बेंगलुरू की वो डरावनी रात...पीड़िता ने सुनाई झकझोर देने वाली आपबीती

31 दिसबर की रात जब पूरा देश नए साल के जश्न में डूबा हुआ था, हर तरफ जश्न का माहौल था, उस रात बेंगलुरू में कुछ ऐसा हुआ, जिसने पूरे देश में आक्रोश पैदा कर दिया...

  • Last Updated: January 4, 2017, 11:56 PM IST
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नई दिल्ली। 31 दिसंबर की रात पूरा देश नए साल के जश्न में डूबा हुआ था, हर तरफ जश्न का माहौल था, उस रात बेंगलुरू में कुछ ऐसा हुआ जिसने पूरे देश को झकझोर दिया। वो रात बेंगलुरू के लिए शर्मनाक और डरावनी थी। उस रात लड़कों की भीड़ ने लड़कियों के साथ ऐसी हरकतें कीं, जो अगले दिन सुर्खियां बनी। जिसने भी इस घटना के बारे में सुना, सोचे बिना नहीं रह सका कि आखिर बेंगलुरु जैसे तरक्कीपसंद शहर में ऐसा हो कैसे हो सकता है?

31 दिसंबर की उस रात शहर के एमजी रोड और ब्रिगेड रोड पर नए साल का जश्न मनाया जा रहा था, इसी बीच हजारों लड़कों की भीड़ ने लड़कियों के साथ छेडछाड़ करनी शुरू कर दी। इन मनचलों ने अश्लील हरकतें कीं, भद्दे कमेंट्स किए और ये सब हुआ वहां मौजूद पुलिस के सामने। एक अखबार के रिपोर्टर ने बताया कि उसने खुद देखा कि कई महिलाओं ने पुलिस के पास जाकर छेड़छाड़ और गंदे कमेंट की शिकायत की, लेकिन पुलिस ने ये कहकर एक्शन नहीं लिया कि इस पर कोई एफआईआर दर्ज नहीं हुई।

अगले दिन अखबार में मदद की गुहार लगाती लड़कियों और महिलाओं की तस्वीरें भी छपीं जिनमें दिखाई दे रहा है लड़कियां रो रही हैं, अपनी सैंडल हाथ में लेकर भाग रही हैं। लाचार लड़कियां पुलिस से मदद की भीख मांग रही हैं। 31 की उस रात एमजी रोड पर जब ये सब हुआ उसी वक्त एमजी रोड के पास इंदिरा नगर में भी एक लड़की के साथ भी कुछ ऐसा ही हुआ। इस लड़की ने उस रात की आपबीती न्यूज18इंडिया.कॉम को बताई।



सवाल: उस रात आपके साथ क्या हुआ?
जवाब:  मैं ऑफिस से घर जा रही थी, क्योंकि मैं एक फोटोग्राफर हूं तो कई बार मेरा रात का काम भी होता है। बेंगलुरू में जो हुआ वो एमजी रोड पर हुआ और मेरे साथ जो हुआ वो इंदिरा नगर में हुआ। वहां इतनी मीडिया नहीं थी इसलिए मेरे साथ जो हुआ वो कवर नहीं हुआ। मैं रात को जब घर जा रही थी तब मेरे सामने से दो लड़के आ रहे थे, उनको देखकर ही समझ आ गया था कि उनका इरादा गलत है मैं थोड़ा साइड हो गई। उसी का चांस लेकर एक लड़के ने मुझे गलत तरीके से छुआ। मैं उस वक्त बिल्कुल ब्लैंक हो गई थी, डर गई थी। जब थोड़ा संभली तब मैंने उस लड़के पर अटैक किया, मैं जितना हो सके उसे मार रही थी उसे पीट रही थी। इस बीच 15-20 लड़के और आए उन्होंने मुझे पकड़ा और पीछे खींचने लगे। मैंने लड़कों से बोला कि आप मुझे क्यों खींच रहे हैं आप उस लड़के को पकड़ो। लड़कों ने जवाब दिया, 'अरे ये तो 31 की नाइट है ये तो होता रहता है जाने दो' और इसी बीच वो लड़का भाग गया। उस वक्त वहां कोई पुलिस मौजूद नहीं थी। वहां एक भी पुलिस वाला नहीं था जो मेरी मदद कर पाता। पांच मिनट बाद ही मैंने देखा वहां पुलिस आकर खड़ी गई हो गई, लेकिन उन्होंने मुझसे नहीं पूछा कि तुम्हारे साथ क्या हुआ? ये मेरे लिए बेहद दुखद था।

सवाल : पुलिसवालों के आने के बाद क्या आपने उन्हें बताया कि आपके साथ ये सब हुआ है?

जवाब : नहीं, मैं बता ही नहीं पाई, क्योंकि वो लड़का भाग चुका था। अगर मैं पुलिस के पास जाती तो वो मुझसे कहते, 'अब तो वो लड़का भाग गया आपको पकड़कर रखना चाहिए था, मैं ये सब सुनना नहीं चाहती थी...मैं उस हालत में नहीं थी कि ये सब सुन पाऊं।

सवाल: पास के एरिया में करीब 1500 पुलिसवाले थे, आपकी मदद करने कोई नहीं आया, किसी को पता तक नहीं चला?

जवाब:  वो 1500 पुलिसवाले इंदिरा नगर एरिया में नहीं थे, जब मेरे साथ ये सब हो रहा था उस वक्त एक भी पुलिसवाला वहां नहीं था।

सवाल: बेंगलुरू में कबसे रह रही हैं आप?

जवाब:  करीब दो साल से यहां हूं। मैं मुंबई की हूं, लेकिन काम के सिलसिले में यहां रह रही हूं।

सवाल: पिछले दो साल से आप यहां हैं, पहले कभी खुद को असुरक्षित महसूस किया?

जवाब: मैंने पहले कभी असुरक्षित महसूस नहीं किया। पिछले दो साल से यहां रह रही हूं कभी महसूस नहीं हुआ की ऐसा कुछ होगा या हो सकता है। कभी पहले कोई तकलीफ नहीं हुई। आज तक कभी किसी लड़के ने ऐसे बात तक नहीं की, ये पहली बार ऐसा हुआ है।

सवाल : क्या बेंगलुरू अब सुरक्षित शहर नहीं रहा?

जवाब :  मैं इस पर इतना बोल सकती हूं कि अगर इस हादसे के बाद भी ये सब नहीं रुका, लोगों की सोच नहीं बदली तो जरूर बेंगलुरू अब असुरक्षित शहर हो सकता है।

सवाल: बेंगलुरू के गृहमंत्री ने इस मामले पर जो बयान दिया उस पर आप क्या कहेंगी?

जवाब : भारतीय संस्कृति कहीं नहीं जा रही, लेकिन हमें दूसरे कल्चर को भी देखना चाहिए कि दूसरे कल्चर हमें क्या सिखाते हैं हमें ये भी पढ़ना चाहिए। हम कुछ भी पहनें हमें रोकटोक करने वाला कोई नहीं होता। भारत एक डेमोक्रेटिक देश है, हम एक डेमोक्रेटक देश में रहते हैं। अगर वेस्टर्न कल्चर नहीं आएगा तो भारत फिर से वैसा ही देश बन जाएगा, जहां लड़कियां बाहर नहीं निकल सकतीं। मेरी जैसी बहुत सी लड़कियां और औरतें हैं जो यहां आकर काम करती हैं। जब गृहमंत्री ऐसे बयान देते हैं तो घर बैठे लड़कियों के मां-बाप को क्या लगता होगा कि जहां के गृहमंत्री ऐसे बयान दे रहे हैं वहां हमारी बेटियां कितनी सुरक्षित होंगी?

सवाल : अबु आजमी ने  कहा है अगर कहीं पेट्रोल होगा और आग आएगी तो आग लगेगी ही। शक्कर गिरी होगी तो चीटी वहां जरूर आएगी, इस बयान पर क्या कहेंगी?

जवाब:  हम सऊदी अरब में नहीं रहते कि लड़की जब बाहर जाए तो उसके साथ भाई या पिता होना ही चाहिए। जब हमारे देश को डेमोक्रेटिक देश का नाम दे रखा है तो यहां की डेमोक्रेसी का मतलब भी समझना चाहिए। लोग जब ऐसे बयान देते हैं, तो बहुत गुस्सा आता है। लगता है मॉलेस्ट करने वालों की क्या गलती जब लीडर्स ही उन्हें सपोर्ट कर रहे हैं। इससे छेड़छाड़ करने वालों का हौसला बढ़ता है। वो यही सोचते हैं कि जब हमारे लीडर्स की ही ऐसी सोच है तो हम ये सब क्यों न करें? अगर जेल जाएंगे तो थोड़े दिन में छूट ही जाएंगे। लीडर्स के इसी नजरिए की वजह से ऐसा लगता है कि लड़कियों के सपोर्ट में कोई नहीं है।

सवाल : मुंबई में आपको कभी असुरक्षित महसूस हुआ,  उस पल आपको लगा के वापस मुंबई चली जाऊं?

जवाब : जरूर मुझे उस वक्त ऐसा ही लगा, क्योंकि मुंबई में ऐसा कभी नहीं हुआ। मैंने आज तक कभी नहीं देखा कि किसी लड़की के साथ छेड़छाड़ हुई हो और पुलिस ने एक्शन ना लिया हो। मुंबई पुलिस बहुत सख्त है, अगर उनके पास जाकर कोई लड़की शिकायत करे तो वो लोग तुरंत एक्शन लेते हैं, लेकिन यहां पुलिस ऐसी नहीं है। यहां पुलिस कभी-कभी अपनी तमीज खो देती है, ये सब देखकर बहुत बुरा लगता है।

सवाल : अगर वो लड़का भाग न पाता तो आप उसका क्या करतीं?

जवाब : अगर वो मेरे हाथ में लगता तो मैं उसे तब तक मारती जब तक वो सबके सामने माफी नहीं मांग लेता। इंडिया के लोगों की सोच में कमी हैं। लोगों को अपनी सोच बदलनी चाहिए। लड़कियों को पीछे खींचने की कोशिश क्यों की जा रही है? मैं बस इतना ही कहूंगी अगर आप भी ऐसा कुछ फेस करती हैं, तो सामने आकर बोलें अगर बात को दबाकर रखेंगी तो जिसने आपके साथ गलत किया है वो आगे भी किसी और के साथ करेगा। जितना आप दबकर रहेंगी आपको देखकर दूसरी लड़कियां भी दबकर रहेंगी।

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