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14 कैदियों को छुड़ाने के लिए पाक में रची गई साबरमती जेल को उड़ाने की साजिश!

अहमदाबाद की साबरमती जेल, वो जेल जिसमें आजादी के आंदोलन के वक्त खुद बापू महात्मा गांधी भी रहे थे, वो जेल पाकिस्तान से आने वाले मानव बमों की शिकार बन सकती थी।

अहमदाबाद की साबरमती जेल, वो जेल जिसमें आजादी के आंदोलन के वक्त खुद बापू महात्मा गांधी भी रहे थे, वो जेल पाकिस्तान से आने वाले मानव बमों की शिकार बन सकती थी।

अहमदाबाद की साबरमती जेल, वो जेल जिसमें आजादी के आंदोलन के वक्त खुद बापू महात्मा गांधी भी रहे थे, वो जेल पाकिस्तान से आने वाले मानव बमों की शिकार बन सकती थी।

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नई दिल्ली। भारत की एक बेहद सुरक्षित मानी जाने वाली जेल को तोड़ने की गहरी साजिश हमारे पड़ोसी मुल्क पाकिस्तान में  रची जा रही है। आईबीएन 7 को जांच एजेंसी एनआईए की फाइलों में कैद एक ऐसा सच मिला है जो एक गहरी साजिश का पर्दाफाश कर रहा है।

अहमदाबाद की साबरमती जेल, वो जेल जिसमें आजादी के आंदोलन के वक्त खुद बापू महात्मा गांधी भी रहे थे, वो जेल पाकिस्तान से आने वाले मानव बमों की शिकार बन सकती थी। उस जेल को तोड़ने के लिए इंडियन मुजाहिदीन किसी भी हद तक जा सकती है। उसने पाकिस्तान में सक्रिय अल-कायदा से संपर्क साधा और उसी के बाद बना पाकिस्तान का जेल तोड़ प्लान। मकसद इस जेल में कैद 14 लोगों को आजाद करवाना था।

उसी इंडियन मुजाहिदीन ने साबरमती जेल तोड़ने के लिए एक खास कोड रचा। अब आईबीएन7 आपको दो आतंकवादियों के बीच कोड वर्ड्स में हुई बातचीत के बारे में बताएगा। इन दोनों आतंकियों में से एक आतंकवादी साबरमती जेल के भीतर था उसका नाम असदुल्लाह तो दूसरा बैठा था पाकिस्तान में  उसका नाम मिर्जा शादाब बेग। दोनों ईमेल पर बातें कर रहे थे।

लेकिन ईमेल भेजा नहीं जा रहा था बल्कि ईमेल लिखकर ड्राफ्ट में सेव कर लिया जा रहा था। पाकिस्तान में बैठा दूसरा उसी ईमेल एकाउंट को खोलता और ड्राफ्ट खोल कर संदेशा पढ़ता, फिर अपना जवाब लिखकर दोबारा सेव कर देता। साबरमती जेल पर भयानक फिदाइन हमले का प्लान बन रहा था।

असदुल्लाह और मिर्जा शादाब बेग के बीच बातचीत

18 जुलाई 2013,

असदुल्लाह- यार मैंने सोचा था कि वो पत्र पढ़ के आगे का कुछ काम करने का (साबरमती जेल पर हमला करने का काम) सोचा था। डिपो (फिदायीन) लगाना है तो उससे अच्छी जगह (गुजरात) क्या होगी?

मिर्जा- यार और बीएनडी (बंदूक) भी होनी चाहिए सब (आतंकियों) के पास, इस काम (फिदायीन हमला) को पूरा करने के लिए कम से कम पांच लोग चाहिए। जेल के अंदर की सारी जानकारियां चाहिए होंगी, उसके मुताबिक तय होगा कि क्या करना है?

ये बातचीत का सरल रूप है जबकि इंडियन मुजाहिदीन के आतंकवादी असदुल्लाह और मिर्जा के बीच बातचीत कोड़्स में हो रही थी। ऐसे कोड जो जटिल और चकराने वाले थे  कई शब्दों का मतलब क्या था? दरअसल, कुछ काम करने की जगह यानी साबरमती जेल, डिपो  यानी फिदाइन यानी आत्मघाती हमला यानी मानव बम का हमला, अच्छी जगह  यानी गुजरात और बीएनडी यानी बंदूक।

यानी असदुल्लाह कह रहा है कि साबरमती जेल पर हमले का वक्त आ गया है और ये काम गुजरात में फिदाइन ही करेंगे, पाकिस्तान में बैठा आतंकवादी उसके जवाब में कहता है कि जेल पर कम से कम 5 आतंकवादी हमला बोलें और सबके पास हथियार हों, लेकिन उन्हें जेल के भीतर की हर जानकारी चाहिए।

एनआईए को ये बातचीत असदुल्लाह के कंप्यूटर से मिली। जब कंप्यूटर जब्त किया गया तो उसके ईमेल के सारे फोल्डर डिलीट किए जा चुके थे। इस बातचीत का  साजिश का कोई सबूत छोड़ा नहीं गया था, लेकिन उस बातचीत को पाताल से वापल लौटाने का जतन काम आया। इतना ही नहीं कोड्स को डीकोड करने में भारत ने दो मुल्कों की मदद भी ली।

बाकायदा अमेरिका की CERT यानी UNITED STATES COMPUTER EMERGENCY READINESS TEAM और ब्रिटेन की CERT यानी UNITED KINGDOM COMPUTER EMERGENCY READINESS TEAM की मदद से NIA ने दो कंप्यूटर डीकोड किए।  इस बातचीत का जिक्र अहमदाबाद सीरियल ब्लास्ट की सप्लीमेंटरी चार्जशीट में दर्ज है। ये बातचीत साफ बताती है कि किस तरह सरहद पार पाकिस्तान से पूछा जा रहा था कि साबरमती जेल पर फिदाइन हमले के लिए विस्फोटक कहां से आएंगे।

असदुल्लाह और मिर्जा शादाब बेग के बीच बातचीत

6 अगस्त 2013,

मिर्जा- क्या तुमने पता किया है कि यूरिया और पोटाश स्थानीय बाजार में मिल पाएंगे? अगर तुमसे नहीं हो पाए तो हम सीमापार से भेज देंगे।

असदुल्लाह- नहीं, इसकी चिंता करने की जरूरत नहीं है। मैं अपने हिस्से का काम खुद पूरा कर लूंगा। एक बार सारी तैयारी पूरी हो जाए तो फिर फिदायीन हमले के लिए आगे बढ़ सकते हैं।

मिर्जा- यार डिपोजिट (फिदायीन हमला) होने को मांगता है (भारत में एक फिदायीन हमला तो करना ही चाहिए)

असदुल्लाह- हां सब कुछ हो जाए तो उसका बनाते हैं (विस्फोटक का इंतजाम हो जाए तो फिदायीन हमला करेंगे)

यूरिया और पोटाश मतलब विस्फोटक,  पाकिस्तान के जेल तोड़ो प्लान में  विस्फोटक पाकिस्तान से भेजने का प्रबंध करने की बात की जा रही है। और ये विस्फोटक राजस्थान से लगी पाकिस्तान की सरहद के रास्ते भेजा जाता, लेकिन भारत में बैठा इंडियन मुजाहिदीन का चेहरा साफ कहता है कि विस्फोट की चिंता मत करो। उसका जवाब मिलता है कि भारत में एक फिदाइन हमला तो होना ही चाहिए। लेकिन आखिर ये हमला किसके सिर पर सेहरे की तरह बांधा जाता, यहां भ्रम है, यहां भारत और पाकिस्तान के चेहरों में मतभेद नजर आता है।

असदुल्लाह और मिर्जा शादाब बेग के बीच बातचीत

14 अगस्त 2013,

असदुल्लाह- सभी इंतजाम हो जाने के बाद तुम्हें भारत शिफ्ट हो जाना चाहिए क्योंकि वहां एक बड़े काम को पूरा करना है।

मिर्जा- सही है मेरी दिली तमन्ना है कि माइक्रो (अल-कायदा) के नाम से एक बारा फाड़ दी जाए।

असदुल्लाह- हां लेकिन माइक्रो (अल-कायदा) का नाम हो, टेक (तालिबान) का नहीं...

मिर्जा- बड़ा साजिद ने पहले ही सब करार कर लिया है और वो अल-कायदा के काफी करीब है।

कोड वर्ड्स सुनिए माइक्रो यानी अल-कायदा और टेक यानी तालिबान। जोर दिया जा रहा है कि किसी भी सूरत में साबरमती जेल तोड़ने के बाद तालिबान का नाम नहीं लिया जाना चाहिए, नाम होगा तो सिर्फ अल-कायदा का। सूत्रों का कहना है कि ये अल-कायदा का पाकिस्तानी विंग था। जो, दरअसल इंडियन मुजाहिदीन का आका बना हुआ है। उसकी मदद से ही साबरमती जेल पर फिदाइन हमला होना था।

लेकिन ये साजिश ज्यादा दिन टिक न सकी। साबरमती जेल को मानव बम के धमाकों से उड़ाकर अपने प्यादों को आजाद कनरे की इंडियन मुजाहिदीन की साजिश परवान न चढ़ सकी। पाकिस्तान के मिर्जा शादाब बेग से बात करने वाला असदुल्लाह पकड़ा गया।  गुस्साए मिर्जा ने एक अंतिम संदेश भी भेजा।

असदुल्लाह और मिर्जा शादाब बेग के बीच बातचीत

29 अगस्त 2013,

मिर्जा- हेलो टेंशन नहीं लेना। बहुत जल्दी तेरा बदला लूंगा। बहुत महंगा पड़ेगा इनको ये...

लेकिन दो भटकल बंधुओं के बीच बातचीत जारी रही। यासीन भटकल की गिरफ्तारी के बाद उसके कंप्यूटर से भी खुफिया संदेशे निकाले गए  इसे सुनने से साफ पता चलता है कि इंडियन मुजाहिदीन अब अल-कायदा से जुड़ चुका है।

 रियाज भटकल और यासीन भटकल के बीच बातचीत

रियाज- अल कायदा के कई ऑपरेटिव भारत में काम कर रहे हैं। भारत में अल-कायदा का एक शख्स है जो कि यूपी को देखता है।

यासीन- क्या ये शख्स इंडियन मुजाहिदीन से अलग मॉड्यूल चलाता है?

रियाज- हां... अब वे अल-कायदा से जुड़ गए हैं।
यानि सिर्फ नाम बदला, लेकिन काम वही रहा। भारत में जेहाद के नाम पर खून खराबा फैलाना। शायद ये भारत की पहली ऐसी जेल थी जिसे तोड़ने के लिए आतंकवादियों ने इतना पसीना बहा डाला। 2011 से लेकर 2013 के बीच  यानी दो सालों के बीच इस जेल को तोड़ने केलिए दो बड़ी साजिशें रची गई थीं। 2011 में जेल के भीतर से 214 फुट लंबी सुरंग बना डाला गई थी। 214 फुट लंबी सुरंग  वो भी जेल की उसी बैरक  14 के नीचे से जिसमें 2008 के सीरियल ब्लास्ट के 14 आरोपी कैद थे।

इस सुरंग का पता लगने पर पूरे खुफिया तंत्र में भयंकर खलबली मच गई थी  क्योंकि ये सुरंग बैरक से होते हुए जेल की चारदीवारी के बाहर तक जाती थी। पहले पता चला था कि ये 26 फुट लंबी सुरंग है, लेकिन बाद में और पड़ताल के बाद इसकी लंबाई 214 फुट पाई गई। 16 फुट गहरी इतनी लंबी सुरंग 6 महीने से जेल के भीतर से  खोदी जा रही थी  उस वक्त शक के घेरे में इस जेल के अधिकारी और रखवाले भी आए थे। क्योंकि सिर्फ खाने के बर्तनों को तोड़ या मोड़ कर बनाए गए औजारों से इतनी लंबी सुरंग खोद पाना संभव न था। अगर एक हफ्ता और सुरंग का पता न चलता तो इंडियन मुजाहिदीन से जुड़े ये सभी 14 लोग भाग निकलते। इसी साजिश के नाकाम होने के बाद पाकिस्तान मे बैठे अल कायदा की मदद से इंडियन मुजाहिदीन ने साबरमती जेल को फिदाइन अटैक से उड़ाने की बड़ी साजिश रची।

(वीडियो देखें)

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