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इस गुमनाम से गांव में रची गई थी 26/11 हमले की साजिश

News18India
Updated: November 26, 2016, 10:18 AM IST

मुरीदके लाहौर से 40 किलोमीटर के फासले पर बसा वो कस्बा है जिस पर 2008 में भारत हवाई हमला करने वाला था।

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  • Last Updated: November 26, 2016, 10:18 AM IST
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नई दिल्ली। आतंक का हेडक्वार्टर, जी हां, पाकिस्तान का वो इलाका जहां से भारत के खिलाफ होने वाले हमले रचे जाते हैं। वो इलाका जहां भारत की जनता को खून से नहलाने की गहरी साजिशें रची जाती हैं। यह वही इलाका है जिस पर भारत ने 2008 में विमान से हमला करने की तैयारी कर ली थी।

आतंक का ये हेडक्वार्टर मुरीदके में स्थित है। मुरीदके लाहौर से 40 किलोमीटर के फासले पर बसा वो कस्बा जिसपर 2008 में भारत हवाई हमला करने वाला था। वो मुरीदके जिसे मुंबई हमले के बाद हर हिंदुस्तान ने मिटा देने की कसम खाई थी, इसी मुरीदके से 26/11 के हमले की साजिश रची गई थी। वो कस्बा जो सिर्फ लश्कर-ए-तैयबा के चलते दुनिया के नक्शे पर नजर आया। वो लश्कर जिसका आमिर या चीफ था, कभी इस्लामिक स्कॉलर रहा प्रोफेसर हाफिज मोहम्मद सईद। क्या आज भी यहां आतंक का कारखाना बेधड़क चल रहा है?

आखिर 2008 में मुंबई पर हुए आतंकवादी हमले के बाद भारत ने लाहौर के करीब मुरीदके की एक खास इमारत पर हवाई हमले की तैयारी क्यों कर ली थी, आखिर मुरीदके में ऐसा क्या था जो भारत के लिए नासूर बन चुका था और आखिर मुरीदके को नेस्तनाबूत करने पर भारत को क्या फायदा होता?

गुमनाम सा गांव 

मुरीदके एक गुमनाम सा गांव है जिसपर ग्रेट ट्रंक रोड पर सफर करते हुए अमूमन नजर भी नहीं पड़ती। मुरीदके भारत में सबसे ज्यादा खून खराबा फैलाने के जिम्मेदार लश्कर-ए-तैयबा की मां है। ये आतंकवादी संगठन यहीं पैदा हुआ, पला बढ़ा और उसे नफरत की घुट्टी पिलाई गई।

दरअसल, मुरीदके में ये इमारत भारत की आंखों में किरकिरी की तरह हर वक्त चुभती रहती है। यही है आतंक का हेडक्वार्टर, लश्कर-ए-तैयबा का ट्रेनिंग हेडक्वार्टर और लश्कर पर बैन लगने के बाद समाजसेवा की आड़ में खड़े के गए जमात-उत-दावा का दफ्तर। इसकी इमारत 200 एकड़ में फैली है ।

हथियारों से लैस आदमियों की निगरानी, कंटीले तारों से घिरी रहस्यमय इमारत, चारों तरफ ऊंजे पेड़ों से घिरा दफ्तर, भीतर मदरसा, फार्म्स, मस्जिद, एक बड़ा स्विमिंग पूल, मछली पालने का बड़ा तालाब और घोड़ों का अस्तबल। कुछ साल पहले तक मुरीदके में इस हेडक्वार्टर तक जाना मुमकिन नहीं था। लेकिन 2008 में मुंबई हमले के बाद मुरीदके पर सवाल खड़े हुए।कहा गया कि भारत के खिलाफ हर बड़े हमले की साजिश इसी हेडक्वार्टर से रची जाती है, नौजवान लड़कों के दिमाग में जेहाद का जहर भी इसी मुरीदके में भरा जाता है और तो और वहां गोलियों की आवाजें भी सुनी जाती हैं।

फिर खबर आई कि भारत मुरीदके की इसी इमारत को हवाई हमले से उड़ाने की तैयारी में था, उसी के बाद पाकिस्तान ने इस बेहद सुरक्षित और रहस्यमय इमारत के द्वार दुनिया के लिए खोले। बाकायदा पत्रकारों को पहली बार भीतर का दौरा करवाया गया। कोशिश ये बताने की कि अब मुरीदके की ये इमारत लश्कर की नहीं बल्कि जमात-उद-दावा जैसे समाजिक संगठन की है और यहां पढ़ाई लिखाई का काम होता है।

बेहद करीने से बताया गया कि मुरीदके में जमात-उद-दावा के इस कॉम्पलेक्स में हॉस्टल हैं, यूनिवर्सिटी है और अल-अजीज नाम का अस्पताल भी है। और यहां 5 हजार छात्र तालीम हासिल कर रहे हैं। लेकिन क्या ये हाथी के दिखाने वाले दांत थे?

क्योंकि ये उस गुट का हेडक्वार्टर रह चुका था जिसे जाना जाता है जेहाद के नाम पर नफरत से भरे आतंकवादी तैयार करने के लिए, वो आतंकवादी जिन्हें सिर्फ भारत में गोलियां चलाने का पाठ पढ़ाया जाता है। पता तो ये भी चला कि शायद मुंबई हमले में जिंदा पकड़ा गया आतंकवादी आमिर अब्दुल कसाब ने भी यहीं तालीम और ट्रेनिंग ली थी।

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First published: November 11, 2016, 10:18 AM IST
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