उदयपुर: वैक्सीनेशन टीम को बुजुर्ग महिला ने लट्ठ दिखाकर भगाया, धमकाते हुए घर से बाहर निकाला

उदयपुर में कोरोना का टीका लगाने गई टीम को महिला ने लट्ठ दिखाकर भगा दिया.

उदयपुर में कोरोना का टीका लगाने गई टीम को महिला ने लट्ठ दिखाकर भगा दिया.

उदयपुर में कोरोना का टीका लगाने गई टीम को एक बुजुर्ग महिला ने लट्ठ दिखाकर धमकाकर भगा दिया. टीका लगाने के लिए महिला ने पहले तो बहाना बनाया और फिर डंडा लेकर टीम को घर से बाहर निकाल दिया.

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उदयपुर. राजस्थान के उदयपुर के ग्रामीण इलाकों में अभी भी कोरोना वैक्सीन (Corona vaccine) को लेकर भ्रम बना हुआ है. उदयपुर जिले के आदिवासी बाहुल्य क्षेत्र (tribal dominated area) में भी ग्रामीण भयभीत हैं और यही वजह है कि यहां वैक्सीनेशन का प्रतिशत बहुत कम है. ऐसा ही एक वाकया उदयपुर के गोगुंदा ब्लॉक में टीकाकरण शिविर (Vaccination Center) के दौरान नजर आया. करदा ग्राम पंचायत में टीम के सदस्य ग्रामीणों को घर घर बुलाने पहुंचे, जहां एक महिला ने टीका लगाने का अनुरोध करने वाले पंचायत सहायक को लट्ठ से डरा धमकाकर भगा दिया. पंचायत सहायक ने महिला को जब कहा की बाई टीका लगाने चलो तो महिला ने पहले तो बहाना बनाया और फिर डंडा लेकर टीम को घर से बाहर निकाल दिया.

गोगुंदा के 16 ग्राम पंचायतों में वैक्सीनेशन शिविर का आयोजन किया गया था. इस दौरान पंचायत सहायक कालू सिंह और लोकेश नागदा घर घर जाकर जागरूकता का संदेश देते हुए लोगों को टीका लगाने के लिए प्रेरित कर रहे थे. तभी एक बुजुर्ग महिला के घर भी पहुंचे और महिला से टीका लगाने चलने का अनुरोध किया, लेकिन महिला आनाकानी करने लगी. टीम ने समझाया की बीमारी से बचने के लिए टीका जरूरी है लेकिन बुजुर्ग महिला ने डंडा अपने हाथ में ले लिया और टीम के सदस्यों को डंडा मारने की धमकी देकर बाहर भगा दिया.

बुजुर्ग महिला को बार बार समझाने के बावजूद टीकाकरण के लिए तैयार नहीं हुई. टीम के सदस्यों ने बीमारी से बचने के लिए टीकाकरण को जरूरी बताते हुए महिला को समझाया लेकिन महिला आनाकानी करने के बाद लट्ठ लेकर दरवाजे तक आ गई. समझाने के लिए पहुंची टीम के सदस्यों को घर से भगा दिया. ऐसा आदिवासी इलाकों में पहली बार नहीं हुआ है, इससे पहले भी कुछ गांव में लोगों ने टीम को टीका लगवाने से मना करते हुए भगा दिया था. आदिवासी अंचल में लोगों में टीकाकरण को लेकर भ्रम अभी भी बरकरार है. हालांकि जिला प्रशासन के साथ स्थानीय जनप्रतिनिधि भी समझाने की कोशिश कर रहे हैं लेकिन पूरी तरह से सफलता नहीं मिल रही.

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