Inside Story: वसुंधरा ने अपनी रथयात्रा के लिए तीसरी बार भी चारभुजा को ही क्यों चुना?
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Inside Story: वसुंधरा ने अपनी रथयात्रा के लिए तीसरी बार भी चारभुजा को ही क्यों चुना?
वसुंधरा राजे के फेसुबक पेज पर शेयर रथ (बस) पर लगा यात्रा का लोगो.

सुराज संकल्प और परिवर्तन यात्रा के बाद वसुंधरा राजे 4 अगस्त को एक बार फिर मेवाड़ के चारभूजा से अपनी चुनावी यात्रा का आगाज करने जा रही हैं. बीजेपी की इस राजस्थान गौरव यात्रा को यहां से शुरू करने के पीछे सिर्फ श्रद्धा और आस्था नहीं बल्कि वोट बैंक भी है.

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राजस्थान के चुनावी समर में जीतकर फिर से सत्ता हासिल करने के लिए सत्ताधारी बीजेपी और विपक्ष दोनों पुरजोर कोशिश में लगे हैं. लेकिन जो रास्ता बीजेपी ने चुना है वह सीएम वसुंधरा राजे को पहले भी सत्ता तक लेकर पहुंचा था. हम बात कर रहे हैं राजस्थान गौरव यात्रा और उसके मेवाड़ (चारभुजा) से आगाज की. वसुंधरा के लिए चारभुजा से निकलने वाला रास्ता अब तक दो बार सत्ता के सिंहासन तक पहुंचा है.

सुराज संकल्प और परिवर्तन यात्रा यहीं से निकाली गई थी और बीजेपी ने प्रदेश में भारी बहुमत हासिल करते हुए सत्ता हासिल की थी. इसी उम्मीद से बीजेपी इस बार भी गौरव यात्रा की शुरुआत 4 अगस्त को चारभुजा से कर रही है. लेकिन तीसरी बार भी यहीं से यात्रा के आगाज के पीछे सिर्फ चारभुजा के प्रति श्रद्धा और आस्था नहीं बल्कि एक बड़ी वजह मेवाड़ और यहां की 28 सीटों को साधना भी है.

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राजस्थान में सत्ता का रास्ता मेवाड़ होकर गुजरता है
शक्ति, भक्ति और महाराणा प्रताप के रण कौशल की भूमि मेवाड़ ने प्रदेश को तीन मुख्यमंत्री देकर प्रदेश की सत्ता में धुरी का स्थान बनाया है. यहीं वजह हैं कि प्रदेश के आगामी विधानसभा चुनावों में कांग्रेस और बीजेपी जैसे प्रमुख दलों की उम्मीदें इसी आदिवासी बाहुल्य दक्षिणांचल से जुड़ी हैं. सिर्फ उम्मीद ही नही बल्कि मेवाड़ वागड़ के 6 जिलों की 28 सीटों पर परिणाम सत्ता के शिखर को छुने का स्वर्णिम मार्ग प्रशस्त करने वाले हैं. ऐसे में बीजेपी और कांग्रेस का एजेंडा मेवाड़ को लेकर सर्वाधिक संवेदनशील है.

मेवाड़ ने कब किसको सत्ता दिलाई
वर्ष 1993, मेवाड़ से बीजेपी को 16 सीट, बीजेपी की सरकार
वर्ष 1998, मेवाड़ से कांग्रेस को 23 सीट, कांगेस की सरकार
वर्ष 2003, मेवाड़ में बीजेपी को 21 सीट, बीजेपी की सरकार
वर्ष 2008, मेवाड़ में कांग्रेस को 20 सीट, कांग्रेस की सरकार
वर्ष 2013, मेवाड़ से बीजेपी को 25 सीट, बीजेपी की सरकार


प्रदेश को तीन मुख्यमंत्री देने वाला राजस्थान का दक्षिणांचल, पारंपरिक भाषा में मेवाड़-वागड़ के नाम से जाना जाता है. कहते हैं कि 6 जिलों की 28 सीटों वाले इस क्षेत्र से ही प्रदेश की सत्ता का रास्ता जाता है. शायद यही वजह हैं कि बीजेपी, कांग्रेस और अन्य पार्टियां यहां चुनावी तैयारियों में कोई कसर नहीं छोड़ना चाहती. वर्ष 1998 में कांग्रेस, वर्ष 2003 में बीजेपी, वर्ष 2008 में कांग्रेस, और फिर वर्ष 2013 फिर बीजेपी को मेवाड़ ने सत्ता तक पहुंचाया. ऐसे में इस बार इसी ट्रेंड को लेकर चर्चाओं का दौर जबरदस्त है.

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पिछले विधानसभा चुनावों के आंकड़ों पर नजर डालें तो उदयपुर, राजसमन्द और चित्तौड़गढ़ की कुल 17 सीटों में से 15 पर बीजेपी और 1-1 पर कांग्रेस और निर्दलीय का कब्जा है. वहीं प्रतापगढ़ की दोनों ही सीटें बीजेपी के कब्जे में हैं. इसके इलावा वागड़ अंचल की कुल 9 सीटों में से 8 पर बीजेपी और एक पर कांग्रेस का कब्जा है.
मेवाड़ वासियों की मानें तो मेवाड़ एक साथ करवट बदलता है और एक पार्टी को एक साथ बहुमत दिलाता है. और यही वजह है कि मेवाड़ में बहुमत मिलने वाली पार्टी ही प्रदेश की सत्ता में का​बिज होती है.


मेवाड़ अंचल का ज्‍यादातर हिस्‍सा आदिवासी बहुल भी राजनैतिक पार्टियों को इस ओर आकर्षित करता है. यहां का आदिवासी एक साथ किसी राजनीतिक पार्टी पर विश्वास जताता हैं और उसी के समर्थन में मतदान कर उसे सत्ता के शीर्ष तक पहुंचाने में सहायता करता है. इसी आदिवासी अंचल को अपनी मुट्ठी में करने के लिए कांग्रेस और बीजेपी के आला नेताओं की नजर मेवाड़ पर सदैव सटी रहती है.
इतिहास गवाह हैं कि चुनावी बिगुल जब भी मेवाड़ से बजाया गया तो उस पार्टी को सत्ता के शिखर तक पहुंचने में आसानी हुई है. यहीं वजह हैं कि मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे भी मेवाड़ के तीर्थ स्थलों से चुनावी शुरुआत करने पर विश्वास जताती हैं.


2003 में परिवर्तन यात्रा की शुरुआत वसुंधरा राजे ने चारभुजा नाथ की धरती से की थी, उसके बाद कांग्रेस को समूचे मेवाड़ में धराशाई कर बीजेपी प्रदेश की सत्ता पर काबिज हुई. 2008 में बीजेपी ने मेवाड़ से चुनावी आगाज नहीं किया और ना ही यात्रा का बिगुल बजाया. शायद यहीं वजह रहीं की बीजेपी सत्ता से बाहर हो गई. हालांकि सन 2013 में एक बार फिर चारभुजा की धार्मिक धरा से सुराज संकल्प यात्रा की शुरुआत हुई और बीजेपी 28 में से 25 सीटें जीत कर फिर सरकार बनाने में सफल हो पाई. अब एक बार फिर सीएम राजे चुनावी आगाज राजस्थान गौरव यात्रा के मार्फत मेवाड़ के इसी पवित्र तीर्थ चारभुजा नाथ से करने जा रही है.
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