उदयपुर: 15 दिन के लिए Quarantine होंगे भगवान जगन्नाथ, लगेगा काढ़े का भोग

15 दिन बाद भक्तों को दर्शन देंगे भगवान जगन्नाथ.

Snana Purnima Lord Jagannath Rath Yatra 2021: पौराणिक मान्यता है कि ज्येष्ठ पूर्णिमा (Jyeshtha Purnima) को अत्यधिक स्नान से भगवान जगन्नाथ बीमार पद जाते है. इसके बाद भगवान को औषधीय गुणों युक्त काढ़े (Kadhna) का भोग लगाया जाता है.

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उदयपुर. पौराणिक परंपरा के अनुसार भगवान जगन्नाथ (Lord Jagannath) आज 108 घड़ों के पानी से स्नान करने के बाद बीमार हो गए हैं. अब भगवान के दर्शन 15 दिन बाद आषाढ़ सुदी एकम को हो सकेंगे. झीलों के शहर उदयपुर के सेक्टर-7 स्थित जगन्नाथ धाम के स्वामी भगवान जगन्नाथ के दर्शन 15 दिनों तक बंद होने से पहले भक्तों ने दर्शन किए. अब भगवान के बीमार होने की वजह से इन दिनों जगन्नाथ धाम में भगवान अपने भक्तों को दर्शन नहीं देंगे. वहीं मंदिर के पुजारी अपने प्रभु को जल्द स्वस्थ करने के लिए लगातार प्रयत्न करेंगे. दरअसल, जगन्नाथ पुरी की तर्ज पर लेकसिटी के इस प्रसिद्ध धाम पर इसी परम्परा का निर्वहन किया जाता है.

पौराणिक मान्यता है कि ज्येष्ठ पूर्णिमा को अत्यधिक स्नान से भगवान जगन्नाथ बीमार पद जाते है. इसके बाद भगवान को औषधीय गुणों युक्त काढ़े का भोग लगाया जाता है. पंद्रह दिन बाद भगवान स्वस्थ्य होकर आषाढ़ शुक्ल एकम को नव यौवन में दर्शन देते हैं और द्वितीया को रथ में विराजकर नगर भ्रमण पर निकल कर द्वारे-द्वारे अपने भक्तों को दर्शन देते है.

जानें क्या है परंपरा
उदयपुर के सेक्टर सात इलाके में स्थित जगन्नाथ धाम में आने वाले श्रद्धालु आज से अपने स्वामी भगवान जगन्नाथ के दर्शन नहीं कर पाएंगे. आज ज्येष्ठ पूर्णिमा के अवसर पर भगवान जगन्नाथ को 108 घड़ों से विशेष स्नान करवाया गया, जिनमें प्रभु के सुदर्शन चक्र को 18 घड़ों से,सुभद्राजी को 22 घड़ों से, बलभद्रजी को 33 घड़ों से और जगन्नाथ स्वामी को 35 घड़ों से स्नान करवाया गया. ज्येष्ठाभिषेक के समय भगवान रत्न जड़ित सिंहासन पर विराजते हैं. ऐसी मान्यता है कि पूर्णिमा के विशेष स्नान के बाद भगवान जगन्नाथ बीमार हो जाते हैं और गणेश रूप धारण कर लेते हैं.

ऐसे में दोपहर करीब दो बजे से मंदिर के पट बंद हो जाते है. भगवान के अस्वस्थ होने के साथ ही मंदिर में जगन्नाथ के दर्शन बंद हो जाते है. उनके स्थान पर भगवान मदनमोहन अपने अलोकिक स्वरुप के दर्शन देते है. भगवन के बीमार होने के तुरंत बाद उन्हें मंदिर परिसर में ही श्रधालुओं से दूर रखा जाता है. भगवान के बीमार अवस्था के दौरान सिर्फ मंद्दिर के पुजारी को ही भगवान जगन्नाथ के पास जाने की इजाजत होती है. इस दौरान भगवान को स्वस्थ करने के लिए मंदिर के पुजारी की और से ओषधिययुक्त काड़ा तैयार किया जाता है.

15 दिनों बाद होंगे भगवान के दर्शन

ज्येष्ठ शुक्ल की पूर्णिमा के दिन भगवान जगन्नाथ को कराए जाने वाले विशेष स्नान से भगवान करीब 15 दिन तक अस्वस्थ हो जाते है. इस दौरान जगन्नाथ अपने श्रधालुओ को दर्शन नहीं दे पाते, लेकिन उनके स्थान पर भगवान् मदनमोहन यहां आने वाले भक्तों को निराश नहीं होने देते है. भगवान को पूर्णतया स्वस्थ्य होने में लगभग पंद्रह दिन का समय लग जाता है. इन 15 दिन की बीमार अवस्था से गुजरने के बाद भगवान जगन्नाथ पुन आषाढ़ शुक्ल पक्ष की एकम के दिन अपने सभी भक्तों को दर्शन देंगे. भगवान के जल्दी ठीक होने का उनके भक्त भी इन्तजार कर रहे है. यही नहीं जगन्नाथ धाम पर आने वाला हर श्रदालु भगवान के ठीक होने के साथ उनके दर्शन के लिए इंतजार करता है. भगवान के पाकट्य पर 36 तरह के व्यंजनों का भोग लगाया जाता है. इसके पश्चात भगवान आषाढ़ शुक्ल पक्ष की द्वितीया को अपने रजत रथ में विराजित होकर नगर भ्रमण पर निकलेंगे और द्वारे द्वारे जाकर अपने सभी भक्तों को दर्शन देंगे.
प्राचीन काल से चली आ रही इस तरह की परम्पराओं से भगवान जगन्नाथ और उनके प्रति अटूट श्रद्धा रखने वाले उनके भक्तों के भावनात्मक रिश्तों में और प्रगाढ़ता आती है. अब जगन्नाथ धाम में आने वाला प्रत्येक भक्त भगवान के स्वस्थ होने के साथ उनके नगर भ्रमण पर निकलने का बेसब्री से इन्तजार कर रहे है.

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