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सीकर लोकसभा सीट : देश में जाट राजनीति का रुख मोड़ने का श्रेय है इस क्षेत्र को

फोटो : न्यूज 18 राजस्थान ।
फोटो : न्यूज 18 राजस्थान ।

शेखावाटी के तीन जिलों में से सीकर लोकसभा क्षेत्र का अपना अलग महत्व है. सैनिकों का जिला माने जाने वाले इस संसदीय क्षेत्र की राजनीति प्रदेश के अन्य क्षेत्रों से कुछ जुदा है. यह वह लोकसभा क्षेत्र है, जिसने देशभर में जाट राजनीति को नए आयाम दिए हैं.

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राजस्थान की राजनीति में अहम स्थान रखने वाली शेखावाटी को यूं तो कांग्रेस का गढ़ माना जाता है, लेकिन पिछले कुछ समय से यहां के राजनीतिक समीकरण बदले हैं. खासकर गत लोकसभा चुनाव के समय चली मोदी लहर से शेखावाटी भी अछूता नहीं रहा था. शेखावाटी अंचल में शामिल सीकर,चूरू और झुंझूनूं में तीनों ही जगह बीजेपी ने परचम लहराया था. लेकिन इस बार फिर परिस्थितियां में बदलाव आ रहा है.

शेखावाटी के इन तीन जिलों में से सीकर लोकसभा क्षेत्र का अपना अलग महत्व है. सैनिकों का जिला माने जाने वाले इस संसदीय क्षेत्र की राजनीति प्रदेश के अन्य क्षेत्रों से कुछ जुदा है. यह वह लोकसभा क्षेत्र है, जिसने देशभर में जाट राजनीति को नए आयाम दिए. सीकर की ही धरती से पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने 1999 में जाटों को आरक्षण देने की घोषणा की थी. इसके बाद देशभर में जाट राजनीति में हलचल पैदा हो गई थी. यह वह लोकसभा क्षेत्र है जिस पर स्थानीय ही नहीं बाहर के कई दिग्गज नेताओं की नजर रही है. यहां से पूर्व लोकसभा अध्यक्ष डॉ. बलराम जाखड़ और पूर्व उप प्रधानमंत्री चौधरी देवीलाल भी सांसद रह चुके हैं.

बीजेपी और कांग्रेस जाट प्रत्याशी पर ही दांव लगाती रही है
जाट बाहुल्य सीकर संसदीय क्षेत्र में कांग्रेस और बीजेपी पिछले काफी समय से जाट प्रत्याशी पर ही दांव लगाती रही है. वर्तमान में इस क्षेत्र से बीजेपी के स्वामी सुमेधानंद सरस्वती सांसद हैं. स्वामी सुमेधानंद भी सीकर जिले के नहीं हैं. वे पड़ोसी राज्य हरियाणा से ताल्लुक रखते हैं और जाट जाति से हैं. लेकिन बरसों से सीकर के समीप स्थित पिपराली कस्बे में अपना आश्रम बनाकर रह रहे हैं. सीकर जिले आठ विधानसभा क्षेत्रों में से फतेहपुर को छोड़कर सात विधानसभा क्षेत्र और जयपुर का चौमूं विधानसभा क्षेत्र सीकर लोकसभा क्षेत्र में शामिल हैं.
पीएम मोदी के साथ सीकर सांसद स्वामी सुमेधानंद सरस्वती। फोटो एफबी




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आठ विधानसभा क्षेत्र शामिल हैं संसदीय क्षेत्र में
संसदीय क्षेत्र में सीकर, लक्ष्मणगढ़, नीमकाथाना, धोद, श्रीमाधोपुर, खण्डेला, दांतारामगढ़ और चौमूं शामिल हैं. जिले का फतेहपुर विधानसभा क्षेत्र झुंझुनूं जिले में शामिल है. विधानसभा चुनावों के आंकड़ों के अनुसार संसदीय क्षेत्र में कुल 21,98,913 मतदाता हैं. जातीय समीकरणों के लिहाज से यह जाट बाहुल्य क्षेत्र है. चौमूं विधानसभा क्षेत्र में जरूर माली मतदाताओं की बहुलता है. लोकसभा चुनावों में मतदाताओं की सख्यां में आंशिक बढ़ोतरी हो सकती है, क्योंकि अभी मतदाता सूचियों के पुनरीक्षण का कार्य चल रहा है.

तीन बार सांसद रहे हैं महरिया
पिछले पांच लोकसभा चुनावों की बात करें तो यहां 1996 कांग्रेस के डॉ. हरिसिंह सांसद बने थे. डॉ. सिंह ने बीजेपी के सुभाष महरिया को 38,009 मतों से पराजित किया था. लेकिन महरिया ने 1998 के लोकसभा चुनावों में डॉ. सिंह से अपनी हार का बदला ले लिया. इस चुनाव में बीजेपी के सुभाष महरिया ने कांग्रेस प्रत्याशी डॉ. सिंह को 41,322 वोटों से हरा दिया. उसके बाद महरिया ने 1999 में कांग्रेस के डॉ. बलराम जाखड़ को 28,173 मतों से हराया. 2004 में सुभाष महरिया ने फिर तत्कालीन प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष नारायण सिंह को 54,683 मतों से शिकस्त दी.

सुभाष महरिया। फाइल फोटो


महरिया बागी हुए फिर भी सुमेधानंद जीते
उसके बाद महरिया 2009 कांग्रेस के महादेव सिंह से मात खा गए. इस चुनाव में महादेव सिंह ने महारिया को 1,49,348 मतों से हराया. 2014 में बीजेपी ने यहां से अपना प्रत्याशी बदलकर स्वामी सुमेधानंद सरस्वती को टिकट थमाया तो महरिया बागी हो गए. कांग्रेस ने भी अपना प्रत्याशी बदलते हुए विद्युत निगम के सेवानिवृत अधिकारी पीएस जाट को मैदान में उतारा. लेकिन वे सुमेधानंद के सामने टिक नहीं पाए और 2,39,196 मतों से हार गए.

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बरसों पुराने मुद्दे आज भी कायम हैं
संसदीय क्षेत्र में आज भी वे ही मुद्दे हैं जो बरसों चले आ रहे हैं. सीकर में मेडिकल कॉलेज की मांग, सीकर दिल्ली और जयपुर ट्रेन के फेरे बढ़ाना,
सीकर-नीमकाथाना रेलवे ट्रेक का सर्वे, क्षेत्र के धार्मिक स्थल खाटूश्यामजी, जीणमाता और शाकम्भरी को रेल सेवा से जोड़ने के मुद्दे बरसों से कायम हैं. इनके साथ ही हर्ष पर्वत को पर्यटन को पर्यटन की दृष्टि से विकसित करना और कुम्भाराम लिफ्ट परियोजना से पानी लाने की मांग भी यथावत है. हर चुनावों में इनके लिए वादे किए जाते हैं. आश्वासन दिए जाते हैं, लेकिन वो पूरे नहीं होते.

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