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Tonk News: मालपुरा में बहुसंख्यकों ने घर के बाहर लगाए 'पलायन के लिए मजबूर' होने के पोस्टर

Tonk News: मालपुरा में बहुसंख्यकों ने घर के बाहर लगाए 'पलायन के लिए मजबूर' होने के पोस्टर

टोंक जिले का मालपुरा कस्बा यह वो जगह है जिसने आजादी के बाद से कई साम्प्रदायिक झगड़े देखे हैं.

टोंक जिले का मालपुरा कस्बा यह वो जगह है जिसने आजादी के बाद से कई साम्प्रदायिक झगड़े देखे हैं.

Malpura News: टोंक जिले का मालपुरा कस्बा एक बार फिर से सुर्खियों में आ गया है. राजस्थान के सर्वाधिक संवेदनशील इलाकों में शुमार इस कस्बे के दो वार्डों के बहुसंख्यक समाज के लोगों ने असुरक्षा का अंदेशा जताते हुये अपने घरों के बाहर पलायन के पोस्टर चस्पा कर दिए हैं.

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    दौलत पारीक.

    टोंक. 1992 में हुए सांप्रदायिक दंगों के बाद से ही अत्यंत संवेदनशील (Very sensitive) माने जाने वाले टोंक जिले के मालपुरा कस्बे (Malpura town) में अल्पसंख्यक बहुल इलाकों से अपनी संपत्ति बेचकर अन्य आवासीय कॉलोनियों में बस चुके बहुसंख्यक परिवारों के बाद अब एक बार फिर यहां इसी तरह का दृष्य नजर आने लगा है. यहां वार्ड 12 और 21 के बहुसंख्यक परिवारों ने सोमवार और मंगलवार को अचानक अपने अपने घरों के बाहर पोस्टर टांग कर अपने आपको अल्पसंख्यक परिवारों से अपने आपको खतरा बताया है. इन परिवारों नें अपने आपको पलायन के लिये मजबूर होना बताते हुए पीएम व सीएम से अपनी सुरक्षा की मांग की है.

    अल्पसंख्यक बहुल इलाकों से सटे इन दोनों वार्डों के महिला, पुरुषों और बच्चों ने मंगलवार को कस्बे में रैली निकाल एसडीएम मालपुरा को इस बारे में ज्ञापन सौंपा. इस रैली के बाद उपखंड प्रशासन भी हरकत में नजर आया और उसने इसे शहर का सांप्रदायिक सौहार्द्र बिगाड़ने वाली करतूत बताते हुए बहुसंख्यक समुदाय के लोगों को अपने अपने घरों से इस तरह के पोस्टर हटाये की चेतावनी दी है. हालांकि इस ज्ञापन के तुरंत बाद पुलिसकर्मी इन दोनों वार्डों में पहुंचे और चिपकाए गए पोस्टरों को हटाए जाने की कोशिश की लेकिन लोगों के विरोध के चलते उन्हें बैरंग लौटना पड़ा.

    मालपुरा ने देखे हैं कई साम्प्रदायिक झगड़े 

    टोंक जिले का मालपुरा कस्बा यह वो जगह है जिसने आजादी के बाद से कई साम्प्रदायिक झगड़े देखे हैं. इनमें अलग-अलग समय में एक के बाद एक अब तक 50 से ज्यादा लोगों की जान जा चुकी है. कई परिवार पलायन कर शहर के बाहर जा चुके हैं. अब एक बार फिर से यह कस्बा सुर्खियों में है. क्योंकि यहां रहने वाले जैन समाज के साथ हिंदू समाज के 200 से ज्यादा परिवार पिछले कुछ दिनों से लगातार प्रशासनिक और पुलिस अधिकारियों से सुरक्षा की गुहार लगा रहे हैं.

    कस्बे के इतिहास पर एक नजर
    – यहां 1952 में पहली बार साम्प्रदायिक झगड़ा हुआ जिसमें दो लोगों की मौत हुई. कई लोग घायल हुए. कई परिवार बेघर हुए.
    – वर्ष 1992 में फिर साम्प्रदायिक झगड़ा हुआ. इसमें दोनों ही समुदाय के 25 लोगों की मौत हुई.
    – इस झगड़े ने नसंहार का रूप लिया था. इसके कारण कई महीनों तक कर्फ्यू के हालात रहे.
    – वर्ष 2000 में भी ऐसे ही एक झगड़े में 13 लोगों की जान चली गई.
    – यहां वर्ष 2016 में आईएसआईएस और पाकिस्तान के समर्थन नारेबाजी हुई. 36 लोगों के खिलाफ नामजद मामला दर्ज किया गया.
    – इसमें मामले में 21 लोगों की गिरफ्तारियां हुई और 15 लोग आज भी पुलिस की पकड़ से बाहर हैं.
    – वर्ष 2018 में कावड़ियों की यात्रा पर घात लगाकर हमला किया गया. दो दर्जन से ज्यादा कावड़िये गंभीर रूप से घायल हुए.
    – इस मामले में पुलिस हमलावरों की ठीक से पहचान तक नहीं कर पाई. राजनैतिक दबाव के चलते कोई सख्त कार्रवाई नहीं हुई.
    – वर्ष 2019 में दहशरा की यात्रा पर पथराव किया गया.

    Tags: Minority community, Rajasthan latest news, Rajasthan News Update, Tonk news

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