COVID-19: उदयपुर में क्वॉरेंटाइन किए गए श्रमिक बने 'Corona Warrior', बना रहे हैं मास्क

उपखंड अधिकारी शैलेश सुराणा ने नवाचार की योजना बनाई.

उपखंड अधिकारी शैलेश सुराणा ने नवाचार की योजना बनाई.

कोरोना (COVID-19) वायरस के संक्रमण से बचाव के लिए उदयपुर जिले में विभिन्न सरकारी और निजी संस्थाओं में स्थापित किए गए क्वॉरेंटाइन सेंटर (Quartine Center) में क्वॉरेंटाइन किए गए श्रमिक भी अब 'कोरोना योद्धा' बन रहे हैं.

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उदयपुर. कोरोना (COVID-19) वायरस के संक्रमण से बचाव के लिए उदयपुर जिले में विभिन्न सरकारी और निजी संस्थाओं में स्थापित किए गए क्वॉरेंटाइन सेंटर (Quartine Center) में क्वॉरेंटाइन किए गए श्रमिक भी अब 'कोरोना योद्धा' बन रहे हैं. उदयपुर (Udaipur) में क्वॉरेंटाइन  सेंटर रह रहे प्रवासी श्रमिकों से अब योग कक्षाओं के साथ ही शहर की जनता के लिये मास्क तैयार करवाने जैसा नवाचार भी कराया जा रहा है. प्रशासन के इस अनूठे प्रयोग से शहर में मास्क की कमी की आपूर्ति करने में मदद मिल सकेगी.

उपखंड अधिकारी ने बनाई नवाचार की योजना

क्वॉरेंटाइन  सेंटर्स में रुके हुए प्रवासी श्रमिकों को पिछले कुछ दिनों से लगातार पारिवारिक माहौल देने की कोशिश जा रही थी. लेकिन बिना कामकाज के ये श्रमिक बंधक जैसा महसूस करने लगे थे. इन हालात को देखते हुए वल्लभनगर उपखण्ड क्षेत्र में स्थित सिंघानिया विश्वविद्यालय के भवन में स्थापित किए गए क्वॉरेंटाइन  सेंटर में उपखण्ड अधिकारी शैलेश सुराणा ने प्रवासी श्रमिकों से उनके पेशे के बारे में जानकारी ली. इस पर सामने आया कि उनमें से करीब 30 से 40 श्रमिक टेलरिंग व्यवसाय से जुड़े हुए हैं. इस पर उपखंड अधिकारी ने नवाचार की योजना बनाई.

टेलरिंग से जुड़े श्रमिकों को चिन्हित किया
उन्होंने टेलरिंग से जुड़े श्रमिकों को चिन्हित कर उनके लिए पांच सिलाई मशीनों और सूती कपड़े की व्यवस्था की. उसके बाद उनसे मास्क बनाने का काम शुरू करवा दिया. अब इनमें से 12 श्रमिकों ने मास्क बनाने का कार्य प्रारंभ कर दिया गया है. यहां बड़ी संख्या में मास्क तैयार किए लिए गए हैं. सुराणा ने बताया कि इसी प्रकार अन्य श्रमिकों को भी उनकी रूचि के अनुसार कार्यों में संलग्न करने के प्रयास किए जा रहे हैं ताकि वे लोग सृजनात्मक गतिविधियों से जुड़े रहें.

प्रवासी श्रमिकों की बढ़ने लगी रूचि

उपखंड अधिकारी द्वारा किए गए इस नवाचार से क्वॉरेंटाइन सेंटर में रुके श्रमिक अब कोरोना योद्धा की भूमिका में आ गए हैं. वे लगातार मास्क बनाने में जुटे हुए हैं. उल्लेखनीय है कि लॉकडाउन के बाद विभिन्न राज्यों से अपने घर जाने के लिए निकले इन श्रमिकों को सरकार के आदेश में बाद आगे नहीं जाने दिया गया था. ये जिस शहर में थे उन्हें वहीं क्वॉरेंटाइन करके रख दिया गया. इन सेंटर्स में श्रमिकों के लिए सुबह-शाम योग की कक्षाएं लगाई जाती है ताकि रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने में मदद मिल सके.



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