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RBSE की 10वीं की किताब में शामिल पद्मावत पर जायसी के विवादित तथ्य का विरोध शुरू

RBSE की 10वीं की किताब में शामिल पद्मावत पर जायसी के विवादित तथ्य का विरोध शुरू

राजस्‍थान बोर्ड की दसवीं की किताब में शामिल फैक्ट का विरोध शुरू

राजस्‍थान बोर्ड की दसवीं की किताब में शामिल फैक्ट का विरोध शुरू

दसवीं की किताब में महाराणा प्रताप, हल्दीघाटी युद्ध, चेतक और उदय सिंह को लेकर तथ्यों में की गई छेड़छाड़ का विवाद अभी खत्म ही नहीं हुआ कि एक बार फिर रानी पद्मिनी के लिए लिखे गए तथ्यों को लेकर इतिहासकारों में आक्रोश व्याप्त हो गया है.

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उदयपुर. राजस्थान माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (RBSE) की दसवीं कक्षा में राजस्थान की संस्कृति और इतिहास किताब को भी शामिल किया गया है. इस किताब में जिन तथ्यों को शामिल किया है, उसे लेकर अब विवाद (protest) पनपने लगा है. दसवीं की किताब में महाराणा प्रताप, हल्दीघाटी युद्ध, चेतक और उदय सिंह को लेकर तथ्यों में की गई छेड़छाड़ का विवाद अभी खत्म ही नहीं हुआ कि एक बार फिर रानी पद्मिनी के लिए लिखे गए तथ्यों को लेकर इतिहासकारों में आक्रोश व्याप्त हो गया है.

जायसी के तथ्य शामिल हैं किताब में

राजस्थान की संस्कृति और इतिहास किताब में मलिक मोहम्मद जायसी (Malik Muhammad Jayasi) के तथ्यों को शामिल कर बच्चों को पढ़ाया जा रहा है. मलिक मोहम्मद जायसी के पद्मावत के तथ्यों को लेकर ही पहले फिल्म पद्मावत का विरोध हो चुका है, एक बार फिर शिक्षा बोर्ड ने पद्मिनी से जुड़े उन्हीं तथ्यों को किताब में शामिल किया है, जिनका फिल्म पद्मावत के दौरान देशभर में विरोध देखने को मिला था. खिलजी के शासन के करीब 237 बरस बाद जायसी ने अपनी कल्पनाओं के आधार पर पद्मावत को लिखा और उस किताब में खिलजी द्वारा चित्तौड़गढ़ पर आक्रमण करने की वजह पद्मावती की सुंदरता को बताया था, यही तथ्य जब फिल्म पद्मावत में दिखाए जाने वाले थे, उससे पहले इसका पुरजोर तरीके से विरोध हुआ और फिर फिल्म निर्माताओं ने इन तथ्यों को सिर्फ कल्पनाओं के आधार पर बताने का डिस्क्लेमर जारी किया था.
राजस्थान की संस्कृति और इतिहास पुस्तक में कई राजा रजवाड़ों का जिक्र किया गया है. इसी बीच चित्तौड़ पर आक्रमण की वजह रावल रतन सिंह की पत्नी पद्मिनी को प्राप्त करना बताया गया है. जैसे ही इसकी जानकारी इतिहासकारों और राजपूत समाज को हुई, उन्होंने यह तथ्य किसी भी सूरत में बच्चों को नहीं पढ़ाए जाने की बात कही.

जायसी के तथ्य को जोड़ना उचित नहीं : प्रो. शर्मा

मध्यकालीन इतिहास के जानकार प्रो. चन्द्रशेखर शर्मा कहना है कि चित्तौड़ पर खिलजी के आक्रमण का कारण साम्राज्यवादी महत्वाकांक्षा, चित्तौड़ के दुर्ग की सैन्य महत्ता और राजपूताना की प्रतिष्ठा को विध्वंस करना था. इतिहास के रूप में जायसी के संदर्भ को जोड़ना तथ्यात्मक रूप से उचित नहीं है. अमीर खुसरो के साथ प्रसिद्ध लेखक निजामुद्दीन औलिया, मीर हसन देहलदी ही नहीं, बल्कि खिलजी के समकालीन सदुद्दीन अली, फखरुद्दीन, इम्मामुद्दीन रजा, मौलाना आरिफ, अब्दुला हकीम आदि ने भी रचनाओं में घटना का उल्लेख नहीं किया. इतिहासकार शर्मा की मानें तो सल्तनत काल की प्रमुख रचनाएं तारीख-ए-फ़िरोजशाही, फतखे जहांदारी आदि में रानी पद्मिनी को लेकर युद्ध का कोई वर्णन नहीं है.

Tags: Padmaavat, Protest, Rajasthan news, RBSE

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