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ऐसे रची गई थी गुजरात में उना कांड की साजिश, पुलिस का था बड़ा रोल, ये है पूरा सच!

जनक दवे | News18India
Updated: September 7, 2016, 10:58 PM IST

वो खुद को गाय का रखवाला बताते हैं लेकिन उनके सीने में छल कपट और दुष्टता है। वो जानते हैं कि कानून की रखवाली की कसम खाने वाले उनकी साजिश में उनके साथ हैं।

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  • Last Updated: September 7, 2016, 10:58 PM IST
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नई दिल्ली। वो खुद को गाय का रखवाला बताते हैं लेकिन उनके सीने में छल कपट और दुष्टता है। वो जानते हैं कि कानून की रखवाली की कसम खाने वाले उनकी साजिश में उनके साथ हैं। ये कहानी है गुजरात के उस उना की जहां गाय मारने के इल्जाम में कथित गोरक्षकों ने दलितों को जमकर पीटा था। आईबीएन 7 ने जुलाई में बताया था कि दलितों को पीटने में पुलिस की लाठियों का इस्तेमाल किया गया था, यानि पुलिसवाले इस पिटाई के मूकदर्शक थे, उनकी रजामंदी से सबकुछ हुआ था।

आज गुजरात सीआईडी ने भी हमारी उस पड़ताल पर मोहर लगा दी है। 1500 पन्नों की चार्जशीट में साफ कह दिया है कि वो गोरक्षक नहीं गुंडे थे और उनकी मददगार पुलिस थी। चार पुलिसवालों को गिरफ्तार कर लिया गया है। पता ये चला है कि जिस गाय की हत्या के आरोप पर दलित पीटे गए उसे एक दिन पहले शेर मार चुका था।

ये घटना 11  जुलाई को उना की बताई गई थी  एक बुजुर्ग हाथ जोड़कर खड़ा है वहीं उसके पीछे चार नौजवान जमीन पर बैठे हैं। उन्हें देखकर लग रहा था कि उनकी बुरी तरह से पिटाई की गई है। बुजुर्ग सामने खड़े दबंगों से बख्शने की गुहार लगा  रहा था लेकिन सभी हाथों में लाठी लिए थे और इस इंसान पर गोहत्या और खाल की तस्करी का आरोप लगाकर उसे भी पीटने लगे।

बता दें कि जिस लाठियों से नौजवानो को पीटा जा रहा था ऐसी लाठियां या तो पुलिस के पास होती हैं या फिर पैरा-मिलिट्री के जवानों के पास। आईबीएन 7 ने अपनी कवरेज में साफ बताया था कि ये लाठियां पुलिसवालों के पास से आखिर इन फर्जी गोरक्षकों के पास कैसे पहुंच गईं। हमने पूछा था सवाल कि क्या पुलिस और गोररक्षक मिले हुए थे, क्या पुलिस वाले जानते थे कि गाय की रखवाली के नाम पर मार-पीट और धमकाने का गोरखधंधा चल रहा है। अब गुजरात सीआईडी क्राइम ने हमारे हर शक को सच माना है।

सीआईडी क्राइम ने चार पुलिसवालों को गिरफ्तार कर लिया है  चारों को फर्जी गोरक्षकों का साथ देने और फर्जी कहानी बनाने और कानूनी की नजरों में धूल झोंकने के इल्जाम हैं। गिरफ्तार किए गए पुलिसवालों में एक पुलिस इंस्पेक्टर, एक PSI,एक असिस्टेंट पुलिस सब-इंस्पेक्टर, एक पुलिस कॉन्स्टेबल शामिल हैं। 1500 पन्नों की चार्जशीट में साफ कहा गया है कि  गोरक्षक फर्जी थे उनकी पुलिस वालों की मिलीभगत थी। साजिश के तहत फर्जी गोरक्षकों के साथ मिलकर पुलिस ने गाय चोरी की फर्जी शिकायत दर्ज करवाई। उस गाय की चोरी की रिपोर्ट दर्ज करवाई गई जिसे शेर ने मार डाला था। पुलिस मरी हुई गाय के मालिक को उना पुलिस थाने ले गई और वहां उससे जबरन शिकायत लिखवाई।

गाय का मालिक गीर गड्ढ़ा पुलिस थाने के इलाके में रहता था फिर भी उसकी शिकायत उना थाने में लिखवाई गई। इस कहानी में चार पुलिसवालों जैसे पगार सरकार की ले रहे थे लेकिन काम फर्जी गोरक्षकों का कर रहे थे। एक गाय जिसे शेर ने मार डाला उसके कत्ल के इल्जाम में दलितों की पिटाई की जाती रही और पुलिसवाले तमाशा देखते रहे। कानून के रखवालों की जगह जैसे फर्जी गोरक्षकों का राज था वहां।

PSI नरेंद्र देव की चार्जशीट साफ कहती है कि नरेंद्र देव गाय के मालिक को उठा लाया और उससे फर्जी शिकायत लिखवाई । ASI कंचन खुद पेट्रोलिंग कर रही थीं, पीड़ितों पर हमला होते देखा लेकिन उन्हें बचाया नहीं उलटे फर्जी गोरक्षकों से कहा कि सबको लेकर पुलिस थाना जाएं, इसका नतीजा ये हा कि उना पुलिस थाना पहुंचने से पहले के दो घंटे लगातार उन्हें पीटा जाता रहा।PSO कानजी चूडासमा : पीड़ितों ने 100 नंबर पर फोन किया, जिसकी जानकारी उना कंट्रोल रूम से दी गई। थाने में मौजूद चूडासमा को तो घटना के बारे में पहले से जानकारी थी फिर भी उसने सिर्फ हाथापाई की इंट्री की। इसी कांस्टेबल ने गाय का पंचनामा किया और उसके पास मांस मिलने की फर्जी बात लिखवा दी

इंस्पेक्टर निर्मल सिंह झाला :  ये भी पूरी घटना से वाकिफ थे इसके बावजूद फर्जी गोरक्षकों को कानून की सीमा से बाहर जाकर मदद करते रहे। सीआईडी क्राइम की चार्जशीट के मुताबिक फर्जी गौरक्षकों ने पहले से, गुपचुप तरीके से साजिश रची और ये बात फैलाई गई की दलित जिंदा गाय को मार रहे हैं और उसका चमड़ा निकाल रहे हैं।

आईबीएन 7 के हाथ लगी चार्जशीट साफ कहती है कि जो गाय मारी गई थी उसकी खाल जांच के लिए एफएसएल लैब भेजी गई थी। लैब की रिपोर्ट भी साफ करती है कि इस गाय को शेर ने मारा था क्योंकि गाय के शरीर पर एशियाटिक लॉयन के बाल पाए गए हैं। ऐसे में ये दावे भी झूठे साबित हुए कि दलित गाय को मार कर उसकी खाल निकाल रहे थे।

मरी हुई गाय के मालिक से जब सीआईडी ने पूछताछ की तो उसने बताया की उसे तो पता था की उसकी गाय शेर ने ही मारी है और वो खुद पुलिस थाने नहीं गया था बल्कि उसके साथ पुलिस ने जबरदस्ती की थी। ऐसे में अब सवाल ये है कि पुलिस ने ऐसा किया क्यों? आखिर पुलिसवालों और फर्जी गोरक्षकों के बीच क्या समझदारी थी जिसके चलते उन्होंने एक  गाय को लेकर ऐसी साजिश रच डाली।

इस मामले में सीआईडी क्राइम ने 337 गवाहों के बयान दर्ज किये हैं। अबतक 52 मोबाइल फोन जब्त किए गए हैं, उनके कॉल डीटेल्स खंगालने के बाद ये साबित हुआ है की ये सोची समझी साजिश थी। मगर फिर वही सवाल आखिर ये साजिश रची किसने और क्यों?

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First published: September 7, 2016, 10:18 PM IST
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