पिंक सिटी में श्रीकृष्ण के मुकुट जैसे 'पैलेस ऑफ विंड्स' को दुनियाभर से देखने आते हैं पर्यटक, जानिए क्या है इसकी खासियत

जयपुर के श्रीकृष्ण के मुकुट जैसे 'पैलेस ऑफ विंड्स' का एक एरियल व्यू.

जयपुर के श्रीकृष्ण के मुकुट जैसे 'पैलेस ऑफ विंड्स' का एक एरियल व्यू.

गुलाबी नगरी जयपुर (Jaipur) में बड़ी चौपड़ पर स्थित हवा महल राजपूतों की शाही विरासत, वास्तकुला, पारम्परिक प्रथा, संस्कृति और भक्ति के अद्भुत मिश्रण है. जिसको देखने के लिए दुनियाभर से लोग आते है. इस महल की क्या खासियत हैं इसके बारे में हम आज जानेंगे.

  • News18Hindi
  • Last Updated: April 25, 2021, 2:39 PM IST
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जयपुर. गुलाबी नगरी (Pink City) में बड़ी चौपड़ पर स्थित हवा महल राजपूतों की शाही विरासत, वास्तकुला, पारम्परिक प्रथा, संस्कृति और भक्ति के अद्भुत मिश्रण का नायाब प्रतीक है. बड़ी ही खूबसूरती के साथ बनाया गया हवा महल जयपुर (Jaipur) के प्रसिद्ध पर्यटक आकर्षणों में से एक है. तत्कालीन महाराजा भगवान श्रीकृष्ण के परम भक्त थे, इसलिए हवा महल कृष्ण के मुकुट जैसी आकृति का बना. पर्दाप्रथा के बीच राजपूती महिलाएं उत्सवों को देख सकें, इसलिए सैंकड़ों झरोखे और खिड़कियों वाला महल बनवाया.

इस हवा महल को 'पैलेस ऑफ विंड्स' भी कहा जाता है. हवा महल की खास बात यह है कि यह दुनिया में किसी भी नींव के बिना बनी सबसे ऊंची इमारत है. इस पांच मंजिला इमारत में 953 झरोखे हैं, जो मधुमक्खियों के छत्ते से मिलते-जुलते हैं. जयपुर के सिटी पैलेस के किनारे लाल और गुलाबी बलुआ पत्थरों से बना हवा महल आकर्षक विरासत है.

क्या है हवा महल का इतिहास

पिंकसिटी के हवा महल का निर्माण सवाई प्रताप सिंह ने सन् 1799 में कराया था. वे महाराजा सवाई जय सिंह के पोते थे. प्रताप सिंह झुंझनू में महाराजा भूपाल सिंह द्वारा निर्मित खेतड़ी महल से इतने प्रभावित हुए कि कमोबेश उसी की तर्ज पर उन्होंने हवा महल का निर्माण कराया. हवा महल सिटी पैलेस के विस्तार के रूप में बनाया गया था. हवा महल का अर्थ है हवा का महल. इस महल में सैंकड़ों छोटे-छोटे झरोखे और खिड़कियां हैं. इन खिड़कियों को महल में ताजी हवा के प्रवेश के लिए बनाया गया था.


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गर्मी के दिनों में राहत पाने के लिए हवा महल राजपूतों का खास ठिकाना था, क्योंकि झरोखों में से आने वाली ठंडी हवा पूरी इमारत को ठंडा रखती थी. उस वक्त महिलाएं पर्दा प्रथा का पालन करती थीं और दैनिक कार्यक्रमों की एक झलक पाने के लिए सार्वजनिक रूप से सामने आने से बचती थीं. जालीदार खिड़कियों और पर्दे वाली बालकनी से सजे इस खूबसूरत हवा महल के निर्माण के पीछे एक भावना यह भी थी कि शाही राजपूत महिलाएं झरोखों में से सड़क पर हो रहे उत्सवों को आसानी से देख सकें.



आइये पांच पॉइंट में हवा महल के बारे में जानते हैं वो सब कुछ जिसके बारे में आप जानना चाहते हैं.

1.वास्तकुला : मुगल और राजपूत शैली खूबसूरत संगम

पांच मंजिला पिरामिडनुमा महल के वास्तुकार लाल चंद उस्ताद थे. हवा महल मुगल और राजपूत शैली खूबसूरत संगम है, जो अपनेआप में अनूठा है. इमारत का डिजाइन इस्लामिक मुगल वास्तुकला के साथ हिंदू राजपूत वास्तुकला कला के उत्कृष्ठ मिश्रण को दर्शाता है. महाराज सवाई प्रताप सिंह कृष्ण के बड़े भक्त थे. उनकी भक्ति महल के ढांचे के डिजाइन में भी परिलक्षित होती है, जो एकदम भगवान कृष्ण के मुकुट के समान दिखता है. महल में कुछ नक्काशीदार झरोखे तो लकड़ी से बने हैं. इन झरोखों का निर्माण कुछ इस तरह किया गया था कि गर्मियों में ताजी हवा के माध्यम से पूरी इमारत ठंडी रहे.

2.हवा महल की हर मंजिल की कहानी

पहली मंजिल पर शरद मंदिर है, जिसे तब उत्सवों के लिए प्रयोग किया जाता था. यहां होली और अन्य सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजित होते थे. दूसरी मंजिल का नाम रतन मंदिर है, जहां पर रंगीन शीशे से दीवारों को सजाया गया है. लाल, हरा, पीला और गुलाबी आदि रंगों से जब सूर्य का प्रकाश परिवर्तित होकर आता है तो एक अद्भुत-सी रंगीन छवि दिखाई देती है. इमारत की तीसरी मंजिल पर है विचित्र मंदिर. यह वह स्थान है जहां रियासतकाल में सभी को जाने की इजाजत नहीं थी.

महाराजा सवाई प्रताप सिंह जी यहां अपने आराध्य भगवान श्रीकृष्ण की आराधना किया करते थे. चौथी मंजिल को प्रकाश मंदिर कहा जाता है. प्रकाश मतलब रोशनी. शायद इसीलिए इसको प्रकाश मंदिर बोला जाता है. पांचवी मंजिल हवा मंदिर के नाम से जाना जाता है. यह इमारत की सबसे ऊंची चोटी है. इसी मंजिल के नाम पर हवा महल नाम पड़ा.

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3. महल में नक्काशी और शिल्पकला नायाब

हवा महल की दीवारों पर बने फूल पत्तियों का काम राजपूत शिल्पकला का नायाब उदाहरण है. साथ ही पत्थरों पर की गई मुगल शैली की नक्काशी मुगल शिल्प का बेजोड़ नमूना है. दूसरी मंजिल को ग्लासवर्क से सजाया गया है. हवा महल के पहले दो मंजिल में आंगन हैं. पांचवीं मंजिल से आपको गुलाबी शहर के विभिन्न रंग देखने को मिलेंगे. हवा महल का कोई सामने से दरवाजा नहीं है, बल्कि सिटी पैलेस की ओर से एक शाही दरवाजा हवा महल के प्रवेश द्वार की ओर जाता है.

4. निर्माण सामग्री आश्चर्यचकित कर देने वाली

हवा महल बनाने में लगी निर्माण सामग्री भी आश्चर्यचकित कर देने वाली है. बताते हैं कि गुड़, मेथी और जूट से बनी हवामहल की दीवारें बनाने में चूने को पीसकर इसकी लुगदी में बजरी, सुर्खी और गुड़ डाला जाता था. इसके बाद हल्की छिली हुई जूट और मेथी पीसकर पाउडर के रूप में डाला जाता था और इस मसाले से झरोखे, खिड़की बनाई गई. निर्माण सामग्री में अलग-अलग स्थानों पर शंख, नारियल, गोंद और अण्डे का ऊपरी भाग का भी उपयोग हुआ.



5. महल के संग्रहालय, अब शूटिंग पॉइंट बने हैं


हवा महल में प्रवेश सिटी पैलेस से होकर एक शाही दरवाजे के माध्यम से किया जाता है. यह दरवाजा एक विशाल आंगन में खुलता हैं, जिसके तीनों ओर एक दो मंजिला इमारत है, और जो हवा महल के पूर्वी भाग से जुड़ी हुई है. महल के आंगन में एक पुरातत्व संग्रहालय भी है. वर्तमान समय में हवा महल देश-विदेश से आए पयर्टकों के लिए शानदार दर्शनीय स्थलों में से एक है. महल अब कई भारतीय और अंतरराष्ट्रीय फिल्मों की शूटिंग के लिए भी एक बढिया शूटिंग पॉइंट बन गया है.
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