छुट्टी से लौट रहा आर्मी कैप्टन ट्रेन से लापता

सेना की कलसियां बटालियन आठ सिखलाई यूनिट के कैप्टन शिखर दीप छुट्टी पर अपने घर कटिहार गए थे और वापस दिल्ली रवाना होने के बाद से लापता हैं...

  • News18India
  • Last Updated: February 10, 2016, 11:01 PM IST
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नई दिल्ली। सेना की कलसियां बटालियन के एक कैप्टन के लापता होने की खबर सामने आई है। सेना की कलसियां बटालियन आठ सिखलाई यूनिट के कैप्टन शिखर दीप छुट्टी पर अपने घर पूर्णिया गए थे और वापस दिल्ली रवाना होने के बाद से लापता हैं। सेना एवं पुलिस तीन दिनों से सैन्य अधिकारी की तलाश में जुटी है, लेकिन कोई सुराग नहीं मिला है।

कैप्टन शिखरदीप के पिता अनंत कुमार ने स्वयं कटिहार रेल पुलिस अधीक्षक से मिलकर इस संबंध में त्वरित कार्रवाई किए जाने की मांग की है, जो स्वयं भी सेना में लेफ्टिनेंट कर्नल के पद पर पडोसी राज्य झारखंड के रांची में पदस्थापित हैं। कटिहार रेल पुलिस अधीक्षक जितेन्द्र मिश्रा ने बताया कि इस मामले में धारा 363 के अन्तर्गत मामला दर्ज किया गया है।

उन्होंने बताया कि कैप्टन शिखरदीप के मोबाइल फोन के कॉल डिटेल्स खंगाले जा रहे हैं। ट्रेन (महानंदा एक्सप्रेस) के टीटीई एवं बेडरोल कर्मी से भी पूछताछ की गयी है। बेडरोल कर्मी के अनुसार शिखरदीप को अंतिम बार कानपुर में देखा गया था। भारतीय सुरक्षा अकादमी की परीक्षा देकर दो साल पूर्व सेना में बहाल हुए शिखरदीप मूल रूप से पूर्णिया जिला के महेन्द्रपुर गांव के निवासी हैं और फिलहाल उनका परिवार कटिहार के ललियाही में रह रहा है।



शिखरदीप एक माह पूर्व छुट्टी लेकर अपने परिजनों से मिलने बिहार आए थे तथा कटिहार और पूर्णिया में अपने परिजनों से मुलाकात करने के बाद गत 6 फरवरी को महानंदा एक्सप्रेस ट्रेन से दिल्ली के लिए रवाना हुए थे। उनके परिजनों के मुताबिक 6 फरवरी की रात तक उनसे बातचीत हुई लेकिन जब ट्रेन दिल्ली पहुंची तो वह ट्रेन में नहीं थे जबकि उसका सामान यथावत था। उनका मोबाइल स्वीच आफ बताया जा रहा है।
परिजनों ने उनकी काफी खोजबीन कराई लेकिन उनका कोई पता नहीं चल पाने पर उनके पिता लेफ्टिनेंट कर्नल अनंत कुमार ने कल कटिहार रेल पुलिस जितेन्द्र मिश्रा से मिलकर इस मामले की जानकारी दी तथा उनके बहनोई तथा कटिहार निवासी जिम्मी प्रकाश ने इस मामले में प्राथमिकी दर्ज कराई।

शिखरदीप के पिता अनंत कुमार को आशंका है कि उनके बेटे के अपहरण के पीछे कोई बडी साजिश तो नहीं या फिर इसके तार कहीं उग्रवादी संगठनों से तो नहीं जुडे हैं।
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