Udaipur: लेकसिटी में दिवाली पर बनाये जा रहे हैं 3 करोड़ दीये, 3 महीने से 70 परिवार जुटे हैं

महंगाई के इस दौर में दीये की लागत बढ़ी है, लेकिन बाजार में इसकी कीमत कम हुई है.
महंगाई के इस दौर में दीये की लागत बढ़ी है, लेकिन बाजार में इसकी कीमत कम हुई है.

उदयपुर में दिवाली (Diwali) के मद्देनजर मिट्टी के दीये (Clay lamp) बनाने का काम जोरों पर है. यहां 70 परिवार गत करीब 3 महीनों से दीये बनाने में जुटे हैं.

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उदयपुर. पिछले कुछ वर्षो में भले ही दिवाली (Diwali) पर चाइनीज दीपक की मांग बढ़ी हो लेकिन मिट्टी के दीपक आज भी रोशनी फैलाने के लिये घरों में ले जाये जाते हैं. मिट्टी के दीपक (Clay lamp) बनाने के लिये इससे जुड़े कारीगर खासा मेहनत करते हैं. उदयपुर में दिवाली से करीब तीन महीने पहले से ही इन्हें तैयार करने का काम शुरू हो जाता है. इन्हें तैयार करने के लिये दीयों के कारीगर दिन-रात अपने पूरे परिवार के साथ जुटे रहते हैं.

उदयपुर में करीब सात दशक पहले 6 परिवारों ने मिट्टी के दीपक बनाने का कार्य शुरू किया था. धीरे धीरे इनका कुनबा बढ़ता गया और आज 70 परिवार दीये बनाने के कार्य में जुटे हैं. कुम्हारों का भट्टा क्षेत्र में दीवाली पर यहां करीब तीन करोड़ दीपक बनाये जाते हैं. दीपक बनाने में खासी मेहनत रहती है. इसके लिये अलग-अलग इलाकों से तालाब की मिट‌्टी मंगवाई जाती है. उसमें कड़ी मेहनत कर पत्थरों को हटाया जाता है. दीये बनाने वाले कारीगर पूरी मेहनत के साथ उसे फावड़े और हाथों से पानी के साथ मिलाते हैं. फिर करीब 15 मिनट तक आटे की तरह गुंथते हैं. उसके बाद मिट्टी को दीये का रूप दिया जाता है. इन्हें सूखाने के बाद उन पर कलर करके रंगीन बनाया जाता है. फिर उन्हें बाजार में बिकने को भेजा जाता है.

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अब युवा पीढ़ी भी जुड़ने लगी है इस काम से


करीब सात पीढ़ियों से चले आ रहे इस व्यापार में अब युवा पीढ़ी भी जुड़ने लगी है. महंगाई के इस दौर में दीये की लागत बढ़ी है, लेकिन बाजार में उसकी कीमत कम हुई है. इससे करीगरों के मुनाफे में कमी हुई है. लेकिन इस बार इन कारीगरों को उम्मीद है कि चाइना के प्रति देश में बने माहौल के चलते इस बार मिट्टी के दीयों का बाजार अच्छा रहेगा.

कीमत महज 600 रुपये प्रति हजार है
कारीगरों के मुताबिक पहले दो हजार रुपये में मिट्टी का ट्रैक्टर मिलता था. लेकिन अब उसकी रेट बढ़कर करीब पांच हजार तक पहुंच गई है. दूसरी और कोरोना काल के चलते इस बार दीपक की रेट गत वर्षों के मुकाबल और भी कम हो गई है. पिछली बार 800 रुपये के हजार दीये बेचे जा रहे थे. इस बार इनकी कीमत महज 600 रुपये प्रति हजार ही रह गई है. दीये की दर कम होना और लागत बढ़ना इससे जुड़े कारिगरों के लिये आर्थिक संकट पैदा कर रहा है.
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