पांच साल से सलाखों के पीछे जी रहा यह बाघ, वजह जानकर रह जाएंगे दंग
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पांच साल से सलाखों के पीछे जी रहा यह बाघ, वजह जानकर रह जाएंगे दंग
वन्यजीव सलाहकार मण्डल सदस्य सुनील मेहता के मुताबिक, इस बाघ को कैद किए जाने का फैसला ही गलत था.

T24 को रणथंभौर में सबसे ज़्यादा नज़र आने वाले बाघ के रूप में जाना जाता था. बाघ प्रेमी इसके रुआबदार चेहरा और मस्तानी चाल के दीवाने थे.

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जयपुर. रणथंभौर (Ranthambore) के सबसे मशहूर बाघ T24 उर्फ उस्ताद को कैद में आज 5 साल पूरे हो गए हैं. पिछले पांच साल से ये जंगली बाघ एक ऐसी सजा भुगत रहा है जिसकी न मियाद नजर आ रही है और न ही कोई वजह. नेशनल टाइगर कन्जर्वेशन अथॉरिटी से लेकर, कई वन मंत्री और अधिकारी बाघ T24 की रिहाई की बात कह चुके हैं. लेकिन आज तक कुछ नहीं हुआ. पांच साल पहले जब इस बाघ को कैद कर रणथंभौर टाइगर रिजर्व से उदयपुर (Udaipur) के सज्जनगढ़ बायोलॉजिकल पार्क भेजा गया था तो मामला हाइकोर्ट से लेकर सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा था. लेकिन मामला धीरे-धीरे पेचीदा होता गया और सभी अदालतों ने फैसला वन विभाग पर छोड़ दिया कि ये आप तय करें कि बाघ का भविष्य क्या होगा.

हालांकि, NTCA ने वन विभाग को कई बार पत्र लिखकर बाघ को लेकर विचार करने पर कहा, क्योंकि NTCA के मुताबिक जंगली बाघ को कैद में रखना सही नहीं है.  अभी तक कई कमेटी भी बनाई गई और बैठकें भी हुईं. लेकिन आज तक बाघ के भविष्य पर कोई फैसला नहीं हुआ. बाघ को लेकर पिछले पांच साल से संघर्ष कर रहीं समरत संधू का कहना है कि बाघ को लेकर हमारी कोशिशें जारी हैं. वहीं, वन्यजीव सलाहकार मंडल सदस्य धीरेंद्र गोधा का कहना है कि उस्ताद ने हमेशा रणथम्भौर पर राज किया, उसका दबदबा कायम रहा. ऐसे बाघ को आज़ाद होना चाहिए. क्योंकि कैद में मौजूद कई बाघ भी एक जंगली बाघ के मुकाबले कुछ नहीं है. पर्यावरण और प्रकृति के लिए जंगली बाघ ज़्यादा ज़रूरी है. ऐसे में T24 को आज़ाद किया जाना चाहिए.

पहले ये गलत फैसला किया गया
वन्यजीव सलाहकार मण्डल सदस्य सुनील मेहता के मुताबिक, इस बाघ को कैद किये जाने का फैसला ही गलत था. पहले ये गलत फैसला किया गया और उससे भी गलत ये कि इस गलती को सुधारने में इतना लंबा समय लगा दिया है. इस बाघ से पूरी दुनिया के बाघ प्रेमियों की इमोशनल बॉन्डिंग भी है. ऐसे में उम्मीद है जल्दी ही बाघ आज़ाद होगा और उसे प्राकृतिक जंगल में छोड़ा जाएगा.
4 लोगों को मारने का इल्जाम में कैद


T24 को रणथंभौर में सबसे ज़्यादा नज़र आने वाले बाघ के रूप में जाना जाता था. इसका रुआबदार चेहरा और मस्तानी चाल के बाघ प्रेमी दीवाने थे. लेकिन इसका इलाका इंसानी बस्ती और मानवीय गतिविधियों के आस पास होने के कारण इसका इंसानों से बहुत ज़्यादा टकराव रहा. घमंडी सैनी, अशफ़ाक़ अंसारी, घीसू सिंह और रामपाल सैनी की मौत बाघों के हमले में हुई और इसके लिए T24 को जिम्मेदार ठहराया गया. लेकिन किसी बाघ को 2010 से 2015 के बीच पांच साल में 4 लोगों को मारने का जिम्मेदार बताते हुए आदमखोर नहीं कहा जा सकता था. क्योंकि आदमखोर बाघ लगातार इंसानों पर हमले करते हैं. जबकि T24 ने ऐसा नहीं किया. उसके द्वारा सिर्फ अपनी टेरिटरी का बचाव किया जा रहा था. वह विभाग ने 16 मई 2015 को बाघ मैन किलर टाइगर घोषित करते हुए ये कह कर कैद में डाल दिया कि इस बाघ में इंसानों का डर निकल गया है. तब से लेकर लगातार इसकी कैद का विरोध किया गया और आज तक रिहाई की कोशिशें जारी हैं.

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