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वैलेंटाइन डे स्पेशल: अनूठा होता है सारस के जोड़े का प्यार, एक के वियोग में दूसरा दम तोड़ देता है
Udaipur News in Hindi

Kapil Shrimali | News18 Rajasthan
Updated: February 14, 2020, 1:32 PM IST
वैलेंटाइन डे स्पेशल: अनूठा होता है सारस के जोड़े का प्यार, एक के वियोग में दूसरा दम तोड़ देता है
सारस पक्षी को प्रेम और समर्पण का प्रतीक मानते हैं. यह पक्षी अपने जीवनकाल में मात्र एक बार जोड़ा बनाता है. जोड़ा बनाने के बाद सारस युगल जीवनभर साथ रहते हैं.

परिंदें (Birds) भी प्यार का इज़हार करते हैं. बात जब आदर्श दाम्पत्य जीवन के प्रतीक और रामायण की रचना के प्रेरणा स्रोत क्रोंच पक्षी यानि सारस क्रेन (Stork cranes) की हो तो बात ही कुछ और हो जाती है. सारस को प्यार के परिंदों (Love birds) के रूप में पहचाना जाता है.

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उदयपुर. परिंदें (Birds) भी प्यार का इज़हार करते हैं. बात जब आदर्श दाम्पत्य जीवन के प्रतीक और रामायण की रचना के प्रेरणा स्रोत क्रोंच पक्षी यानि सारस क्रेन (Stork cranes) की हो तो बात ही कुछ और हो जाती है. सारस को प्यार के परिंदों (Love birds) के रूप में पहचाना जाता है. सारस हमेशा अपने जोड़े (Couple) के साथ रहता है और पूरी जिंदगी एक दूसरे का साथ निभाया जाता है. सारस के जोड़े का प्यार और उनके प्यार की मजबूती हर उस तालाब के किनारे देखी जा सकती है, जहां उनकी मौजूदगी रहती है.

इनकी कहानी भी किसी रोमांटिक फिल्मी कहानी से कम नहीं है
प्यार के इन परिंदों की कहानी भी किसी रोमांटिक फिल्मी कहानी से कम नहीं है. सारस के जोड़े में प्यार की मजबूती इतनी ज्यादा होती है कि जब एक सारस दम तोड़ देता है तो दूसरा उसके वियोग में मर जाता है. आम तौर पर एक के वियोग में दूसरे के दम तोड़ने की कहानी सिर्फ फिल्मों में देखने को मिलती है, जबकि परिंदों का यह जोड़ा प्यार की इन कहानियों को असल जिंदगी में जीता है. निष्छल प्रेम की प्रतिमूर्ति सारस क्रेन की पहचान विश्व में उड़ने वाले सबसे बड़े पक्षी के रूप है. सारस भले ही बोलकर अपने प्यार का इजहार नहीं कर सकता है, लेकिन वे अपने जोड़े के साथ जिंदगीभर हर मुश्किल समय में दूसरे के साथ खड़े रहते हैं.

रामायण का जन्मदाता पक्षी है सारस



सारस पक्षी का अपना विशिष्ट सांस्कृतिक महत्व भी है. विश्व के प्रथम ग्रंथ रामायण के प्रथम श्लोक का श्रेय सारस पक्षी को जाता है. रामायण का आरंभ एक प्रणयरत सारस-युगल के वर्णन से होता है. प्रातःकाल की बेला में जब महर्षि वाल्मीकि सारस युगल को देख रहे थे तभी एक शिकारी द्वारा इस जोड़े में से एक सारस की हत्या कर दी जाती है. जोड़े का दूसरा पक्षी उसके वियोग में अपने प्राण दे देता है. ऋषि उस शिकारी को को श्राप देते हैं और उनके द्वारा दिए गए श्राप की ये दो पंक्तियां विश्व के महानतम ग्रंथ रामायण की प्रथम पंक्तियां बनती हैं.

इनके पंखों का फैलाव 250 सेमी. (8.5 फीट) तक होता है
सारस का औसत भार 7.2 किलो ग्राम तक होता है. इनकी लंबाई 176 सेमी. (5.6 - 6 फीट) तक हो सकती है. इनके पंखों का फैलाव 250 सेमी. (8.5 फीट) तक होता है. अपने इस विराट आकार के कारण इसको धरती के सबसे बड़े उड़ने वाले पक्षी की संज्ञा दी गई है. नर और मादा में ऐसा कोई साफ फर्क दिखाई नहीं देता है, लेकिन जोड़े में मादा को इसके अपेक्षाकृत छोटे शरीर के कारण आसानी से पहचाना जा सकता है.

 

 

विश्वभर में सारस की 8 प्रजातियां पाई जाती हैं
पूरे विश्व में इसकी कुल 8 प्रजातियां पाई जाती हैं. इनमें से 4 भारत में पाई जाती हैं. पांचवी साइबेरियन क्रेन भारत में से वर्ष 2002 में ही विलुप्त हो गई थी. भारत में सारस पक्षियों की कुल संख्या लगभग 5 से 10 हजार तक ही है.

आदर्श युगल होते हैं सारस
पक्षी प्रेमी कमलेश शर्मा ने बताया कि इस पक्षी को प्रेम और समर्पण का प्रतीक मानते हैं. यह पक्षी अपने जीवनकाल में मात्र एक बार जोड़ा बनाता है. जोड़ा बनाने के बाद सारस युगल जीवनभर साथ रहते हैं. यदि किसी कारण से एक साथी की मृत्यु हो जाती है तो दूसरा बहुत सुस्त होकर खाना पीना बंद कर देता है जिससे प्रायः उसकी भी मृत्यु हो जाती है.

 

 

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First published: February 14, 2020, 1:27 PM IST
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