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आसाराम केस: मरने से पहले कृपाल सिंह ने पुलिस को बताए तीन नाम

पुलिस के मुताबिक मरने से पहले कृपाल सिंह ने तीन नाम बताए थे। जिनकी तलाश जारी है।

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नई दिल्ली। जो गवाही देगा वो जान से जाएगा, जो मुंह खोलेगा उसे गोली मारी जाएगी, ये खौफनाक हकीकत है आसाराम केस के गवाहों की। इस केस में बारी-बारी से गवाहों को रास्ते से हटाने की साजिश हो रही है। इस केस से जुड़े दोनों पक्ष खुद को पीड़ित बता रहे हैं। तो ऐसे में सवाल उठ रहा है कि आखिर मौत की बिसात पर ये खौफनाक चालें चल कौन रहा है।

शतरंज की एक ऐसी बिसात जिसमें शातिर चालें चली जा रही हैं। जो भी आगे कदम बढ़ा रहा है उसे मौत के घाट उतारा जा रहा है। लेकिन ये चालें कौन चल रहा है, ये ही साफ नहीं हो पा रहा है। आखिर कौन है मौत की इस शतरंज का मास्टरमाइंड, क्या वो कोई आसाराम का समर्थक है या कोई ऐसा शख्स, जो आसाराम के केस में गवाहों की हत्या कर इस मामले को उलझाने पर आमादा है। जो भी हो, फिलहाल तो बिसात बिछी हुई है। खुद आसाराम जेल में है। और बाहर इस खेल के प्यादे यानी गवाह एक के बाद एक ढेर हो रहे हैं। मौत की इस बिसात पर जो सबसे नया शिकार हुआ है, उसका नाम है- कृपाल सिंह।

आसाराम को जेल की सलाखों के पीछे पहुंचाने वालों में से एक कृपाल को मौत की नींद सुला दिया गया। शाहजहांपुर मे हुए गोलीकाण्ड में जख्मी कृपाल सिंह ने बरेली मे इलाज के दौरान दम तोड़ दिया। शुक्रवार की शाम कृपाल सिंह पर दो अज्ञात लोगों ने हमला किया था। कृपाल मोटरसाइकिल पर थे और हमलावर कार में सवार थे। जिन्होंने बेहद न्रुादीक से कृपाल पर गोलियां दागीं। वो गोलियां कृपाल के पीठ पर लगीं और उन्हें फौरन अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां से कृपाल को बरेली रेफर किया गया। कृपाल को गोली लगने के बाद उन्हें लकवा मार गया था। और फिर लाख कोशिश करके भी डॉक्टर उन्हें बचा नहीं सके। कृपाल की मौत के बाद अब परिवार सीबीआई जांच की मांग कर रहा है।



अब सवाल उठता है कि इस मोहरे को गिराने की चाल आखिर चली किसने थी। कृपाल सिंह की मौत से किसका फायदा होने वाला है। इस सवाल का जवाब आप खुद ढूंढ लेंगे अगर आप इसी साल जनवरी में अदालत में दिए गए कृपाल सिंह के इस बयान पर नजर डालें। कृपाल ने कहा था कि पीड़ित के परिवार को मैं बचपन से जानता हूं। ये साधारण और मध्यमवर्गीय परिवार है। ये लोग आसाराम के बड़े भक्त थे और आसाराम की भगवान की तरह पूजा करते थे। जहां भी आसाराम का सत्संग होता था ये परिवार इलाके के लोगों के साथ वहां जाता था। इसलिए ये परिवार आसाराम पर गलत आरोप नहीं लगा सकता।
हर वो गवाह जो केस की अहम कड़ी बना वो मारा गया। हर वो गवाह जिसने आसाराम के खिलाफ खुलासे किए उसपर गोली चली। अबतक किसी गवाह के हमलावरों का सुराग नहीं मिला है। लेकिन हर हमला, हर मौत इस साजिश में आसाराम और उसके समर्थक की मिली-भगत का इशारा कर रही है। पुलिस के मुताबिक मरने से पहले कृपाल सिंह ने तीन नाम बताए थे। जिनकी तलाश जारी है। इस बीच कृपाल सिंह की पत्नी और उनके बेटे की जान पर भी खतरा बताया जा रहा है।
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