Udaipur World Music Festival-2020: तीन दिन तक बही वैश्विक संगीत की स्वर लहरियां

इस फेस्टिवल में स्पेन, फ्रांस, स्विट्जरलैंड, कुर्दिस्तान, ईरान/लेबनान, पुर्तगाल और भारत सहित दुनिया के 20 देशों के 150 से अधिक संगीतज्ञ शामिल हुए.

इस फेस्टिवल में स्पेन, फ्रांस, स्विट्जरलैंड, कुर्दिस्तान, ईरान/लेबनान, पुर्तगाल और भारत सहित दुनिया के 20 देशों के 150 से अधिक संगीतज्ञ शामिल हुए.

भारत (India) के सबसे बड़े विश्व संगीत महोत्सव ‘उदयपुर वर्ल्ड म्यूजिक फेस्टिवल-2020’ (Udaipur World Music Festival) के 5वें संस्करण का रविवार को रंगारंग समापन (Colorful ending) हुआ. महोत्सव के तहत 3 दिन तक लेकसिटी में वैश्विक संगीत (Global music) की स्वर लहरियां बहती रही.

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उदयपुर. भारत (India) के सबसे बड़े विश्व संगीत महोत्सव ‘उदयपुर वर्ल्ड म्यूजिक फेस्टिवल-2020’ (Udaipur World Music Festival) के 5वें संस्करण का रविवार को रंगारंग समापन (Colorful ending) हुआ. महोत्सव के तहत 3 दिन तक लेकसिटी में वैश्विक संगीत (Global music) की स्वर लहरियां बही. समापन समारोह रविवार को गांधी ग्राउंड पर हुआ. इसमें में नई दिल्ली के अदवैता ने अपने बैंड के साथ इंडी फ्यूजन प्रस्तुत किया. उन्होंने ‘मोरा सैयां मोसे बोले ना’ और ‘छनन छनन बाजे’ गीतों को प्रस्तुत किया. इसके बाद बॉलीवुड पार्श्व गायक, गीतकार और संगीतकार निकिता गांधी ने बॉलीवुड गीत प्रस्तुत किया. फेस्टिवल का समापन स्पेन के ओक्स ग्रासेस की स्पेनीश पॉप पर प्रस्तुति के साथ हुआ.

सुबह फेस्टिवल की शुरुआत शास्त्रीय गायन से हुई

इससे पहले अंतिम दिन रविवार को माजी का घाट, अंबराई घाट पर सुबह फेस्टिवल की शुरुआत शास्त्रीय गायक रवि जोशी ने भक्ति संगीत प्रस्तुत के साथ की. उन्होंने सुबह के राग बिलासखानी तोड़ी और मियांजी की तोड़ी में रचनाएं प्रस्तुत कीं. ये बादशाह अकबर के प्रसिद्ध दरबारी संगीतज्ञ मियां तानसेन के पुत्र बिलसखान द्वारा बनाए गए पारंपरिक राग हैं जो करुणा के मूड को दर्शाते हैं. इस दौरान रवि ने राग बहार में भी रचना पेश की जिसमें वसंत के मौसम का स्वागत करते हुए हर्षित मनोदशा को दर्शाया गया है. उन्होंने पंडित कुमार गंधर्व के निर्गुण भजन द्वारा अपने गायन का समापन किया. इसके पश्चात मिको केंडीस ने कुर्दिस्तान क्षेत्र का संगीत प्रस्तुत किया. उनके संगीत में कुर्द लोगों की कहानी, गीत, महाकाव्य और पौराणिक कथा थी. उनके संगीत को दर्शकों ने बहुत पसंद किया.

दोपहर के कार्यक्रम फतहसागर पाल पर हुए
फतहसागर पाल पर दोपहर को कार्यक्रम की शुरूआत पक्षी ने हिंदी पॉप फ्यूजन से की. इसमें मलयालम और हिंदी मिक्स गीत प्रस्तुत किये गए। उन्होंने ‘पग में बांधे घुंघरू’, ‘क्यों तू न बोले खुद से’, ‘जोगी’ तथा ‘बलमा’ गीत प्रस्तुत कर दर्शकों की खूब वाहवाही लूटी. इसके बाद रूस के ‘सत्तूमा’ ने रूस का फोक करेलियन संगीत प्रस्तुत किया. उन्होंने फि़निश भाषा में फिनलैंड के गाने ‘कंट्री गाए’ और ‘यस ऑफ़ कोर्स’ गाते हुए श्रोताओं को आकर्षित किया. अंतिम प्रस्तुति अरुणाचली म्यूजिकल प्रिंस तबा चाके की हुई. उन्होंने दर्शकों को अपने पॉप संगीत से मंत्रमुग्ध कर दिया. ताबा ने ‘इन वादियों’, ‘मॉर्निंग सन’, ‘मेरी दास्तान’ और ‘दिस इज़ द डे’ जैसे खूबसूरत गीत प्रस्तुत किये. उल्लेखनीय है कि इस फेस्टिवल में स्पेन, फ्रांस, स्विट्जरलैंड, कुर्दिस्तान, ईरान/लेबनान, पुर्तगाल और भारत सहित दुनिया के 20 देशों के 150 से अधिक संगीतज्ञ शामिल हुए.

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