Udaipur: CBI कोर्ट का आदेश, होटल लक्ष्मी विलास सरकारी संपत्ति, कलक्टर ने लिया कब्जे में

सीबीआई ने जब इस होटल की जमीन का आकलन किया गया तो इसकी कीमत 151 करोड़ रुपए से भी ज्यादा पाई गई थी.
सीबीआई ने जब इस होटल की जमीन का आकलन किया गया तो इसकी कीमत 151 करोड़ रुपए से भी ज्यादा पाई गई थी.

उदयपुर के होटल लक्ष्मी विलास (Hotel Laxmi Vilas) को लेकर सीबीआई कोर्ट (CBI Court) की ओर से दिये गये आदेश के बाद जिला कलक्टर ने इसका कब्जा ले लिया है. कोर्ट ने इसे सरकारी संपत्ति (Government property) माना है.

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उदयपुर. लेकसिटी उदयपुर में स्थित द ललित ग्रुप के होटल लक्ष्मी विलास (Hotel Laxmi Vilas) को सीबीआई कोर्ट ने सरकारी संपत्ति (Government property) मानते हुए वर्ष 2002 में हुए विनिवेश को रद्द कर दिया है. होटल को लेकर दिये गये सीबीआई कोर्ट (CBI Court) के आदेश के बाद जिला कलक्टर चेतन देवड़ा ने होटल के सभी दस्तावेजों को अपने कब्जे में लिया है और होटल प्रबंधन को बैंक ट्रांजेक्शन सहित अन्य किसी भी व्यवसाय गतिविधि में छेड़छाड़ नहीं करने के स्पष्ट निर्देश दिए हैं. कोर्ट ने होटल को कब्जे में लेने की पूरी कार्रवाई कर तीन दिन के भीतर इसकी रिपोर्ट पेश करने के निर्देश दिये हैं.

सरकार ने मात्र 7 करोड़ 52 लाख रुपये में दे दिया था
जानकारी के अनुसार वर्ष 2002 में उदयपुर की इस बेशकीमती संपत्ति लक्ष्मी विलास होटल को तत्कालीन केन्द्र सरकार ने द ललित ग्रुप ऑफ होटल्स को मात्र 7 करोड़ 52 लाख रुपये में दे दिया था. फतेहसागर झील किनारे बनी इस बेशकीमती होटल को बेचने का उदयपुर में काफी विरोध दर्ज कराया गया था. द ललित ग्रुप के इस विनिवेश को गलत मानते हुए उस समय से ही इसे रद्द करने की मांग उठने लगी थी. उसके बाद इसकी सीबीआई जांच के आदेश हुए थे. सीबीआई ने इस होटल की जमीन का आकलन किया गया तो इसकी कीमत 151 करोड़ रुपए से भी ज्यादा पाई गई. यही नहीं विनिवेश से पहले सरकार ने ढ़ाई करोड़ रुपए की लागत से होटल के रिनोवेशन में भी खर्च कर दिया था.

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निर्माण एरिया और खाली पड़ी जगह का भी आकलन किया जा रहा है


सीबीआई कोर्ट का आदेश जिला कलक्टर को दो दिन पहले बुधवार को मिला था. उसके बाद जिला कलक्टर और सभी आला अधिकारी उसी समय होटल पहुंचे और उसे अपने कब्जे में लेने की कार्रवाई शुरू करवाई. कलक्टर ने संपूर्ण संपत्ति अपने अधिग्रहण में ले ली है. अधिकारी होटल की भौगोलिक स्वरूप की विस्तृत जानकारी बनाकर कोर्ट के सुपुर्द करेंगे. होटल में निर्माण एरिया और खाली पड़ी जगह का भी आकलन किया जा रहा है.

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आज सौंपी जायेगी अंतरिम रिपोर्ट
बताया जा रहा है कि चूंकि संपत्ति काफी बड़ी है. लिहाजा उसका पूरा विवरण बनाने में समय लग सकता है. इसलिये प्रशासन एक बार कोर्ट में इसकी अंतरिम रिपोर्ट सौंपकर विस्तृत रिपोर्ट के लिये समय मांग सकता है. कोर्ट के इस आदेश के बाद अब लोगों को यह संभावना भी लग रही है कि और भी कई संपत्तियां जो बहुत कम दामों में निजी हाथों को सौंप दी गई थी उन पर भी अब सख्त कार्रवाई की जा सकती है.
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