श्रीगंगानगर: इंदिरा गांधी नहर उगल रही है जिंदा बम, 4 दिन में 10 मिल चुके हैं, जानिये क्या है पूरा मामला

स्थानीय पुलिस बम मिलने की घटनाओं को वर्ष 2001 में बिरधवाल स्थित सेना के आयुध डिपो में लगी आग की घटना से जोड़कर देख रही है.

स्थानीय पुलिस बम मिलने की घटनाओं को वर्ष 2001 में बिरधवाल स्थित सेना के आयुध डिपो में लगी आग की घटना से जोड़कर देख रही है.

10 live bombs found in Indira Gandhi Canal: श्रीगंगानगर जिले में गत चार दिनों में 10 जिंदा बम मिल चुके हैं. ये सभी बम सूरतगढ़ इलाके में इंदिरा गांधी नहर परियोजना में मिले हैं. इससे इलाके में दहशत फैली हुई है.

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श्रीगंगानगर. भारत-पाकिस्तान अंतरराष्ट्रीय बॉर्डर पर स्थित श्रीगंगानगर जिले में गुजरने वाली एशिया की सबसे बड़ी नहर परियोजना इंदिरा गांधी नहर (Indira Gandhi Canal) लगातार जिंदा बम उगल रही है. नहर में जिले के सूरतगढ़ इलाके में सेना के बम (Bomb) मिलने का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है. आज फिर इस इलाके में इंदिरा गांधी नहर की कंवरसेन लिफ्ट कैनाल में 1 और बिरधवाल क्षेत्र में 2 बम मिलने से ग्रामीणों में सनसनी फैल गई.

इंदिरा गांधी नहर में सेना के बम मिलने की सूचना के बाद स्थानीय राजियासर पुलिस ने बमों को अपनी निगरानी में लेते सेना को सूचित कर दिया है. पिछले 4 दिनों के भीतर सूरतगढ़ क्षेत्र में इंदिरा गांधी नहर परियोजना में 10 बम मिल चुके हैं. इनमें से दो बम को सेना की बम डिफ्यूजल टीम ने डिफ्यूज कर दिया है. शेष आठ बमों की जांच होनी बाकी है. अभी इनका पता नहीं चल पाया है कि ये चले हुये हैं या जिंदा हैं.

इलाके में दहशत का माहौल

लगातार बम मिलने की घटनाओं से जहां इलाके में दहशत का माहौल है वहीं इन घटनाओं ने पुलिस और खुफिया एजेंसियों की नींद उड़ा दी है. स्थानीय पुलिस बम मिलने की घटनाओं को वर्ष 2001 में बिरधवाल स्थित सेना के आयुध डिपो में लगी आग की घटना से जोड़कर देख रही है. उसका कहना है कि आग के बाद धमाकों के साथ बम आस पास के इलाकों में जा गिरे थे. वे अब रह-रहकर सामने आ रहे हैं.
इन दिनों नहरबंदी चल रही है

गौरतलब है कि इंदिरा गांधी नहर परियोजना में इन दिनों नहरबंदी चल रही है. इसकी वजह से इंदिरा गांधी नहर में पानी लगभग सूख चुका है. इसके कारण नहर में गिरे बम अब सामने आ रहे हैं. लगातार बम मिलने की घटनाओं के बाद स्थानीय पुलिस-प्रशासन ने सेना को इन बमों के निस्तारण के लिए पत्र लिखा है. क्योंकि सेना ने अभी तक मिले 10 में से 2 बमों को ही डिफ्यूज किया गया है. शेष 8 के लिए पुलिस सेना के दस्ते के आने का इंतजार कर रही है.

इतने बम अचानक क्यों सामने आ रहे हैं ?



बड़ा सवाल यह है कि इस बार की नहरबंदी के दौरान बम मिलने की इतनी घटनायें अचानक क्यों सामने आ रही हैं ? जबकि वर्ष 2001 के बाद कई बार नहरबन्दी हो चुकी है. दूसरी तरफ पुलिस के लिए ये बम सिरदर्द बने हुये हैं. समस्या यह है कि नफरी की कमी झेल रहे पुलिस महकमे में कार्मिकों से लॉकडाउन की पालना करवाई जाए या इन बमों की निगरानी में तैनात किया जाये.

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