Sikar Mass Suicide Case: बेटे के गम ने ऐसा तोड़ा कि जीने की इच्छा ही नहीं रही, सुसाइड नोट ने खोले राज

अपने परिवार के साथ आत्महत्या करने वाले  हनुमान ने सुसाइड नोट में अपने भाई को संबोधित करते हुये लिखा कि बेटे अमर का कड़ा और उसके जन्म के बाल हमारे साथ ही गंगा में बहा देना.

अपने परिवार के साथ आत्महत्या करने वाले हनुमान ने सुसाइड नोट में अपने भाई को संबोधित करते हुये लिखा कि बेटे अमर का कड़ा और उसके जन्म के बाल हमारे साथ ही गंगा में बहा देना.

Sikar mass suicide case: यह दास्तां एक ऐसे परिवार की है जो अपने बेटे (Son) को खोने के बाद सुधबुध खो बैठा था. बेटे की मौत के बाद सदमे में आए परिवार ने जो व्यथा सुसाइड नोट में व्यक्त की है, वह बेहद मार्मिक है.

  • Share this:

सीकर. राजस्‍थान के शेखावाटी क्षेत्र के सबसे बड़े शहर सीकर में एक परिवार द्वारा फांसी लगाकर सामूहिक आत्महत्या (Mass suicide) करने की घटना ने लोगों झकझोर कर रख दिया है. आत्महत्या करने वाले परिवार को बेटे की मौत ने ऐसा तोड़ा कि उन्होंने जिंदगी से ही मुंह मोड़ लिया. बेटे की मौत से उनकी जीने की इच्छा ही खत्म हो गई थी. पूरे परिवार द्वारा आत्महत्या किये जाने के बाद पुलिस को मिले 'सुसाइड नोट' (Suicide note) ने जब इस घटना की परतें खोलीं तो हर कोई सन्न रहा गया.

सीकर के राधाकिशनपुरा इलाके में रविवार को हनुमान सैनी ने पत्नी तारा देवी और दो बेटियों पूजा और अन्नू के साथ फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली थी. घटना के बाद जिसने भी इसके बारे में सुना वह हक्का-बक्का रह गया. मौके पर पहुंची पुलिस ने जब जांच-पड़ताल की तो घटना की जो वजह सामने आई उसे सुनकर लोगों के आंखों से आंसू बह निकले. पूरे परिवार ने मौत से पहले जिस तरह अपनी भावनाएं सुसाइड नोट पर व्यक्त की वह उनके बेटे से लगाव की पूरी दास्तां थीं.

'जब बेटा ही नहीं रहा तो हम जी कर क्या करेंगे'

हनुमान सैनी ने अपने सुसाइड नोट में लिखा की उनके पुत्र अमर का गत वर्ष 27 सितंबर को देहांत हो गया. बताया जा रहा कि अमर की मौत हार्ट अटैक से हुई थी. बेटे के जुदाई के गम में डूबे हनुमान सैनी ने लिखा कि हमने उसके बैगर जीने की कोशिश की, लेकिन जीया नहीं जाता था, इसलिए हमने मौत को गले लगाने का फैसला किया. अमर ही हमारी जिंदगी था. वह ही नहीं रहा तो हम यहां क्या करेंगे? उन्‍न्‍होंने आगे लिखा कि घर में किसी भी चीज की कमी नहीं है. घर है. खेत है. दुकान है. नौकरी है. बस बेटे की कमी है. उसके बिना यह सब बेकार है. हनुमान ने अपने पत्र में साफ किया कि उन पर किसी तरह का कोई कर्ज नहीं है. इसके साथ ही उन्‍होंने सुसाइड नोट में प्रशासन से आग्रह किया कि परिवार को किसी तरह से परेशान न किया जाये.
'बेटे के जन्म के बाल और कड़े भी गंगा में बहा देना'

हनुमान ने सुसाइड नोट के दूसरे पेज में अपने भाई सुरेश को संबोधित करते हुए लिखा कि उनका अंतिम संस्कार अपने परिवार की तरह ही करना. सभी रीति रिवाजों के साथ. इसके साथ ही उन्‍होंने बेहद मार्मिक बात लिखी. हनुमान ने कहा कि अमर का कड़ा और उसके जन्म के बाल हमारे साथ ही गंगा में बहा देना. यह सब सामान उसकी फोटो के पास रखा है. पुलिस ने शवों का पोस्टमार्टम करवाकर परिजनों को सौंप दिया है.

अगली ख़बर

फोटो

टॉप स्टोरीज