लोकसभा चुनाव-2019: मेवाड़ में बीटीपी की 'भील प्रदेश' की मांग ने उड़ाई बीजेपी-कांग्रेस की नींद

मेवाड़ में इस बार कांग्रेस और बीजेपी दोनों की नींद उड़ी हुई है और इसकी वजह है 'भारतीय ट्राइबल पार्टी' और 'भील प्रदेश' की मांग.

Kapil Shrimali | News18 Rajasthan
Updated: March 15, 2019, 11:43 AM IST
लोकसभा चुनाव-2019: मेवाड़ में बीटीपी की 'भील प्रदेश' की मांग ने उड़ाई बीजेपी-कांग्रेस की नींद
बीटीपी के विधायक एवं उनके समर्थक। फोटो : न्यूज 18 राजस्थान ।
Kapil Shrimali | News18 Rajasthan
Updated: March 15, 2019, 11:43 AM IST
आदिवासी बाहुल्य मेवाड़-वागड़ अंचल सदैव से सत्ता का प्रमुख केन्द्र रहा है. दोनों प्रमुख राजनैतिक दलों की इस अंचल पर खास नजर रहती है. प्रदेश की सियासत में तो माना जाता है कि सत्ता का रास्ता मेवाड़ से होकर निकलता है. लेकिन इस बार इस क्षेत्र में कांग्रेस और बीजेपी दोनों की नींद उड़ी हुई है और इसकी वजह है 'भारतीय ट्राइबल पार्टी' और 'भील प्रदेश' की मांग. Cow Politics: कटारिया बोले, कांग्रेस को आखिरकार गाय की पूंछ पकड़नी ही पड़ी पिछले दिनों हुए विधानसभा चुनावों में इस अंचल में एक नई राजनैतिक ताकत भारतीय ट्राइबल पार्टी का उद्भव हुआ. बीटीपी के नाम से उभरे स्थानीय आदिवासियों के इस नए गुट ने पहली बार आदिवासी अंचल की 12 सीटों पर चुनाव लडते हुए डूंगरपुर जिले की 2 विधानसभा सीटों चौरासी और सागवाड़ा पर बीजेपी व कांग्रेस को मात देते हुए जोरदार जीत दर्ज की. इससे उत्साहित बीटीपी अब ना केवल अंचल की दोनों लोकसभा सीटों उदयपुर और बांसवाड़ा-डूंगरपुर से चुनाव लड़ने का मानस बना रही है. उसने 'भील प्रदेश' के नाम से नए राज्य के गठन का ऐलान कर दोनों प्रमुख राजनैतिक दलों के नुमांइदों की नींद उड़ा दी है.

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समाज के दिग्गज नेताओं से हैं खफा स्थानीय आदिवासियों को जमीनी मुद्दों पर एकजुट करने का प्रयास कर रहे बीटीपी के नुमांइदों का आरोप है कि अनूसूचित क्षेत्र के लिए 5वीं अनूसूची में दिए गए तमाम प्रावधान अभी तक आदिवासी हितों में उचित ढंग से लागू नही हुए हैं. इसके चलते ना केवल दक्षिणी राजस्थान बल्कि देश के अन्य हिस्सों के आदिवासियों के हित औऱ अधिकार भी प्रभावित हो रहे हैं.अलग भील प्रदेश की मांग के इस आंदोलन की गंभीरता का अंदाज इसी बात से लगाया जा सकता है कि कांग्रेस और बीजेपी में शामिल आदिवासी समाज के दिग्गज नेताओं से ये लोग खासे नाराज हैं. बीटीपी राजस्थान के मेवाड़ और इससे सटे गुजरात व मध्यप्रदेश के आदिवासी इलाकों को मिलाकर भील प्रदेश की मांग कर रहे हैं. लोकसभा चुनाव-2019: कांग्रेस ने किया चुनावी सभाओं का आगाज, BJP पर बरसे नेता
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सीएम अशोक गहलोत। फाइल फोटो।
चिंता में बीजेपी-कांग्रेस पिछले दिनों मेवाड़ के दौरे पर आए सीएम अशोक गहलोत ने बीटीपी की अप्रोच को आदिवासी हितों के खिलाफ बताया. उन्होंने आदिवासी युवाओं से अपील करते हुए कहा कि वे देश और समाज को तोड़ने वाली ताकतों से दूर रहें. दूसरी तरफ नेता मेवाड़ के दिग्गज बीजेपी के नेता प्रतिपक्ष गुलाबचंद कटारिया ने तो बीटीपी की सोच की माओवादी सोच से तुलना तक कर डाली. जाहिर नई ताकत के उद्भव से दोनों प्रमुख दल चिंतित हैं, लिहाजा इस बार उन्हें मेवाड़ में अपनी रणनीति में बदलाव तो करना ही पड़ेगा.
नेता प्रतिपक्ष गुलाबचंद कटारिया। फाइल फोटो
भील प्रदेश का निर्माण ही हमारी समस्याओं का समाधन- रामप्रसाद ट्राइबल पार्टी के लिए हाल ही में सागवाड़ा से जीतकर आए विधायक रामप्रसाद ढिंढोर का आरोप है कि जो भी आदिवासी नेता अब तक चुने गए उन्होंने कभी भी आदिवासी हितों की परवाह नहीं की और ना ही उचित मंच पर आदिवासी के अधिकारों के लिए लड़ाई लड़ी. ऐसे में अब भील प्रदेश का निर्माण ही उनकी समस्याओं का समाधन हो सकता है. कांग्रेस स्क्रीनिंग कमेटी की बैठक, सीईसी को अब भेजा जाएगा सिंगल नाम का पैनल केन्द्रीय मंत्री शेखावत का कांग्रेस पर हमला, किसानों को गुमराह करने का लगाया आरोप लोकसभा चुनाव-2019 : बीजेपी के लिए इस बार आसान नहीं है राह, बहाना पड़ेगा पसीना लोकसभा चुनाव 2019: प्रदेश में बीजेपी-कांग्रेस के इन दिग्गजों पर रहेगी सभी की नजरें प्रत्याशी चयन में बदलाव की आहट, कांग्रेस नए जातीय समीकरण और बीजेपी देख रही फीडबैक एक क्लिक और खबरें खुद चलकर आएंगी आपके पास, सब्सक्राइब करें न्यूज़18 हिंदी  WhatsApp अपडेट्स
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