सवालों के घेरे में उदयपुर की Bhupal Nobles University की भर्ती प्रक्रिया

उदयपुर के भोपाल नोबल विश्वविद्यालय की एक भर्ती प्रक्रिया पर सवाल.

उदयपुर के भोपाल नोबल विश्वविद्यालय की एक भर्ती प्रक्रिया पर सवाल.

उदयपुर के भूपाल नोबल विश्वविद्यालय (Bhupal Nobles University) की एक भर्ती प्रक्रिया अब सवालों के घेरे में आ खड़ी हुई है.

  • Share this:
उदयपुर. राजस्थान के उदयपुर के भूपाल नोबल विश्वविद्यालय (Bhupal Nobles University) की एक भर्ती प्रक्रिया अब सवालों के घेरे में आ खड़ी हुई है. वर्ष 2013-14 में हुई भर्ती प्रक्रिया में सहायक लाइब्रेरियन पद पर हरिओम सिंह शक्तावत का चयन किया गया था, लेकिन बाद में हरिओम सिंह शक्तावत की मार्कशीट फर्जी साबित हुई थी. इसे लेकर विश्वविद्यालय प्रबंधन में भूपालपुरा थाने में हरिओम सिंह के खिलाफ मामला दर्ज करवाया है. हरिओम सिंह का यह प्रकरण के सामने आने के बाद अब विश्वविद्यालय उस भर्ती प्रक्रिया में नियुक्ति पाने वाले सभी कर्मचारियों के दस्तावेजों की जांच करवाएगा. इसके लिए एक कमेटी का भी गठन किया जाएगा.



सभी भर्तियों के दस्तावेजों की जांच कराने की सिफारिश

वर्ष 2013-14 में हुई भर्तियों में 100 से ज्यादा स्टाफ की भर्ती की गई थी जिसमें असिस्टेंट प्रोफेसर की सबसे ज्यादा पोस्ट थी. वहीं कुछ भर्ती गैर शैक्षणिक पदों पर भी की गई थी ऐसे में हरिओम सिंह शक्तावत के मामले की जांच करने वाली कमेटी ने सभी भर्तियों के दस्तावेजों की जांच कराने की सिफारिश की है. हरिओम सिंह की जांच कमेटी ने अपनी रिपोर्ट में मुख्य रूप से चार बिंदुओं पर फोकस किया था. इसमें भर्ती प्रक्रिया से जुडी सभी नियुक्तियों की योग्यता जांचने की रिकमेंडेशन पर काम करना बाकी है. ऐसे में विश्वविद्यालय के रजिस्ट्रार भी मानते हैं कि जांच प्रक्रिया पूरी करने के लिए एक हाई पावर कमेटी का गठन होना चाहिए. रजिस्ट्रार रघुवीर सिंह चौहान विश्वविद्यालय और विद्या प्रचारिणी सभा के चेयरमैन को इसके लिए जानकारी देंगे और दस्तावेजों की जांच के लिए हाई पावर कमेटी गठित करने की अनुशंसा करेंगे.



बैचलर डिग्री के मार्फत पेसिफिक यूनिवर्सिटी से पीएचडी
हरिओम सिंह की बैचलर ऑफ लाइब्रेरियन की डिग्री फर्जी होने की शिकायत मिली थी ऐसे में वर्ष 2019 में जांच कमेटी ने कोटा ओपन विश्वविद्यालय से उनके रोल नंबर के अनुसार जानकारी चाही तो कोटा ओपन विश्वविद्यालय ऐसे किसी भी व्यक्ति और रोल नंबर का रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं होने की जानकारी दी. मजे की बात तो यह थी कि हरिओम सिंह ने अपनी बैचलर डिग्री के मार्फत मास्टर ऑफ लाइब्रेरियन का कोर्स भी किया और फिर पेसिफिक यूनिवर्सिटी से इस सब्जेक्ट में पीएचडी भी कर ली है.





Bhupal Nobles University
भर्ती प्रक्रिया अब सवालों के घेरे में आ खड़ी हुई है.




अभ्यर्थियों के दस्तावेजों की जांच भी नहीं

हरिओम सिंह का प्रकरण सामने आने के बाद यह तो स्पष्ट हो गया है कि वर्ष 2013-14 की बीएन विश्वविद्यालय की भर्ती प्रक्रिया उन सभी मानकों पर खरी नहीं उतरी थी जिन्हें किसी भी कर्मचारी को नियुक्ति देने से पहले पूरा करना जरूरी होता है. विश्वविद्यालय ने शायद नियुक्ति पाने वाले अभ्यर्थियों के दस्तावेजों की जांच भी नहीं करवाई थी और यही वजह है कि तब से अब तक हरिओम सिंह अपनी मार्कशीट के जगह नौकरी प्राप्त कर सभी परिलाभ भी लेता रहा है.



विश्वविद्यालय की साख पर सवाल

विश्वविद्यालय का भी मानना है कि नियुक्ति पाने वाले हैं सभी के दस्तावेज फर्जी हो यह जरूरी नहीं है, लेकिन हरिओम सिंह का मामला सामने आने के बाद अब पूरी प्रक्रिया पर सवाल खड़े हो रहे हैं. ऐसे में हरिओम सिंह प्रकरण की जांच कमेटी की सभी सिफारिशों पर कार्य करना जरूरी है, जिससे विश्वविद्यालय की साख पर सवाल खड़े न हो.



ये भी पढ़ें-



सरपंच चुनाव: 10 बजे तक हुई 13% वोटिंग, यहां देखें- राजस्थान पंचायत चुनाव LIVE



2017 बैच के 35 RAS अफसर हुए नियमित, कार्मिक विभाग ने जारी किया आदेश



 
अगली ख़बर

फोटो

टॉप स्टोरीज