आसाराम के खिलाफ गवाही न देने की कृपाल को मिल रही थीं धमकियां!

कृपाल सिंह नाम का एक शख्स, जो आसाराम के केस का मुख्य गवाह था उसे दो अज्ञात हमलावरों ने गोलियां दागीं।

  • News18India
  • Last Updated: July 11, 2015, 10:37 PM IST
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नई दिल्ली। एक केस, एक साल, दो मौत और 9 गवाहों पर जानलेवा हमले, पिछले एक साल में आसाराम के केस का यही सच है। हर वो गवाह जो केस की अहम कड़ी बना वो मारा गया। हर वो गवाह जिसने आसाराम के खिलाफ खुलासे किए उसपर गोली चली। अबतक किसी गवाह के हमलावरों का सुराग नहीं मिला है। लेकिन हर हमला, हर मौत इस साजिश में आसाराम और उसके समर्थक की मिली-भगत का इशारा कर रही है। शुक्रवार को भी यूपी के शाहजहांपुर में कुछ ऐसा ही हुआ। कृपाल सिंह नाम का एक शख्स, जो आसाराम के केस का मुख्य गवाह था उसे दो अज्ञात हमलावरों ने गोलियां दागीं। कृपाल इस वक्त बरेली के अस्पताल में जिंदगी की जंग लड़ रहा है।

कृपाल की जिंदगी अब दवाओं और दुआओं के भरोसे पर है क्योंकि शुक्रवार की शाम कृपाल सिंह पर दो अज्ञात लोगों ने हमला किया था। कृपाल मोटरसाइकिल पर थे और हमलावर कार में सवार थे। जिन्होंने बेहद नजदीक से कृपाल पर गोलियां दागीं। वो गोलियां कृपाल के पीठ पर लगीं और उन्हें फौरन अस्पताल में भर्ती कराया गया। जहां से कृपाल को बरेली रेफर किया गया। इस वक्त कृपाल की हालत नाजुक है और शरीर के निचले हिस्से ने काम करना बंद कर दिया है।

पुलिस के मुताबिक कृपाल सिंह उस परिवहन कंपनी में कर्मचारी है, जिसके मालिक की बेटी ने आसाराम पर बलात्कार का मुकदमा दर्ज कराया है। पीड़ित लड़की के पिता का दावा है कि ये हमला आसाराम के इशारा पर किया गया। पीड़ित लड़की के पिता ने बताया कि ये बाजार से अपने घर जा रहे थे, तो रास्ते में पुलिस लाइन के सामने दो बदमाश थे जिन्होंने पीछे से इन्हें गोली मार दी। ये आसाराम मामले में गवाह हैं तो उन्होंने चेतावनी दी थी कि अगर तुमने गवाही दी तो तुम्हारी खैर नहीं। धमकियां देते हैं वो लोग, कुछ दिन पहले वो लोग इनके घर धमकी देने पहुंचे थे कि गवाही मत देना।



कृपाल को लंबे वक्त से धमकियां मिल रही थीं। हर धमकी में यही कहा गया कि वो आसाराम के खिलाफ गवाही न दें। लेकिन कृपाल अपने बयान से पीछे नहीं हटे। कृपाल पर हमला किसने किया, हमला किसके इशारे पर किया गया, इसका पुलिस के पास कोई जवाब नहीं है। अब सवाल ये उठता है कि आखिर कृपाल पर इस जानलेवा हमले का मकसद क्या था। दरअसल इस साल जनवरी में कृपाल ने अदालत में एक अहम बयान दिया था। कृपाल ने कहा था कि पीड़ित के परिवार को मैं बचपन से जानता हूं। ये साधारण और मध्यमवर्गीय परिवार है। ये लोग आसाराम के बड़े भक्त थे और आसाराम की भगवान की तरह पूजा करते थे। जहां भी आसाराम का सत्संग होता था ये परिवार इलाके के लोगों के साथ वहां जाता था। इसलिए ये परिवार आसाराम पर गलत आरोप नहीं लगा सकता।
जाहिर है अगर इस हमले में कृपाल को कुछ हो जाता तो इसका फायदा आसाराम बापू को मिल सकता था। हालांकि आसाराम की प्रवक्ता इस हमले को साजिश नहीं, बल्कि इत्तेफाक करार दे रहे हैं। आसाराम की प्रवक्ता नीलम दुबे का कहना है कि जब भी हमें बेल मिलने वाली होती है, तभी इस तरह की घटनाएं हो जाती हैं। हम लोग तो खुद ही गवाहों की सुरक्षा की मांग कर रहे हैं।

बेशक आसाराम जेल में हो लेकिन गवाहों पर चलती गोलियां ये इशारा जरूर करती हैं कि कहीं इस खूनी खेल के पीछे खुद आसाराम तो नहीं। आपको बताते हैं कि आखिर पिछले एक साल में आसाराम के केस से जुड़े कौन कौन से गवाहों के खिलाफ जानलेवा हमले हुए। ताजा मामला कृपाल सिंह का है जिनपर दो अज्ञात हमलावरों ने गोलियां दाग दीं। 12 मई 2015 को इस केस से जुड़े बेहद अहम गवाह और आसाराम के आश्रम में कई बरसों तक काम करने वाले महेंद्र चावला पर भी अज्ञात हमलावरों ने हरियाणा के पानीपत में गोली चलाई, हालांकि इस हमले में महेंद्र बच गए।

11 जनवरी 2015 को केस के अहम गवाह अखिल गुप्ता की मुजफ्फरनगर में हत्या हो गई। 13 फरवरी 2014 को जोधपुर जिला कोर्ट के परिसद में ही केस के बड़े गवाह राहुल सचान पर चाकू से हमला किया गया। 14 फरवरी 2014 को सूरत में इस मामले की पीड़ित के पति पर भी चाकू से हमला किया गया। 14 मार्च 2014 को सूरत में ही दिनेश नाम के एक गवाह पर तेजाब फेंका गया। 23 मई 2014 को आसाराम के बेहद करीबी और इस केस के सबसे बड़े गवाहों में से एक अमृत प्रजापति की राजकोट में गोली मारकर हत्या की गई।
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