाव का जिम्मा संभालेगी.

जनवरी में शुरू हुआ था कार्य

गीले कचरे से सामान्य तरीके से 90 में खाद तैयार हो जाती है. परिषद के अधिकारियों ने बताया कि खाद बनाने के लिए गड्ढा खोदकर गीले कचरे का ढेर बनाया जाता है. इस ढेर को हर सप्ताह जेसीबी की सहायता से पलटना होता है. साथ ही इसमें पानी और अन्य सामग्री डाली जाती है. परिषद ने सीकर में खाद बनाने का कार्य जनवरी माह में शुरू किया था. प्लांट पर सैड नहीं होने के कारण धूप सीधे ही ढेर पर गिरती है. धूप से सीधे बचाने के लिए परिषद ने ढेर को मोटे कपड़ों से ढक रखा है.
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सीकर नगर परिषद स्वास्थ्य अधिकारी गौरव सिंह ने कहा कि प्रदेश में पहली बार स्वयं के स्तर पर गीले कचरे से खाद बनाने का प्रयोग शुरू किया गया है. खाद तीन माह में तैयार हो जाती है, लेकिन सैड नहीं होने से एक माह ज्यादा लग गया. जल्द ही तैयार खाद का शहर के पार्कों में उपयोग शुरू किया जाएगा. शहर में तीन स्थानों पर कंपोस्टिंग मशीन भी लगाई जा रही है.

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