तुर्की की सफाई को रूस ने किया दरकिनार, सीमा पर तैनात किया जंगी बेड़ा!

पूरी दुनिया आज एक ही सवाल का जवाब जानना चाहती है, क्या रूस बदला लेगा, क्या रूस अपने विमान पर मिसाइल हमले के लिए तुर्की को सबक सिखाएगा?

  • News18India
  • Last Updated: November 27, 2015, 6:56 PM IST
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नई दिल्ली।  पूरी दुनिया आज एक ही सवाल का जवाब जानना चाहती है, क्या रूस बदला लेगा, क्या रूस अपने विमान पर मिसाइल हमले के लिए तुर्की को सबक सिखाएगा? ये सवाल इसलिए उठ रहा है क्योंकि रूस ने तुर्की की सीमा के नजदीक अपने लड़ाकू दस्ते को तैनात कर रहा है। तुर्की लगातार सफाई दे रहा है, लेकिन रूस किसी की सुनने को तैयार नहीं है।

क्या दुनिया तीसरे विश्व युद्ध के मुहाने पर खड़ी है, क्या दुनिया के ताकतवर देशों के बीच बड़ी जंग छिड़ने वाली है? ये सवाल आप खुद पूछेंगे जब आपको हकीकत का अंदाजा होगा। तुर्की ने रूस के विमान को मार गिराया, इस बात को लेकर ना सिर्फ दोनों देश आमने-सामने खड़े हैं बल्कि दुनिया के कई देश भी इस झगड़े में कूद पड़े हैं। इस झगड़े में कौन किसकी साइड है, ये बाद में आपको आगे बताएंगे।

पहले तो ये जान लीजिए कि रूस ने तुर्की की इस हरकत का जवाब देने की तैयारी कर ली है। उसने तुर्की की सीमा के नजदीक सीरिया के लटाकिया में अपना सबसे ताकतवर बेड़ा तैनात कर दिया है। ये जगह तुर्की की सीमा से महज 30 मील दूर है लटाकिया में रूस का काफी पहले से एयर बेस है, जिसे मेमीम एयरबेस के नाम से जाना जाता है। सीरिया में आईएसआईएस आतंकियों पर बमबारी के लिए वो इसी एयर बेस का इस्तेमाल करता रहा है लेकिन अब उसके हथियारों की दिशा बदल गई है। लटाकिया में ऐसे हथियारों की तैनाती होने लगी है, जिससे तुर्की  में मिसाइल दागा जा सके।



इन्हीं में से एक है एस-400 डिफेंस मिसाइल सिस्टम, ये मिसाइल सिस्टम 250 किलोमीटर दूर तक मार करने में सक्षम है। इस एंटी एयरक्राफ्ट मिसाइल को तैनात करने का मतलब है कि अब रूस के किसी विमान या हेलीकॉप्टर की ओर बढ़ने वाले मिसाइल को बीच हवा में ध्वस्त कर दिया जाएगा।
इसके अलावा यहां पर चार SU-30 मल्टीरोल फाइटर एयरक्रॉफ्ट की तैनात किया गया है। 12 SU-25 अटैक एयक्रॉफ्ट को यहां उतार दिया गया है। 7 MI-24 हेलीकॉप्टर और T-90 टैंक्स को भी इस बेड़े में शामिल किया गया है।

अब आपको इन हथियारों की खासियत बताते हैं।  टी-90 टैंक्स में इतने तगड़े सेंसर लगे हैं कि ये अपनी तरफ आने वाली किसी भी गाड़ी को ढाई किलोमीटर दूर से ही भांप लेगा। दिन हो या रात, ये अपने दुश्मनों पर अभेद निशाना लगाने में माहिर है।  रूस के SU-25 और SU-30 हवा से हवा में मार करने वाले ऐसे एयरक्राफ्ट हैं जो अपने साथ 10 से ज्यादा मिसाइलें लेकर उड़ान भर सकते हैं  और एक वक्त में 2 से 3 मिसाइलें दाग सकते हैं।

क्या है रूस का इरादा?

अब आपको रूस के वो वॉर रूम के बारे में बताते हैं, वॉर रूम जहां खुद राष्ट्रपति ब्लादिमीर पुतिन बैठकर अपनी जंगी बेड़े की एक-एक हरकत पर नजर रख रहे हैं। एक बड़े से हॉल में रूसी सेना के सभी बड़े अधिकारी सामने लगे विशाल प्रोजेक्टर के जरिए उन सभी जगहों का जायजा ले रहे हैं, जहां रूसी सेना लड़ाई लड़ रही है। कौन सा टैंक किधर जा रहा है, किस लड़ाकू विमान ने उड़ान भर ली है, किस बेड़े की पोजीशन कहां है?

सबकुछ सैटेलाइट और आधुनिक तकनीक की मदद से यहां पता चल रहा है। पुतिन अपने खास सहयोगियों से बातकर लगातार रूसी सेना की रणनीति बना रहे हैं। रूस पहले ही कह चुका है कि उसके फाइटर प्लेन को मारकर तुर्की ने उसकी पीठ में छुरा घोंपा है। तुर्की  भले ही अपनी सफाई दे रहा हो, लेकिन उसकी हर बात को रूस नजरअंदाज कर रहा है। तुर्की के हमले के बावजूद जिंदा बच गए रूसी पायलट का कहना है कि उनका विमान तुर्की की सीमा में नहीं था, और ना ही हमले से पहले उन्हें कोई चेतावनी दी गई।

इन तस्वीरों को देखने के बाद अब कई पश्चिमी देशों में भी हलचल हो रही है। उधर तुर्की से एक ऑडियो क्लिप जारी कर दावा किया कि रूसी एयरक्राफ्ट को चेतावनी दी गई थी। तुर्की  के प्रधानमंत्री ने बयान दिया कि उनकी सेना ने तुर्की सीमा में घुस आए एक एयरक्राफ्ट को निशाना बनाया था, उन्हें नहीं पता था कि वो एयरक्राफ्ट रूस का है।


इन सारी सफाई के बावजूद रूस यही कह रहा है कि उसके विमान को जानबूझकर निशाना बनाया गया। इस बीच अमेरिका ने कहा है कि नाटो और अमेरिका तुर्की के साथ हैं। अमेरिका के मुताबिक तुर्की को अपनी सीमा की सुरक्षा करने का पूरा हक है। इतना ही नहीं अब ये भी कहा जाने लगा है कि सीरिया में आईएसआईएस आतंकियों को मारने के नाम पर रूस सीरिया में रह रहे तुर्की मूल के लोगों को निशाना बना रहा है, जिन्हें तुर्कमेन कहा जाता है।

जाहिर है दोनों तरफ से खुद को सही साबित करने के दावे किए जा रहे हैं, लेकिन दावों से परे रूस अपने सैनिक बेड़े को मजबूत करने में जुटा है। एक ऐसा बेड़ा जिसका मुकाबला करने में दुनिया के ताकतवर देशों को भी पसीना आ जाएगा। आपको याद दिला दें कि प्रथम विश्व युद्ध और द्वितीय विश्व युद्ध भी दो देशों के बीच उठे विवाद के बाद शुरू हुआ था। जिसके बाद दुनिया के सभी ताकतवर मुल्क अपनी-अपनी पसंद की साइड चुनकर लड़ाई में कूद पड़े थे। अब आशंका जताई जा रही है कि तुर्की और रूस का झगड़ा भी इसी तरफ बढ़ जाएगा, अगर मौजूदा विवाद को तुरंत रोका नहीं गया।
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