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शांति के लिए माउंट आबू आते थे अटल बिहारी वाजपेयी

शांति के लिए माउंट आबू आते थे अटल बिहारी वाजपेयी

सांकेतिक तस्वीर

सांकेतिक तस्वीर

माउंट आबू से भी वाजपेयी की खास यादें जुड़ी हुई हैं. मनाली और अल्मोड़ा के बाद राजस्थान का माउंट आबू अटल बिहारी का सबसे पसंदीदा पर्यटन स्थल था.

    पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के निधन से देश भर में शोक की लहर है. देश के सभी लोग अटल बिहारी वाजपेयी को श्रद्धांजलि दे रहे हैं. राजस्थान से उनका गहरा नाता रहा है. माउंट आबू से भी वाजपेयी की खास यादें जुड़ी हुई हैं. मनाली और अल्मोड़ा के बाद राजस्थान का माउंट आबू अटल बिहारी का सबसे पसंदीदा पर्यटन स्थल था. पहली बार 11 फरवरी 1989 में ब्रह्माकुमारी संस्थान के मुख्यालय में अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में हिस्सा लेने के लिए वे आये थे, तभी से यह स्थान उनके लिए खास बन गया था. संस्थान की प्रमुख राजयोगिनी दादी जानकी ने लंदन से शोक संदेश भेजकर गहरा दुख प्रकट किया है.

    माउंट आबू में वाजपेयी ने दुनिया भर से आये प्रतिष्ठित व्यक्तियों के बीच में वक्तव्य देते हुए कहा था कि यदि संस्कार और व्यक्ति बनना है तो उसके लिए माउंट आबू आना पड़ेगा. यही नहीं, उन्होंने विज्ञान और आध्यात्म की गहरी विवेचना करते हुए कहा था कि पैसे से दवाई खरीदी जा सकती है, स्वास्थ्य नहीं और सुख सुविधा के साधन जुटाए जा सकते हैं, लेकिन आराम नहीं जुटाया जा सकता.

    वाजपेयी का दूसरी बार माउंट आबू आना 30 अप्रैल 1995 को हुआ था. तब वे लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष थे. इस बार भी उन्होंने ब्रह्माकुमारीज संस्थान के ज्ञान सरोवर एकेडमी के एक कार्यक्रम में हिस्सा लिया था. यहां वाजपेयी ने घर लेने का मन बनाया था, लेकिन बताया जाता है कि वे जिस घर को देखने आये थे वो बहुत छोटा था.

    माउंट आबू और ब्रह्माकुमारीज संस्थान से उनका गहरा लगाव था, इसलिए प्रधानमंत्री रहते हुए उन्‍होंने 'शांति की संस्कृति वर्ष' में ब्रह्माकुमारीज संस्थान को उसके योगदान के लिए दिल्ली में सम्मानित किया था. उनके निधन की खबर सुनकर ब्रह्माकुमारीज संस्थान में भी शोक की लहर है.

    Tags: Rajasthan news, Sirohi news

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