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घर में स्टूडियो बनाकर इन 2 जुड़वां बच्चों ने बना दी हॉलीवुड स्टाइल फिल्म

घर में स्टूडियो बनाकर इन 2 जुड़वां बच्चों ने बना दी हॉलीवुड स्टाइल फिल्म

फोटो-(ईटीवी)

फोटो-(ईटीवी)

ना तो एक्टिंग का कोर्स किया और ना ही डायरेक्शन का. विजुअल इफेक्ट भी सीखने नहीं गए. सिर्फ फिल्में देख कैमरा उठाया. खुद से सीखते गए और फिल्म 'द एडवेंचर ऑफ पलचिनगिरी बिगिन्स' बना दी.

करिश्मों को अंजाम देने के लिए उम्र की कोई सीमा नहीं होती है. कुछ अलग हट कर करने की चाह, आंखों में सपने, रंगों में जोश, जुनूनी सोच, कुछ कर गुजरने की आजादी, हौसला अफजाई करने के लिए माता-पिता और गुरुजनों का साथ मिले तो क्या नहीं हो सकता है. कुछ ऐसे ही अपने सपनों के पंखो पर उड़ान भरी है लेकसिटी के सीडलिंग स्कूल में पढ़ने वाले दो जुड़वां भाइयों ने.

ना तो एक्टिंग का कोर्स किया और ना ही डायरेक्शन का. विजुअल इफेक्ट भी सीखने नहीं गए. सिर्फ फिल्में देख कैमरा उठाया. खुद से सीखते गए और फिल्म 'द एडवेंचर ऑफ पलचिनगिरी बिगिन्स' बना दी. फिल्म भी हालीवुड की तर्ज पर साइंस फिक्शन है. कहनी भले ही फिल्मी लगे, पर हकीकत है



फिल्म में 3 लोगों ने किया अभियन
उदयपुर के 16 साल के दो जुड़वां भाई पल और चिन वर्धमान की उम्र भले ही फिल्म देखने की हो, लेकिन वे एक्टर-डायरेक्टर बन गए हैं. स्कूल में पढ़ने वाले जुड़वां बच्चे पल और चिन ने विजुअल इफेक्ट्स से लैस फिल्म द एडवेंचर ऑफ पलचिनगिरी बिगिन्स' का निर्माण किया है.

फिल्म में पल-चिन और उनकी मां मंजू वर्धमान ने अभिनय किया है. फिल्म का 90 फीसदी निर्माण घर पर ही हुआ. फिल्म के क्रू में पल-चिन और उनकी मां मंजू केवल तीन सदस्य ही हैं.

फिल्म में खुद किए ये काम
निर्देशन, विजुअल इफेक्ट्स, एनिमेशन, सिनेमेटोग्राफी पल-चिन ने किया है. सिर्फ म्यूजिक इफेक्ट्स का काम मुंबई में करवाया गया है. पल-चिन का कहना है कि हमारा दिल हिंदी फिल्मों के लिए धड़कता है और दिमाग हॉलीवुड की तरफ है. वे ऐसी फिल्मों का निर्माण करना चाहते हैं जिसमें भावनाओं के साथ तकनीक का संगम हो.



 

ट्यूशन पढ़कर दी 8वीं और 9वीं की परीक्षा
सीडलिंग मॉडर्न पब्लिक स्कूल में पढ़ने वाले छात्र पल और चिन वर्धमान ने छोटी सी उम्र में विसुअल इफेक्ट्स से लैस हाईफाई साइंस फंतासी पर फिल्म बना कर देश के करोड़ों नौजवानों के सामने मिसाल पेश की है.

पल-चिन की कामयाबी का श्रेय सबसे ज्यादा उनके माता-पिता को है, जिन्होंने उनकी प्रतिभा को पहचाना. इस दौरान स्कूल ने भी बखूबी साथ दिया. 8वीं और 9वीं में वे स्कूल नहीं गए. सीडलिंग मॉडर्न पब्लिक स्कूल ने उन्हें सिर्फ ट्यूशन पढ़कर परीक्षा देने की इजाजत दी.

51 मिनट की बनाई फिल्म
पल-चिन की यह फिल्म विश्वस्तर के कई अवॉर्ड भी जीत चुकी है तो वहीं चिल्ड्रन्स डे पर भी यह फिल्म बच्चों को दिखाई गई थी. जब इस फिल्म का निर्माण किया गया तो यह तीन घंटे की बन कर सामने आई, लेकिन उसे बाद में एडिट करते हुए 51 मिनट में समेटा गया.

मंजू का कहना है कि हम हॉलीवुड स्तर की फिल्म बनाना चाहते थे. हम सीखने के नजरिए से फिल्म देखते हैं.



घर को स्टूडियो बनाकर की शूटिंग
हॉलीवुड और बॉलीवुड फिल्मों को बनाने में सैंकड़ों की संख्या में क्रू मेंबर शामिल होते हैं, लेकिन पल-चिन की इस फिल्म में महज तीन लोगों ने सैंकडों क्रू मेंबर की भूमिका अदा की. जिसमें केमरामेन, लाइटमेन, एक्टर और डायरेक्टर की भूमिका में पल-चिन और उनकी मां मंजू वर्धमान ही रहे.

अपने घर को स्टूडियो बनाकर की गई इस शूटिंग के बाद जब फिल्म बनकर सामने आई तो इसे देखने वालों ने ना सिर्फ इन बच्चों के काम की तारिफ की बल्कि फिल्म में काम में लिए गए इफेक्ट के बारे में आश्चर्य भी जताया.

महज 11 दिन पहले यह फिल्म यू ट्यूट पर रिलीज की गई और छोटे से समय में करीब सात हजार लोग और ट्रेलर को 63 हजार लोग देख चुके हैं.

Tags: Rajasthan news, Udaipur news

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