Laxmi Vilas Hotel Case: CBI की गिरफ्तारी वारंट पर कोर्ट ने लगाई रोक, 15 अक्टूबर तक केंद्र से मांगा जवाब

सीबीआई ने जब इस होटल की जमीन का आकलन किया गया तो इसकी कीमत 151 करोड़ रुपए से भी ज्यादा पाई गई थी.
सीबीआई ने जब इस होटल की जमीन का आकलन किया गया तो इसकी कीमत 151 करोड़ रुपए से भी ज्यादा पाई गई थी.

Laxmi Vilas Hotel Case Update: याचिकाकर्ताओं को बिना अनुमति देश छोड़कर बाहर जाने पर भी रोक लगा दी है. 15 अक्टूबर को मामले में अगली सुनवाई (Hearing) होगी.

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उदयपुर. राजस्थान की लेकसिटी उदयपुर (Udaipur) में स्थित द ललित ग्रुप के होटल लक्ष्मी विलास (Hotel Laxmi Vilas) मामले में कोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया है. कोर्ट ने सीबीआई (CBI) द्वारा जारी गिरफ्तारी वारंट पर रोक लगाई गई है. याचिकाकर्ताओं को 8 अक्टूबर से पहले जमानती मुचलके भरने का आदेश कोर्ट ने जारी किया है. इसके साथ ही याचिकाकर्ताओं को बिना अनुमति देश छोड़कर बाहर जाने पर भी रोक लगा दी है. अब इस मामले में अगली सुनवाई 15 अक्टूबर को होगी. इसके साथ ही कोर्ट ने रिसीवर नियुक्त करने पर भी रोक लगा दी है.

वहीं होटल लक्ष्मी विलास मामले में कोर्ट ने केंद्र को नोटिस जारी कर 15 अक्टूबर तक जवाब मांगा है. होटल पर रिसीवर नियुक्त करने के सीबीआई कोर्ट के आदेश पर कोर्ट ने अंतरिम रोक लगा दी है. रिसीवर को होटल सुपुर्द करने के आदेश जारी किया गया है. साथ ही मामले के निस्तारण तक सम्पत्ति के बेचान, लीज पर देने या किसी को शेयर देने पर कोर्ट ने रोक लगा दी है. हाईकोर्ट जस्टिस दिनेश मेहता की कोर्ट ने ये आदेश दिया है.

 मात्र 7 करोड़ 52 लाख रुपये में दे दिया था होटल



मालूम हो कि उदयपुर में स्थित द ललित ग्रुप के होटल लक्ष्मी विलास को सीबीआई कोर्ट ने सरकारी संपत्ति मानते हुए साल 2002 में हुए विनिवेश को रद्द कर दिया. होटल को लेकर दिए गए सीबीआई कोर्ट (CBI Court) के आदेश के बाद जिला कलक्टर चेतन देवड़ा ने होटल के सभी दस्तावेजों को अपने कब्जे में लिया और होटल प्रबंधन को बैंक ट्रांजेक्शन सहित अन्य किसी भी व्यवसाय गतिविधि में छेड़छाड़ नहीं करने के स्पष्ट निर्देश दिए. कोर्ट ने होटल को कब्जे में लेने की पूरी कार्रवाई कर तीन दिन के भीतर इसकी रिपोर्ट पेश करने के निर्देश दिए.
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जानकारी के अनुसार वर्ष 2002 में उदयपुर की इस बेशकीमती संपत्ति लक्ष्मी विलास होटल को तत्कालीन केन्द्र सरकार ने द ललित ग्रुप ऑफ होटल्स को मात्र 7 करोड़ 52 लाख रुपये में दे दिया था. फतेहसागर झील किनारे बनी इस बेशकीमती होटल को बेचने का उदयपुर में काफी विरोध दर्ज कराया गया था. द ललित ग्रुप के इस विनिवेश को गलत मानते हुए उस समय से ही इसे रद्द करने की मांग उठने लगी थी. उसके बाद इसकी सीबीआई जांच के आदेश हुए थे. सीबीआई ने इस होटल की जमीन का आकलन किया गया तो इसकी कीमत 151 करोड़ रुपए से भी ज्यादा पाई गई. यही नहीं विनिवेश से पहले सरकार ने ढ़ाई करोड़ रुपए की लागत से होटल के रिनोवेशन में भी खर्च कर दिया था.
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