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Corona effect: उदयपुर में आज प्रतीकात्मक रूप से भी मंदिर से बाहर नहीं आएंगे भगवान जगन्नाथ ! यह है वजह

प्रशासन ने पहले परंपरा के अनुसार प्रतीकात्मक रथयात्रा की अनुमति दी थी, . (सांकेतिक तस्वीर)

प्रशासन ने पहले परंपरा के अनुसार प्रतीकात्मक रथयात्रा की अनुमति दी थी, . (सांकेतिक तस्वीर)

आषाढ़ शुक्ल द्वितीया के दिन भगवान जगन्नाथ (Lord Jagannath) नगर भ्रमण पर निकलते हैं. इस दिन भक्त भगवान का मंदिर के बाहर इंतजार करते हैं. आज आषाढ शुक्ल द्वितीया है और भक्तों को पूरे वर्ष से इस दिन का इंतजार था कि भगवान उन्हें दर्शन देने के लिये मंदिर से बाहर आयेंगे या नहीं इस पर अभी संशय बना हुआ है.

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उदयपुर. आषाढ़ शुक्ल द्वितीया के दिन भगवान जगन्नाथ (Lord Jagannath) नगर भ्रमण पर निकलते हैं. इस दिन भक्त भगवान का मंदिर के बाहर इंतजार करते हैं. आज आषाढ शुक्ल द्वितीया है और भक्तों को पूरे वर्ष से इस दिन का इंतजार था कि भगवान उन्हें दर्शन देने के लिये मंदिर से बाहर आयेंगे, लेकिन ऐसा होने पर भी अभी संशय बना हुआ है. कोरोना महामारी (COVID-19) के चलते सार्वजनिक रथयात्रा की बजाय प्रतीकात्मक रूप से निकाली जाने वाली रथयात्रा की अनुमति को भी प्रशासन रद्द कर दिया है. हालांकि मंगलवार को  दोपहर में पुजारी परिवार और पुलिस प्रशासन के बीच वार्ता चल रही है. इसमें केवल 10 लोगों की मौजूदगी में प्रतीकात्मक रथयात्रा निकालने की बात पर सहमति बनाने के प्रयास किए जा रहे हैं.

रथयात्रा में हजारों लोग शामिल होते हैं
राजस्थान में झीलों की नगरी उदयपुर में भगवान जगन्नाथ का सबसे बड़ा मंदिर है. उदयपुर के जगदीश मंदिर से निकलने वाली रथयात्रा प्रदेश की सबसे बड़ी रथयात्रा होती है. इसमें हजारों लोग शामिल होते हैं. इस बार भगवान जगन्नाथ की नगर भ्रमण की 23 वर्ष पुरानी परंपरा टूटने जा रही है. कोरोना संक्रमण के डर से प्रशासन ने नगर भ्रमण का कार्यक्रम तो पहले ही निरस्त करने के निर्देश दे दिये थे, लेकिन अब पारंपरिक रथयात्रा को भी रद्द कर दिया गया है.

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प्रशासन ने पहले अनुमति दी, फिर इसलिए रद्द की
दरअसल उदयपुर में 23 वर्ष पुर्व भगवान जगन्नाथ की रथयात्रा मंदिर प्रांगण में ही परिक्रमा के लिए निकाली जाती थी. उसके बाद नगर भ्रमण का कार्यक्रम शरू हुआ. इस बार कोरोना के चलते नगर भ्रमण की यात्रा को कैंसिल कर प्रतीकात्मक रूप से यात्रा निकालने की योजना बनाई गई थी. रथयात्रा समिति ने प्रतीकात्मक रथयात्रा के लिये तैयारियां भी की थी. इसमें बारी-बारी से श्रद्धालुओं को दर्शन कराने की व्यवस्था की गई थी. प्रशासन ने पहले परंपरा के अनुसार प्रतीकात्मक रथयात्रा की अनुमति दी थी, लेकिन उसमें भी ज्यादा लोगों की संख्या जुटने की संभावना के चलते अब उसे भी निरस्त कर दिया गया है.

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शाम 7 बजे भगवान जगन्नाथ की मंदिर में ही महाआरती होगी
भगवान जगन्नाथ की रथयात्रा निरस्त होने से भक्तों में काफी निराशा है. कोरोना संक्रमण के बीच भक्त अब अपने घरों की खिड़कियों से ही भगवान की महाआरती में शरीक होंगे. अब प्रशासन के आदेश के बाद शाम 7 बजे भगवान जगन्नाथ की मंदिर में ही महाआरती आयोजित होगी. भक्त अपने घरों की खिड़कियों से ही उसमें भावनात्मक रूप से उपस्थिति दर्ज करा पायेंगे.

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