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उदयपुर: खान विभाग के अधीक्षण अभियंता के पास मिली 125 करोड़ की काली कमाई, गिरफ्तार

एसीबी ने सर्च अभियान पूरा होने के बाद दीवान सिंह देवड़ा को करीब 5 महीने पूर्व रिश्वत मांगने के उस केस में गिरफ्तार भी कर लिया, जिसमें वह ट्रेप होने से बच गया था.

एसीबी ने सर्च अभियान पूरा होने के बाद दीवान सिंह देवड़ा को करीब 5 महीने पूर्व रिश्वत मांगने के उस केस में गिरफ्तार भी कर लिया, जिसमें वह ट्रेप होने से बच गया था.

एसीबी ने तलाशी अभियान पूरा होने के बाद दीवान सिंह देवड़ा को लगभग पांच महीने पूर्व रिश्वत मांगने के उस केस में गिरफ्तार भी कर लिया, जिसमें वो ट्रैप होने से बच गया था. शनिवार को एसीबी देवड़ा को जयपुर में न्यायालय (Court) में पेश करेगी.

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उदयपुर. राजस्थान (Rajasthan) के उदयपुर (Udaipur) में खान विभाग (Mines Department) के एक अधिकारी के भ्रष्टाचार (Corruption) का पर्दाफाश हुआ है. भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) की इंटेलीजेंस शाखा की आठ टीमों ने यहां पदस्थापित अधीक्षण अभियंता और तकनीकी सहायक निदेशक दीवान सिंह देवड़ा (Deewan Singh Deora) के घर और कार्यालय सहित अन्य ठिकानों पर छापेमारी (Raid) की. एसीबी की तलाशी अभियान में दीवान सिंह के पास 125 करोड़ से ज्यादा की संपत्ति का पता चला है. जिसके बाद एसीबी ने रिश्वत (Bribe) मांगने के आरोप में देवड़ा को गिरफ्तार (Arrested) कर लिया है. शनिवार को एसीबी दीवान सिंह देवड़ा को जयपुर में न्यायालय (Court) में पेश करेगी.

आठ टीमों ने विभिन्न ठिकानों पर की छापामारी
एसीबी अधिकारियों के अनुसार आठ टीमों ने आय से अधिक संपत्ति के मामले में देवड़ा, उनके पिता किशोर सिंह देवड़ा और व्यावसायिक पार्टनर करण सिंह तथा अवधेश सिंह के उदयपुर, सीकर, सिरोही और जयपुर स्थित अन्य ठिकानों पर छापा मारा गया था. सर्च में दीवान सिंह से संबंधित करीब 125 करोड़ से अधिक संपत्ति का खुलासा हुआ है. इनमें विभिन्न मूल्यवान सामग्री और अन्य संपत्ति संबंधी दस्तावेज बरामद हुए हैं. उन्हें जब्त कर लिया गया है.

पांच माह पुराने मामले में किया गिरफ्तार
एसीबी ने तलाशी अभियान पूरा होने के बाद दीवान सिंह देवड़ा को लगभग पांच महीने पूर्व रिश्वत मांगने के उस केस में गिरफ्तार भी कर लिया, जिसमें वो ट्रैप होने से बच गया था. एसीबी के वेरिफिकेशन के दौरान दीवान सिंह ने परिवादी से एक लाख रुपए रिश्वत ली थी. उसके बाद तीन लाख रुपए की रिश्वत और मांगी थी. इसके अलावा माइंस चलाने देने की एवज में हर महीने ढाई लाख रुपए की मांग की थी. वेरीफिकेशन में इन सभी तथ्यों की पुष्टि हुई है. लेकिन उस दौरान वो एपीओ होने से रिश्वत लेते रंगे हाथों गिरफ्तार होने से बच गया था.

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