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Udaipur: कैदी नंबर 259 ने बदली जेल की फिजां, पेंटिग्स देखकर दंग रह गये अधिकारी

साधुराम ने जेल की सूरत बदलने की शुरुआत अकेले की थी. लेकिन दो साल में कई कैदी उससे जुड़ गये. साधुराम ने उन्हें भी पेंटिंग बनाना सीखा दिया.
साधुराम ने जेल की सूरत बदलने की शुरुआत अकेले की थी. लेकिन दो साल में कई कैदी उससे जुड़ गये. साधुराम ने उन्हें भी पेंटिंग बनाना सीखा दिया.

उदयपुर की सेंट्रल (Central jail) के एक कैदी ने अपनी रुचि के चलते पूरे जेल परिसर में खूबसूरत पेंटिग्स (Beautiful paintings) बनाकर उसे म्यूजिम जैसा लुक दे दिया है.

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उदयपुर. लेकसिटी उदयपुर की सेंट्रल जेल (Central jail) की दीवारें इन दिनों किसी म्यूजियम से कम नजर नहीं आ रही हैं. यहां जेल की दीवारों पर सैंकड़ों खूबसूरत पेंटिंग्स (Beautiful paintings) बनी हैं. आप यकीन नहीं करेंगे, लेकिन इन पेंटिग्स को जेल के कैदी साधुराम ने बनाया है. एनडीपीएस मामले में 12 साल की सजा काट रहे कैदी साधुराम (Prisoner sadhuram) से जब जेल ने उनकी रूची पूछी गई तो उसने पेंटिग्स के बारे में बताया था. जेल प्रबंधन ने प्रायोगिक तौर पर उसे एक चित्र बनाने को दिया था.

साधुराम ने उसे हू-ब-हू उकेर दिया. उसके बाद जेल प्रशासन ने उसे प्रोत्साहित किया और जेल में पेंटिग्स बनाने की छूट दे दी. इस पर साधुराम ने गत दो साल में जेल की दीवारों पर सैंकड़ों पेंटिंग्स बना डाली. इससे जेल की दीवारें अब खूबसूरत नजर आने लगी हैं. साधुराम ने जेल से बाहर निकलकर इसी पेशे को अपनाने और अपराध से दूरी बनाने का भी दृढ़ निश्चय किया है. साधुराम के इस संकल्प और लगन से जेल के अन्य कैदी भी प्रभावित हुए हैं. साधुराम ने जेल की सूरत बदलने की शुरुआत अकेले की थी. लेकिन दो साल में कई कैदी उससे जुड़ गये. साधुराम ने उन्हें भी पेंटिंग बनाना सीखा दिया. करीब पन्द्रह कैदियों ने पेंटिंग बनाना सीखकर इसमें साधुराम का हाथ बंटाया है.

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साधुराम ने सभ्य नागरिक की तरह जीवन यापन करने का फैसला किया है


जेल में आने वाले अधिकांश कैदी पश्चाताप की आग में तपकर एक सभ्य नागरिक बन बाहर निकलना चाहते है. जेल प्रबंधन भी कैदियों को सामाजिक कार्यों से जोड़कर उनके जीवन को बेहतर बनाने का प्रयास करता है. उदयपुर की सेंट्र्ल जेल में भी जेल प्रबंधन के सहयोग के चलते कैदी नंबर 259 ने ना सिर्फ जेल की तस्वीर बदल दी हैं बल्कि अब जेल से बाहर निकलने पर भी उसने सभ्य नागरिक की तरह जीवन यापन करने का फैसला किया है.

करीब साढे़ सात लाख रुपये का खर्च आया है
जेल प्रबंधन की यह सोच रहती है कि जब कैदी जेल से बाहर निकले तो वह पुन: अपराध की दुनिया में कदम ना रखे. इसी सोच के चलते उसे जेल में भी उसकी रूचि के कार्य कराने का प्रयास किया जाता है. साधुराम का भी जेल प्रबंधन ने सहयोग किया तो जनसहभागिता से उसके​ लिये पेंटिंग का सामान उपलब्ध कराया गया. जेल की इन दीवारों का खूबसूरत बनाने में करीब साढे़ सात लाख रुपये का खर्च आया है.
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