औरत दस हाथों वाली दुर्गा है, बच्‍चा भी पैदा कर देगी, मंगलयान भी भेज देगी

मंगल मिशन का ‘महिला मंडल’

मंगल मिशन का ‘महिला मंडल’

फिल्‍म खत्‍म हो जाएगी, लेकिन आपको ढंग से पता नहीं चलेगा कि साइंस लैब में औरतों ने काम क्‍या किया. लेकिन आपको ये जरूर पता चल जाएगा कि कौन शादीशुदा है, कौन बच्‍चों वाली है, कौन बच्‍चे वाली होने वाली है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: August 19, 2019, 2:46 PM IST
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आजादी की 72वीं सालगिरह पर बॉलीवुड का मंगल मिशन पूरा हो गया. फिल्‍मी दुनिया में राष्‍ट्रभक्ति की अलख जगाने वाले अक्षय कुमार ने पहले तो मिशन मंगल की जनाना टीम को ‘मंगल महिला मंडल’ बुलाया, फिर भरपाई के लिए बीच-बीच में उनके जनाना गुणों के गुण गाए. ऐसे गुण जो जनाने होने के बावजूद गणित के सवाल चुटकियों में हल कर लेते हैं. आखिर के दस मिनट जनता देशभक्ति में नहाई सांसें रोके, दिल थामे, आंखों में आंसू भरे सिनेमा हॉल की कुर्सी पर ऐसी बेचैन थी कि जैसे अचानक कुर्सियों पर कांटे उग आए हैं. पिछवाड़े उठ खड़े होने और एक पर एक धरी हथेलियां बस बज उठने को तैयार थीं. यहां से यान रॉकेट हुआ और हॉल तालियों से गूंज उठा. वैसे जो इस पूरे दौरान आपको समझ नहीं आया, वो ये था कि ये खुशी किस बात की थी. मिशन सफल हो गया था, इस बात की या फिल्‍म देखने के दौरान हुए इस इलहाम की कि ये कम तो हमारे दफ्तर के दस लोगों की टीम मिलकर भी कर सकती थी.

सचमुच, मंगल मिशन देखकर आपको यही समझ आता है कि विज्ञान बाएं हाथ का खेल है. इतना असान कि पूडि़यां तलते, गाना गाते, झाडू लगाते, मार-पिटाई करते, सेक्‍स करते, दारू पीते, चिल करते और मंगलदोष दूर करने के उपाय ढूंढते हुए यूं चुटकियों में भेजा जा सकता है. स्‍पेस साइंस पर बनी फिल्‍म में पांच लाइन भी ढंग की स्‍पेस साइंस के बारे में नहीं है. स्‍पेस साइंस तो क्‍या, किसी भी साइंस के बारे में नहीं है. इस फिल्‍म में उतना ही साइंस है, जितना होम साइंस में साइंस होता है. मतलब अगर अपना रॉकेट इतना ताकतवर नहीं है कि एक ही बार में रॉकेट जैसे दनदनाते हुए मंगल की कक्षा में पहुंच जाए तो ईंधन बचाने के लिए इंजन बंद कर देते हैं. वैसे ही जैसे औरतें गैस बंद करके गर्म तेल में पूडि़यां तल लेती हैं. बीच-बीच में इंजन बंद कर देंगे तो कम संसाधनों में ज्‍यादा नतीजे पाएंगे.



अब कुछ बातें फिल्‍म की ‘मंगल महिला मंडल’ की. बॉलीवुड मिसोजेनी से भरा है, बॉलीवुड सेक्सिस्‍ट है, अब इस बात पर ज्‍यादा आपत्ति नहीं होती. सेक्सिस्‍ट तो है ही सेक्सिस्‍ट. पता है हमें. रहो तुम अपने गड्ढे में. आपत्ति तो तब होती है, जब सेक्सिस्‍ट प्रोग्रेसिव होने का दिखावा करने लगे. असल मंगल मिशन के पीछे असल महिला वैज्ञानिकों की असल मेहनत थी. लेकिन उस असल मेहनत की फिल्‍मी कहानी लिखने बैठे मर्दों से एक भी महिला का कैरेक्‍टर या भूमिका ढंग से लिखी नहीं गई. अक्षय कुमार का महिला मंडल, सचमुच किसी मुहल्‍ले की दुर्गापूजा कमेटी का महिला मंडल ही नजर आता है. वो न स्‍क्रीन पर ढंग से दिखाई देती हैं, न ढंग का एक वाक्‍य बोलती हैं. उनके कैरेक्‍टर की डीटेलिंग भी उनके वैज्ञानिक होने या उनके काम से ज्‍यादा उनके रिश्‍तों से डिफाइन होती है. फिल्‍म खत्‍म हो जाएगी, लेकिन आपको ढंग से पता नहीं चलेगा कि साइंस लैब में औरतों ने काम क्‍या किया. लेकिन आपको ये जरूर पता चल जाएगा कि कौन शादीशुदा है, कौन बच्‍चों वाली है, कौन बच्‍चे वाली होने वाली है. कौन प्रेम में डूबी है, कौन प्रेम की मारी है. कौन यहां वहां सेक्‍स करती घूम रही है, लेकिन मुहब्‍बत में पड़ते ही अपने प्रेमी की प्रॉपर्टी बन जाती है. महिला मंडल की प्रेग्‍नेंट महिला के वजन का मजाक भी उड़ा दिया, लेकिन उसे मैटरनिटी लीव नहीं दी.
हमारे देश में औरतें या तो कुछ नहीं हैं, या दस हाथों वाली दुर्गा हैं. बच्‍चा भी पैदा कर देंगी, मंगलयान भी भेज देंगी.

जड़बुद्धि तर्कों से हर चीज को सिर्फ काले या सफेद में देखने वालों के लिए यहां यह साफ कर देना जरूरी है कि आपत्ति महिला वैज्ञानिकों को थोड़ा घरेलू, थोड़ा पारंपरिक दिखाए जाने से नहीं है. आपत्ति वैज्ञानिकों को वैज्ञानिक न दिखाए जाने से है. मंगलयान भेजना लड्डू नहीं है कि औरतें घर में पूजा करके, पूड़ी तलकर दफ्तर आईं, बटन दबाया और रॉकेट भेज दिया. मेहनत लगी होगी, काम किया होगा, विज्ञान में जिंदगी खपाई होगी. फिल्‍म लिखने वाले और कुछ नहीं तो कम से कम अपनी स्क्रिप्‍ट में उन औरतों के लिए चार लाइनें विज्ञान को समझते-समझाते हुए ही लिख दिए होते. कुछ तो फील आता कि हां, ये साइंटिस्‍ट हैं.

बकौल अक्षय कुमार, मंगल मिशन का महिला मंडल और कुछ भी हो, लेकिन वैज्ञानिक तो किसी कोण से नहीं है. बॉलीवुड को या तो महिला चरित्रों को ढंग से लिखने की तमीज हासिल करनी चाहिए या फिर ये प्रोग्रेसिव, समझदार, नॉन सेक्सिस्‍ट, औरतों को बराबरी की नजर से देखने वाला होने क का दिखावा बंद कर देना चाहिए. इससे अच्‍छा आप उनके लिए आइटम सांग और लव सिचुएशन ही लिखें. कम से कम खुद के साथ और हमारे साथ ज्‍यादा ईमानदार तो होंगे.

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