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मन की बात: पीएम नरेन्द्र मोदी ने क्यों सराहा राजस्थान की सुल्तान बावड़ी को? जानिये पूरा इतिहास

उदयपुर के बेदला में मूलरूप में यूं लौटी सुल्तान की बावड़ी.

उदयपुर के बेदला में मूलरूप में यूं लौटी सुल्तान की बावड़ी.

पीएम नरेन्द्र मोदी को भायी सुल्तान की बावड़ी: पीएम नरेन्द्र मोदी (PM Narendra Modi) ने अपने 'मन की बात' (MannKiBaat) में राजस्थान के उदयपुर के बेदला में स्थित सुल्तान की बावड़ी को साफ करने के लिये किये गये प्रयासों की जमकर सराहना की. यही नहीं पीएम मोदी ने उसके बाद उदयपुर के युवाओं के प्रयासों को सराहते हुये ट्वीट करके भी कहा कि आज दुनियाभर में इस बदलाव की चर्चा है. जानिये क्या इतिहास है सुल्तान की इस बावड़ी का.

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कमल दखनी.

उदयपुर. प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की ‘मन की बात’ (MannKiBaat) से चर्चा में आई राजस्थान के उदयपुर की सुल्तान की बावड़ी अब देशभर जनसहभागिता का बड़ा उदाहरण बनकर उभरी है. पीएम नरेन्द्र मोदी (PM Narendra Modi) ने मन की बात में बावड़ी के संरक्षण के लिये किये गये प्रयासों की जमकर सराहना की है. उसके बाद पीएम मोदी ने इसको लेकर आज ट्वीट कर कहा कि ”राजस्थान के उदयपुर में कूड़े-कचरे के ढेर में तब्दील हो गई सैकड़ों साल पुरानी एक बावड़ी का कुछ युवाओं ने न सिर्फ कायाकल्प कर दिखाया है, बल्कि उसे संगीत के सुर और तान से भी जोड़ दिया है. आज दुनियाभर में इस बदलाव की चर्चा है.

दरअसल उदयपुर में बेदला गांव में बरसों पुरानी की एक बावड़ी है. इसका निर्माण बरसों पहले बेदला के राव सुल्तान सिंह ने करवाया था. उसके बाद इसे सुल्तान बावड़ी के नाम से ही जाना जाने लगा. पुराने जमाने में इस बावड़ी का पानी आस पास के गांवों में सप्लाई किया जाता था. तब तक यहां साफ सफाई रहती थी. लेकिन बदलाव की बयार के बाद इसकी और किसी ने ध्यान नहीं दिया. धीरे-धीरे ये बावड़ी वीरान हो गई. इसमें इतना कचरा जमा हो गया कि कोई इसकी तरफ झांकता भी नहीं था.

कूडे़ करकट से भर चुकी थी ये बावड़ी
करीब 9 महीने पहले यहां उदयपुर के आर्किटेक्ट सुनील लड्ढा घूमने आये. उन्होंने जब इस बावड़ी की हालत देखी तो उनसे रहा नहीं गया. सुनील लड्ढा बताते है कि जब वे यहां आये थे तब इसकी स्थिति देखकर बहुत दुख हुआ था. बावड़ी में जगह-जगह पेड़ पौधे उगे हुए थे. पत्थर टूट रहे थे. बावड़ी का पानी भी पीला पड़ गया था. बावड़ी के पानी में जूते, बैग, प्लास्टिक और कई तरह का कूड़ा करकट भरा हुआ था. बावड़ी को देखकर लग नहीं रहा था कि ये हमारी धरोहर है.

सोशल मीडिया पर अपील की और कारवां जुड़ता गया
सुनील लड्ढा इस बावड़ी को एक आर्किटेक्ट की नजर से देखा और इसके पीछे छुपी खूबसूरती को पहचान लिया. बाद में सनील लड्ढा ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट करते हुए आमजनता से इस साफ सफाई में सहभागिता निभाने की अपील की. उनकी यह अपील रंग लाई और वहां सफाई करने वाला का कारवां जुटने लगा. धीरे धीरे लोग जुड़ते गये और बावड़ी साफ होती गई. कुछ ही दिनों में बावड़ी फिर से अपने मूल स्वरुप में आ गई.

जागरूक लोगों का उद्देश्य इसे जीवित भी करना था
यहां बात सिर्फ सुल्तान बावड़ी को साफ करने तक ही सीमित नहीं थी. उदयपुर के इन जागरूक लोगों का उद्देश्य इसे जीवित भी करना था. लिहाजा साफ सफाई के बाद यहां युवाओं को सुर और तान समेत अन्य एक्टिविटी से जोड़ा गया. आस पास के लोगों को धर्म और भक्ति से जोड़ा गया. सुनील ने बताया कि इसकी सफाई से पहले कागज पर इसका चित्र बनाया. बाद में टीम के अमित और अन्य साथियों से चर्चा करते हुए इसके जीर्णोद्धार की रुपरेखा तय की. उसी के अनुसार आगे बढ़ते रहे और आज सफलता भी मिली है.

कभी म्यूजिक और पेंटिंग की जुगलबंदी की गई
सुनील बताते हैं यहां श्रमदान करके इसे साफ करने के बाद युवाओं को जोड़ने के लिए कभी म्यूजिक और पेंटिंग की जुगलबंदी की गई. कभी इसे धर्म से जोड़ने और पवित्र रखने के लिए हरिद्वार से गंगा जल मंगवा कर ग्रामीणों के हाथ से ही इसमें प्रवाहित कराया गया. आज उदयपुर की ये बावड़ी देश के सामने एक बड़ा उदाहरण बन गई है. उल्लेखनीय है कि राजस्थान में सैंकड़ों ऐसे गांव, शहर और कस्बे हैं जहां प्राचीन बावड़िया मौजूद हैं. किसी समय पानी की आपूर्ति का बड़ा साधन रही ये बावड़ियां विकास की अंधी दौड़ में खो गई हैं.

Tags: Mann Ki Baat, Pm narendra modi, Rajasthan news, Udaipur news

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