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स्वामी सुमेधानंद सरस्वती- पांच साल पहले राजनीति में कदम रखकर बनाया मुकाम

स्वामी सुमेधानंद सरस्वती। फोटो एफबी।

स्वामी सुमेधानंद सरस्वती। फोटो एफबी।

सीकर जिले में गौ संरक्षण और शिक्षा संस्कार से जुड़े स्वामी सुमेधानंद सरस्वती आज शेखावाटी की राजनीति में जाना माना नाम है. गत लोकसभा चुनाव से राजनीति में प्रवेश करने वाले सीकर के मौजूदा सांसद सुमेधानंद इस बार फिर चुनाव मैदान में डटे हुए हैं.

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हरियाणा से आकर राजस्थान के सीकर जिले में गौ संरक्षण और शिक्षा संस्कार से जुड़े स्वामी सुमेधानंद सरस्वती आज शेखावाटी की राजनीति में जाना माना नाम है. गत लोकसभा चुनाव से राजनीति में प्रवेश करने वाले सीकर के मौजूदा सांसद सुमेधानंद इस बार फिर चुनाव मैदान में डटे हुए हैं. योग गुरु बाबा रामेदव के सहयोग से राजनीति में कदम रखने वाले सुमेधानंद ने गत लोकसभा चुनाव में कांग्रेस से सीकर की सीट छीनकर बीजेपी की झोली में डाली थी.

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हरियाणा के रोहतक निवासी सुमेधानंद आर्य समाज से जुड़े हुए हैं. सुमेधानंद ने 1973 में घर बार त्‍याग कर विभिन्न गुरुकुलों में आध्‍यात्‍मिक ग्रन्‍थों का अध्‍ययन किया. 1980 में राजस्थान से जुड़े और 1984 के बाद उनका लगातार यहां आना-जाना शुरू हो गया. अक्टूबर 1996 में उन्होंने सीकर जिला मुख्यालय के समीपवर्ती पिपराली कस्बे में वैदिक आश्रम की स्थापना कर गौ संरक्षण और शिक्षा संस्कार का कार्य शुरू किया. इस बीच सुमेधानंद 1991 से 1993 तक आर्य समाज राजस्थान के महामंत्री रहे 1993 से 1996 तक अध्यक्ष रहे.

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ढाई दशक से सीकर में शिक्षा संस्कार के कार्य में जुटे हैं
करीब ढाई दशक से स्वामी सुमेधानंद विभिन्न प्रकल्पों के जरिए सीकर जिले में गौ-सेवा और शिक्षा संस्कार को बढ़ावा देने में जुटे हैं. सीकर जिले के करीब-करीब सभी स्कूलों में सुमेधानंद की कभी न कभी किसी न किसी कार्यक्रम में सहभागिता रही है. उनका यही कार्य उनकी लोकप्रियता बन गई.

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गत लोकसभा चुनाव में पहली बार चुनाव मैदान में उतरे
उनकी इस लोकप्रियता को देखते हुए बीजेपी ने अपनी संत शरण की नीति के तहत गत लोकसभा चुनाव में सुमेधानंद सरस्वती को चुनाव मैदान में उतारा. लेकिन उनके अचानक राजनीति में आने और आते ही टिकट मिल जाने से सीकर में पार्टी की टिकट के लिए दावेदारी जता रहे पूर्व केन्द्रीय मंत्री सुभाष महरिया को नागवार गुजरा.

फाइल फोटो


महरिया ने खड़ी की थी मुश्किलें
महिरया ने सुमेधानंद का विरोध करते हुए चुनाव मैदान में बागी के रूप में ताल ठोक दी. इससे सुमेधानंद के सामने थोड़ी परेशानियां जरूर आई, लेकिन उनकी खुद की लोकप्रियता और मोदी लहर के आगे महरिया का विरोध टिक नहीं पाया. हालांकि कांग्रेस ने भी सीकर में अपने मौजूदा सांसद महादेव सिंह का टिकट काटकर विद्युत निगम के बड़े अधिकारी रहे पीएस जाट को चुनाव मैदान में उतारा था, लेकिन वे भी कुछ ज्यादा करामात दिखा नहीं पाए.

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करीब 2,40,000 मतों से कांग्रेस प्रत्याशी को पराजित किया
पहले ही चुनाव में सुमेधानंद ने करीब पांच लाख मत प्राप्त कर कांग्रेस के पीएस जाट को लगभग 2,40,000 मतों से पराजित किया. इस चुनाव में महरिया महज करीब 1,88000 मत ही प्राप्त कर पाए थे. उसके बाद बागी हुए महरिया ने कांग्रेस का दामन थाम लिया. कांग्रेस ने इस बार महरिया को सुमेधानंद के सामने फिर चुनाव मैदान उतारा है. हालांकि इस बार भी अंदरखाने पार्टी में सुमेधानंद के खिलाफ सुर उठे हैं, लेकिन पीएम नरेन्द्र मोदी ने यहां सभा कर उसे शांत कर सुमेधानंद को फिर से लोकसभा में भेजने की पुरजोर अपील की है.

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