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बुलंदशहर में 10 दिन पहले भी हुई थी ऐसी ही दरिंदगी, मगर सबूत पी गई पुलिस!

News18India
Updated: August 2, 2016, 10:28 PM IST

बुलंदशहर गैंगरेप कांड ने पूरे देश को हिलाकर रख दिया है। राज्य की सियासत में तो इससे भूचाल आया ही हुआ है लेकिन पीड़ितों पर जो गुजरी है उसे सुनकर देशभर के लोग सन्न हैं।

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  • Last Updated: August 2, 2016, 10:28 PM IST
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नई दिल्ली। बुलंदशहर गैंगरेप कांड ने पूरे देश को हिलाकर रख दिया है। राज्य की सियासत में तो इससे भूचाल आया ही हुआ है लेकिन पीड़ितों पर जो गुजरी है उसे सुनकर देशभर के लोग सन्न हैं। इससे पहले दरिंदगी की ऐसी दास्तां शायद ही किसी ने सुनी थी लेकिन आईबीएन7 की टीम जब मौके पर पहुंची तो पता चला कि ये गैंगरेप कांड यहां अंजाम दिया गया, ऐसा पहला कांड नहीं था। यहीं से शुरू होती है IBN7 की एक्सक्लूसिव ग्राउंड रिपोर्ट बुलंदशहर का अर्धसत्य

इस इलाके का नाम है दोस्तपुर लेकिन यहां उस अभागी रात को कोई दोस्त नसीब न हुआ उन्हें। कोई फरिश्ता न उतरा, कोई बचाने न आया। उनकी कार रुकी  अपराधियों ने उन्हें अगवा किया और ज्वार के खेतों में ले जाकर पिता के सामने ही पत्नी और बेटी से गैंगरेप किया गया।

आईबीएन7 की टीम दोस्तपुर गांव ये जानने गई थी कि आखिर नोएडा के उस परिवार पर क्या गुजरी जब घुप अंधेरे में उनकी कार से कोई चीज टकराती है और इसी को चेक करने के लिए वो ब्रेक लगाने की भूल करते हैं। कार से उतरते ही 8 लोग उनपर हमला बोलते हैं और उसके बाद अगले तीन घंटे उनकी जिंदगी जहन्नुम बना दी जाती है। लेकिन हमारी टीम को इस इलाके से जैसे कई-कई चीखें सुनाई पड़ीं। चीखें गुजरे हादसों की, गुजरे हमलों की। ऐसे हमले जिनका कहीं जिक्र तक न हुआ, जिनके बारे में पता है सिर्फ और सिर्फ पुलिस को और वो पुलिस उन चीखों को दबा गई।

दोस्तपुर गांव के एक निवासी निर्मल सिंह बताते हैं कि उनके खेत के बराबर वाले खेत में 8-10 दिन पहले भी एक और ऐसी ही घटना घटी थी। सुबह जब वे अपने खेत में चारा लेने गए तो कुछ संदिग्ध चीजें देखीं और पुलिस की वैन को रोक कर उन्हें वे सबूत दिए।

हाइवे से सटा हुआ ये खेत, वही इलाका है जहां नोएडा के एक परिवार की बहू और बेटी के साथ गैंगरेप किया गया था। निर्मल सिंह की बात सच मानी जाए तो इसी इलाके में 8-10 दिन पहले भी शायद किसी के साथ जोर-जबरदस्ती की गई थी। निर्मल सिंह बताते हैं कि उस दिन मेड़ टूटी हुई थी। हमने वहां देखा टूटी हुई चूड़ियां पड़ी हुई थीं। महिला के फटे हुए कपड़े पड़े हुए थे। रस्सी पड़ी हुई थी। पन्नी थी, मोबाइल था। एक पर्स भी मिला था।

ये बुलंदशहर का अर्धसत्य है। आधा सच आपको बताया गया और आधा सच छिपा लिया गया। गांव के निवासी निर्मल सिंह हाथरस के एक कॉलेज में पढ़ाते हैं और वीकएंड पर दोस्तपुर अपने घर आते हैं। उस दिन भी वीकएंड था। उनका कहना है कि खेत की हालत देखकर ये साफ कहा जा सकता था कि किसी महिला के साथ कोई बड़ी अनहोनी हुई है।

निर्मल सिंह के मुताबिक गांव में ही एक मोबाइल फोन पड़ा हुआ था। इससे अहम सबूत और क्या होगा, किसी को पकड़ने के लिए। हमने पुलिस को दिया कि पता नहीं किसका फोन है। हमने कहा ट्रेस करो किसका है। सर्विलांस में डालो। पुलिस वालों ने कहा कि बात हुई तो फोन के मालिक ने कहा कि फरीदाबाद का रहने वाला हूं। पुलिस वाले चले गए। दो दिन बाद दोबारा मिले पुलिसवाले। मैंने पूछा कि क्या हुआ, कोई एक्शन लिया? जवाब मिला कि कुछ नहीं हुआ, वो लड़का तो आया ही नहीं।यानी बुलंदशहर के एक खेत में किसी महिला के फटे कपड़े, टूटी चूड़ियां, रस्सी के हिस्से और एक लावारिस मोबाइल फोन मिलता है और इसकी जानकारी पुलिस को दी जाती है, फिर भी पुलिस हाथ पर हाथ धरे बैठी रह जाती है। सोचिए अगर पुलिस इस घटना की, इन सबूतों की और खासकर उस लावारिस मोबाइल फोन की ठीक ढंग से जांच करती तो शायद एक वहशी हमले का सच सामने आ जाता।

ऐसा होता तो शायद नोएडा के उस परिवार की महिलाओं को वक्त रहते बचाया जा सकता जिन्हें उसी सड़क से शायद उन्हीं दरिंदों ने उठाकर अपना शिकार बना लिया। आखिर पुलिस ने मोबाइल फोन की जांच क्यों नहीं की? अगर की तो क्या पता चला? आखिर पुलिस ने उस खेत से मिले महिला के फटे कपड़ों की जांच क्यों नहीं करवाई?

बुलंदशहर के इस अर्धसत्य को देखकर हैरान आईबीएन7 की टीम ने बुलंदशहर के एसपी से बात की। वो छूटते ही बोले कि मैंने तो अभी ज्वाइन किया है लेकिन मामला गंभीर है और जांच करवाऊंगा। साफ है इस इलाके के एसएसपी और एसएचओ समेत 6 पुलिस वाले जिन्हें गैंगरेप की घटना के बाद सस्पेंड किया गया, उन्हें शायद इस दूसरी घटना की पूरी खबर थी, फिर भी वो चुप रहे आखिर क्यों।

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First published: August 2, 2016, 9:12 PM IST
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