नगर निकाय प्रमुखों के अधिकार कम करने से बीजेपी नाराज, कटारिया ने CM गहलोत को लिखा पत्र
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नगर निकाय प्रमुखों के अधिकार कम करने से बीजेपी नाराज, कटारिया ने CM गहलोत को लिखा पत्र
नेता प्रतिपक्ष ने मुख्यमंत्री अशोक गहलोत को इस संबंध में पत्र लिखा है. जिसमें 16 जून, 2020 के आदेश को निरस्त करने के लिए हस्तक्षेप करने की मांग की गई है (फाइल फोटो)

बीजेपी ने स्वायत शासन विभाग के आदेश में हस्तक्षेप कर तुरंत आदेश वापस लेने की मांग की है. पार्टी ने इस आदेश को नगर निकाय प्रमुखों को कमजोर करने की दिशा में उठाया कदम बताया है

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उदयपुर. स्वायत शासन विभाग द्वारा नगर निकाय प्रमुखों के लिए 16 जून को जारी हुए आदेश के बाद अब इस पर राजनीतिक बहस शुरू हो गई है. बीजेपी ने इस मामले को लेकर अशोक गहलोत सरकार को घेरने की कोशिश की है. पार्टी ने स्वायत शासन विभाग के आदेश में हस्तक्षेप कर तुरंत आदेश वापस लेने की मांग की है. बीजेपी ने इस आदेश को नगर निकाय प्रमुखों को कमजोर करने की दिशा में उठाया कदम बताया है.

नेता प्रतिपक्ष गुलाबचंद कटारिया ने मुख्यमंत्री अशोक गहलोत को इस संबंध में एक पत्र लिखा है. जिसमें 16 जून, 2020 के आदेश को निरस्त (रद्द) करने के लिए हस्तक्षेप करने की मांग की गई है. पत्र में उन्हें याद दिलाया गया है कि वर्ष 2017 में नगर निकाय प्रमुखों को मजबूत बनाने के लिए नगर निकाय अधिनियम में पंचम संशोधन किया गया था. इस संशोधन में नगर निकाय प्रमुखों को और ज्यादा मजबूत बनाते हुए अधिकारियों और कर्मचारियों पर भी उनका नियंत्रण स्थापित करने का अधिकार प्रदान किए गए थे.

स्वायत शासन विभाग जयपुर द्वारा इस आदेश को लेकर राजनीति गरमा गई है. उस आदेश में नगरीय निकायों के निर्माण एवं अन्य कार्यों से संबंधित पत्रावलीयों के संबंध में निर्देश जारी किए थे. इन आदेशों में नगरीय निकायों के महापौर, सभापति और अध्यक्ष द्वारा किसी भी पत्रावली की मांग किए जाने पर पत्रावली नहीं भेजना और आयुक्त और अधिशासी अधिकारी की अनुमति के बाद ही ऐसी पत्रावली की प्रतिलिपि भेजने के निर्देश दिए थे.



कटारिया ने सीएम गहलोत को लिखे अपने पत्र में आरोप लगाया कि स्वायत शासन विभाग के निदेशक द्वारा जो आदेश जारी किए गए हैं उसकी साफ मंशा निकाय प्रमुखों को कमजोर करने की लग रही है. पत्र के माध्यम से कटारिया ने कहा कि जनता द्वारा चुने गए प्रतिनिधि को शक्तिहीन करने का प्रयास किया जा रहा है. उन्होंने स्थानीय निकाय विभाग द्वारा जारी किए गए पत्र को विधि विरुद्ध बताया. उन्होंने मुख्यमंत्री से नगरपालिका अधिनियम के नियमों एवं बनाए गए कानूनों का हवाला देते हुए जारी पत्र को तुरंत रद्द करने की मांग की.
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