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केन्द्रीय मंत्री गजेन्द्र सिंह शेखावत का बड़ा बयान- अब किसान नहीं नक्सलवादी ताकतें चला रही हैं आंदोलन

केंद्रीय मंत्री ने किसान आंदोलन को लेकर बड़ा बयान दिया है. (प्रतीकात्‍मक तस्‍वीर-AP)
केंद्रीय मंत्री ने किसान आंदोलन को लेकर बड़ा बयान दिया है. (प्रतीकात्‍मक तस्‍वीर-AP)

Farmers Protest: केन्द्रीय जलशक्ति मंत्री गजेन्द्र सिंह शेखावत (Gajendra Singh Shekhawat) ने कहा कि स्वामीनाथन आयोग द्वारा कृषि रिफॉर्म हेतु 102 सुझाव दिए गए थे, जिनमें से सौ सुझावों को मोदी सरकार (Modi Government) ने लागू कर दिया है.

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उदयपुर. केन्द्रीय जलशक्ति मंत्री गजेन्द्र सिंह शेखावत (Gajendra Singh Shekhawat) ने आज उदयपुर दौरे के दौरान राज्य की कांग्रेस सरकार के अर्न्तकलह पर मारवाड़ी भाषा में तंज कसा. मंत्री ने कहा, 'धणी लुगाई री लड़ाई में पड़ोसी री पीटाई करों, यो तो नी चाले.' दरअसल मुख्यमंत्री अशोक गहलोत (CM Ashok Gehlot) द्वारा राज्य में सरकार अस्थिर करने के बीजेपी पर लगाये गये आरोपों के सवाल पर केन्द्रीय मंत्री जवाब दे रहे थे. केन्द्रीय मंत्री ने कहा कि लोकतांत्रिक सरकार पूरे पांच साल चलनी चाहिये, लेकिन पहले भी इस सरकार के विधायक गायब रहे और इसका आरोप बीजेपी पर लगाया जाता रहा. अंत में सारी सच्चाई सामने आ गई. उन्होंने कहा कि ये सरकार अपने कर्मों से गिरती है, तो इसमें बीजेपी दोषी नहीं हो सकती है.

किसान बिल पर केन्द्र सरकार की ओर से रूख स्पष्ट करने उदयपुर पहुंचे मंत्री गजेन्द्र सिंह शेखावत ने कहा कि अब किसान आन्दोलन किसानों के हाथ से निकल गया है. अब इसे माओवादी और नक्सलवादी ताकतें चला रही हैं. केंद्रीय मंत्री ने कहा कि स्वामीनाथन आयोग द्वारा कृषि रिफॉर्म हेतु 102 सुझाव दिए गए थे, जिनमें से सौ सुझावों को मोदी सरकार ने लागू कर दिया है. जब स्वामीनाथन आयोग ने 2006 में रिपोर्ट दे दी थी, तो 2010 तक कांग्रेस सरकार उन्हें लागू करने का साहस नहीं दिखा पाई.

केंद्रीय मंत्री ने कहा कि देश सब कुछ देख व समझ रहा है. 50 से 100 फीसदी एमएसपी बढ़ाने का काम भाजपा सरकार ने किया, लेकिन इसे भी सरकार किसानों हेतु पर्याप्त नहीं मानती. किसान सामूहिक रूप से एक साथ मिलकर काम करें तभी बल्क में फसल के अच्छे दाम के लिए नेगोशिएट कर सके. इस हेतु किसानों के एफपीओ बनाने की योजना सरकार की है. कृषि क्षेत्र में परिवर्तन के लिए मोदी सरकार काम कर रही है, परंतु विपक्षी दल उसमें बाधा बन रहे हैं.



'आंखें मूंदकर विरोध'’ नहीं करना चाहिए विरोध
इससे पहले केंद्रीय गृह राज्य मंत्री किशन रेड्डी ने सोमवार को कहा कि किसानों और राजनीतिक दलों को कृषि कानूनों का 'आंखें मूंदकर विरोध'’ नहीं करना चाहिए और न ही उन्हें निरस्त करने की मांग करनी चाहिए, बल्कि उनका विस्तृत अध्ययन करना चाहिए क्योंकि केंद्र उनकी चिंताओं को दूर करने के लिए तैयार है. रेड्डी ने कहा कि केंद्र द्वारा लाए गए कानून सार्वजनिक रूप से उपलब्ध हैं और किसान उनसे या किसी किसी से भी कभी भी स्पष्टीकरण मांग सकते हैं.

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'किसानों को 'उकसाने' तथा बदनाम करने का प्रयास किया जा रहा'
उन्होंने कहा कि राजग सरकार ने किसानों और उनके मुद्दों का समर्थन कर रहे संगठनों से संपर्क करने का फैसला किया क्योंकि ऐसे कुछ लोग जो राजनीतिक रूप से भाजपा और प्रधानमंत्री का मुकाबला करने में असमर्थ थे, वे किसानों को 'उकसाने' तथा बदनाम करने का प्रयास कर रहे थे.

उन्होंने कहा कि NDA सरकार ने कृषि क्षेत्र में बिजली और उर्वरकों की कमी जैसी समस्याओं को दूर करने की कोशिश की है. इसके अलावा किसानों के लिए मिट्टी (सॉयल) स्वास्थ्य कार्ड, फसल ऋण, फसल बीमा, ई-नाम जैसी पहल की गयी है तथा न्यूनतम समर्थन मूल्य में वृद्धि की जा रही है. रेड्डी ने दावा किया कि पंजाब को छोड़कर पूरे देश में किसानों ने नए कृषि कानूनों का स्वागत किया है.
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