Udaipur: कोरोना काल में बंद हुआ कारोबार तो 4 दोस्तों ने शुरू की बिना मिट्टी के खेती, जानें कैसे

हाइड्रोपोनिक खेती में बीज बोने से लेकर बढ़ने तक की एक अलग प्रक्रिया होती है.

Hydroponic farming: कोरोना काल में व्यवसाय बंद होने के बाद उदयपुर के चार दोस्तों ने मिलकर खेती में नवाचार (Innovation) करते हुये बिना मिट्टी के खेती (Farming without soil) करना शुरू कर एक उदाहरण पेश किया है.

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उदयपुर. कोरोना संक्रमण (COVID-19) के दौर में लगे लॉकडाउन ने कई व्यवसायों (Business)को ठप कर दिया है. अपने व्यापार में कामयाब रहे कई कारोबारी काम बंद होने से परेशान रहने लगे हैं. ऐसे में कई लोगों ने खेती (Agriculture) की तरफ रुख किया है. खेती पर लॉकडाउन का असर कम रहा है. उदयपुर में भी ट्यूरिज्म व्यवसाय से जुड़े चार दोस्तों ने काम बंद होने के बाद खेती का रुख किया. अपनी मेहनत के बल पर वे आज सफलता के दरवाजे पर खड़े हैं.

कोरोना काल में ट्यूरिज्म व्यवसाय ठप होने के बाद उदयपुर के चार दोस्तों दिव्य जैन, भूपेन्द्र जैन, रौनक और विक्रम ने खेती में नई तकनीक के साथ भाग्य आजमाया है. यह नई तकनीक है बिना मिट्टी के खेती. इन्होंने उदयपुर शहर से 12 ​किमी दूर दस हजार वर्गफीट की जमीन पर ऑटोमेटेड फार्म बैंक टू रूट्स तैयार की है. बिना मिट्टी की इस खेती को 'हाइड्रोपोनिक फार्मिंग' के नाम से जाना जाता है. इसके माध्यम से ये ओक लेट्यूस, ब्रॉकली, पाक चाय, चैरी-टोमेटो, बेल पेपर और बेसिल की खेती कर रहे हैं. इन सब्जियों की सबसे ज्यादा मांग पांच सितारा होटल्स में होती है और पर्यटक इन्हें पसंद भी करते हैं.

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खेती में मिट्टी का कहीं भी उपयोग नहीं किया गया है
बिना मिट्टी के पानी से होने वाली इस फार्मिंग को करने के लिये चारों दोस्तों ने रिसर्च किया और फिर उदयपुर में पॉली हाउस बनाकर उसमें खेती शुरू कर दी. इस खेती में मिट्टी का कहीं भी उपयोग नहीं किया गया है. इसमें तापमान को स्थि​र रखते हुए पौधों की जड़ तक पाइप से पानी पहुंचाया जाता है और उसी से पोषक सब्जियों की पैदावार होती है.

इनके बीज बोने से लेकर बढ़ने तक की एक अलग प्रक्रिया होती है
हाइड्रोपोनिक खेती में बीज बोने से लेकर बढ़ने तक की एक अलग प्रक्रिया होती है. ये पौधे छोटे प्लास्टिक के कप 'ए' आकार की फ्रेम में कतार में रखे जाते हैं. इससे पौधों की जड़ में जरूरत के अनुसार पानी चलता रहता है. इस पानी में न्यू्ट्रेंट सोल्यूशन मिलाये जाते हैं ताकि पौधों को जरूरी पोषक तत्व मिलते रहें. पॉली हाउस में तैयार किये जाने वाले इन पौधों को पानी के पाइप से पहुंचाया जाता है. पौधे पॉली हाउस में 27 से 30 डिग्री तक तापमान मेंटेन करके रखा जाता है.

काफी सकारात्मक नतीजे सामने आ रहे हैं
उदयपुर में हुई इस फार्मिंग की शुरुआत के नतीजे काफी सकारात्मक नजर आ रहे हैं. महज दो महीने में अब ऐसी फसल तैयार हो चुकी है जिसे पांच सितारा होटल्स में नाश्ते और फास्ट फूड में सबसे ज्यादा पसंद किया जाता है. यह इसलिये भी गुणवत्तापूर्ण हैं क्योंकि इसमें पेस्ट्रीसाइड्स का बिल्कुल भी इस्तेमाल नहीं होता है.

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