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आपके लिये इसका मतलब: मेवाड़ ऐप खेती को लेकर करेगा किसानों को जागरुक, जानिये कैसे

ऐप के माध्यम से किसान को समय पर सही जानकारी उपलब्ध हो सके इसके लिए कृषि और मौसम वैज्ञानिकों की सात अलग अलग टीमें बनाई गई हैं.
ऐप के माध्यम से किसान को समय पर सही जानकारी उपलब्ध हो सके इसके लिए कृषि और मौसम वैज्ञानिकों की सात अलग अलग टीमें बनाई गई हैं.

उदयपुर के महाराणा प्रताप कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों ने एक मोबाइल ऐप (Mobile app) तैयार किया है. इस ऐप के जरिये किसानों को खेती और पशुपालन से जुड़ी कई महत्वपूर्ण जानकारियां उपलब्ध करवाई जायेगी.

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उदयपुर. देश के किसानों (Farmers) की आमदनी को बढ़ाने के लिए हरसंभव प्रयास किये जा रहे हैं. इसके लिए जरूरी है कि किसानों को मौसम के मिजाज और सही तकनीक के बारे में सही समय पर जानकारी मिल सके. इसको ध्यान में रखते हुये उदयपुर के महाराणा प्रताप कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों ने एक मोबाइल ऐप (Mobile app) तैयार किया है. यह ऐप किसानों को खेती और पशुपालन के लिए कई महत्वपूर्ण जानकारियां उपलब्ध कराएगा. इसके साथ ही यह पैदावर को बढ़ाने में भी कारगर साबित होगा.

मौसम का पूर्वानुमान नहीं होने और खेती के बारे में उचित जानकारी के अभाव से किसान को कृषि कार्य में कई बार बहुत बड़ा नुकसान उठाना पड़ता है. इसी समस्या के समाधान को लेकर उदयपुर के महाराणा प्रताप कृषि एवं प्रौद्यौगिकि विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों ने यह मोबाइल ऐप तैयार किया है.





विशेषज्ञ वैज्ञानिकों की ओर दी जानकारियां
यह ऐप खेती से कैसे अधिक उपज प्राप्त कर सके इसके लिए उन्हें गाइड करेगा. 'मेवाड़ ऋतु' नाम के इस मोबाइल ऐप से विश्वविद्यालय से जुड़े उदयपुर, चित्तौडगढ़, राजसमन्द, बांसवाड़ा, डूंगरपुर, प्रतापगढ़ और भीलवाड़ा जिलों के किसानों को कई महत्वपूर्ण जानकारी मिल पाएंगी. ऐप के माध्यम से किसानों को कब फसल की बुवाई करनी है. कब कीटनाशक का छिड़काव करना है और कब सिंचाई करनी है ये तमाम जानकारियां विशेषज्ञ वैज्ञानिकों की ओर दी प्रदान की जायेगी. इसके साथ ही बदलते मौसम के बीच वे अपनी फसल को कैसे सुरक्षित रखें इसके बारे में जानकारी उपलब्ध करवाएंगे.

हर पांच दिन बाद इस मोबाइट ऐप को अपडेट किया जायेगा
एमपीयूएटी के अनुसंधान निदेशक डॉ, एसके शर्मा के मुताबिक मेवाड़ ऋतु ऐप के माध्यम से किसान को समय पर सही जानकारी उपलब्ध हो सके इसके लिए कृषि और मौसम वैज्ञानिकों की सात अलग अलग टीमें बनाई गई हैं. ये हर पांच दिन बाद इस मोबाइट ऐप को अपडेट करेंगी. इसमें मुख्य रूप से मौसम जानकारी के बाद खेती कार्य को लेकर वैज्ञानिक सलाह भी दी जाएगी. यही नहीं वैज्ञानिक पशुपालन को लेकर भी किसान से महत्वपूर्ण जारी साझा करेंगे. विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. एनएस राठौड़ मानें तो इस ऐप से मिलने वाली सलाह को मानते हुए अगर किसान अपनी खेती का कार्य करेंगे तो उन्हें 10 से 30 प्रतिशत तक अधिक पैदावार मिल पाएगी.
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