उदयपुर: टाउते तूफान का असर, गोगुंदा में 70 MM बारिश, लबालब हुईं लेकसिटी की झीलें, स्वरूप सागर के 2 गेट खोले

बुधवार को सुबह तक उदयपुर में शहरी क्षेत्र में 55 मिलीमीटर, बड़गांव में 42, मावली में 20 गोगुंदा में 70, सराडा में 22, ऋषभदेव में 58, झाडोल में 59, कानोड़ में 20, कोटडा में 28, सलूंबर में 41 और वल्लभनगर में 2 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई.

बुधवार को सुबह तक उदयपुर में शहरी क्षेत्र में 55 मिलीमीटर, बड़गांव में 42, मावली में 20 गोगुंदा में 70, सराडा में 22, ऋषभदेव में 58, झाडोल में 59, कानोड़ में 20, कोटडा में 28, सलूंबर में 41 और वल्लभनगर में 2 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई.

Impact of Tauktae cyclone in Udaipur: टाउते तूफान के कारण उदयपुर में रातभर बदरा बरसे. इससे लेकसिटी की झीलों (Lakes) में पानी की जमकर आवक हुई और वे लबालब हो गईं. यहां तक कि स्वरूप सागर के देर रात 2 गेट खोलने पड़े.

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उदयपुर. चक्रवाती तूफान टाउते (Tauktae cyclone) ने देर रात राजस्थान में प्रवेश किया था. राजस्थान में मुख्य रूप से उदयपुर संभाग को रेड जोन में रखा हुआ था. राजस्थान में दस्तक देने के साथ ही तूफान का असर उदयपुर (Udaipur) में नजर आने लग गया था. मंगलवार दोपहर के बाद तेज हवा और बारिश शुरू हो गई थी जो रात होते होते और भी तेज होती गई. ताउते तूफान के कारण तेज बारिश ने झीलों को लबालब कर दिया.

हालांकि मौसम विभाग के अनुसार तूफान कुछ कमजोर जरूर हुआ है लेकिन उदयपुर में बादल रातभर बरसते रहे. तूफान का असर मध्यरात्रि के बाद तक रहा. इस दौरान उदयपुर जिले में सर्वाधिक गोगुंदा में 70 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई. मंगलवार को शाम होने के साथ ही तेज हवाएं चलने लगी थी. इसके चलते उदयपुर शहर में कई जगह पेड़ धराशाई हो गए तो वहीं सड़कों पर पानी भी भर गया.

बैरिकेडिंग और टेंट हवा में उड़ गए

लॉकडाउन की पालना कराने के लिए लगाए गए पुलिस नाकों के बैरिकेडिंग और टेंट हवा में उड़ गए. यहीं नहीं बड़े-बड़े होर्डिंग भी तेज हवा के झोंके को सहन नहीं कर पाए. इस दौरान उदयपुर में शहरी क्षेत्र में 55 मिलीमीटर, बड़गांव में 42, मावली में 20 गोगुंदा में 70, सराडा में 22, ऋषभदेव में 58, झाडोल में 59, कानोड़ में 20, कोटडा में 28, सलूंबर में 41 और वल्लभनगर में 2 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई.
सीसारमा नदी तेज बहाव से बही

रात करीब 10 बजे से 3 बजे के बीच में बारिश का प्रभाव काफी तेज रहा. यही वजह रही कि झीलों की नगरी उदयपुर की झीलों को भरने वाले केचमेंट एरिया में अच्छी बारिश दर्ज की गई. इससे झीलों में जमकर पानी की आवक हुई. देर रात को अचानक सीसारमा नदी तेज बहाव से बहने लगी. सीसारमा नदी रात को 4 बजे करीब 11 फीट पर चल रही थी. प्रशासन ने झीलों में पानी की आवक बढ़ती हुई देखकर तुरंत स्वरूप सागर के गेट खोलने का निर्णय लिया.

पिछोला और स्वरूप सागर दोनों झीलें लबालब हुईं



स्वरूप सागर के दो गेट पहले 6 इंच खोले गए. बाद में पानी की आवक बढ़ते देखकर एक एक फीट तक और खोल दिए गए. स्वरूप सागर के गेट खोलने के साथ ही पहली बार मई महीने में भी शहर की आयड़ नदी में पानी का तेज बहाव देखा गया. स्वरूप सागर का जलस्तर 11 फीट हो गया. तूफान के मद्देनजर उदयपुर जिला कलेक्टर चेतन देवड़ा ने सभी सरकारी कार्यालय पूरी रात खुले रखने के निर्देश दिए थे. ऐसे में जिला कलेक्ट्री सहित यूआईटी, निगम, दमकल, और रेस्क्यू टीम पूरी रात तैनात रही.

पहले तूफान उदयपुर और कोटा संभाग के बीच से गुजरने वाला था

तूफान के कारण शहर में कई जगह पेड़ भी गिरे जिन्हें दमकल विभाग के कर्मचारियों ने रात को ही सड़क से हटाकर मार्ग को दुरुस्त किया. गुजरात के तट से टकराने के बाद ताऊते का रास्ता बदल गया था. यह तूफान पहले उदयपुर और कोटा संभाग के बीच से गुजरने वाला था, लेकिन बाद में रास्ता बदलकर यह उदयपुर में कोटडा, गोगुंदा और सायरा मार्ग से होकर गुजरा.

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